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जीका वायरस को लेकर जहां लोगों में डर बना हुआ हैं वहीं वैज्ञानिक इससे बचने के लिए दवाओं और टीके की खोज में लगे हुए हैं। हाल ही में अमेरिका यूर्निवर्सिटी ऑफ हवाई के शोधकर्ताओं नें एक टीका विकसीत किया है जो जीका से बचाव के लिए कारगर हो सकता है। शोधकर्ताओं ने इसका सफल प्रयोग चूहों और बंदरों पर किया है। जीका वायरस ऐसा संक्रमण हो जो मनुष्य के बच्चों में दिमागी विकार भी पैदा कर सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार बंदरों पर टीके का प्रभावी साबित होना महत्वपूर्ण है। इसका उपयोग क्लिनिकल तौर पर और विकसीत करके मुनुष्यों पर भी किया जा सकता है। ये भी पढ़ेंः अमेरिका में जीका से लड़ने को 6 नए एंटीबॉडी विकसित।
वर्ष 2015-16 में ब्राजील में जीका संक्रमण के फैलने के बाद इससे लड़ाई के लिए वैश्विक स्तर पर प्रयास शुरू हुए थे और 30 से अधिक टीके विकसित किए गए थे। जीका, संक्रमित मच्छर के काटने और संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाने से फैलता है। इस संक्रमण से बचाव का कोई उपाय नहीं है। सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए अब तक किसी टीके को मंजूरी नहीं मिली है। हवाई यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर एक्सेल लेहरर ने कहा कि यह प्रस्तावित टीका कारगर हो सकता है। ये भी पढ़ेंः जीका वायरस के संक्रमण से भी गर्भपात होने की संभावना।
क्या है जीका वायरसः जीका वायरस एक ऐसा वायरस है जो मच्छरों से फैलता है। इस पर शोध कर रहे डॉक्टर दावा कर रहे हैं कि यह एडीस मच्छरों के काटने से फैलता है। यह वही मच्छर है जिसके काटने से जिसके काटने से डेंगू, चिकनगुनिया और पीत ज्वर जैसी बीमारियां होती हैं। यह वायरस सीधे नवजात शिशु को अपना शिकार बनाता है। अगर बच्चा इस वायरस से प्रभावित हो जाए तो ताउम्र उस बच्चे की विशेष देखभाल करनी पड़ती है. इसके प्रभाव से बच्चा शारीरिक और मानसिक रूप से विकलांग हो सकता है। ये भी पढ़ेंः प्रेगनेंसी में जीका वायरस से रहना है बचकर, तो यूं रखें अपना ख्याल।