Yoga During Pregnancy : पर्यांकासन करेंगी तो डिलीवरी के बाद जांघों, पेट, कमर में नहीं दिखेगा मोटापा

प्रेग्नेंसी के बाद भी जांघों, पेट की मांसपेशियों में कसाव बना रहे, इसके लिए आपको प्रेग्नेंसी के दौरान ही कुछ योगासन का अभ्यास करना शुरू कर देना चाहिए। यदि आप प्रेग्नेंसी के शुरुआती महीनों से ही पर्यांकासन करने लगेंगी, तो काफी असर होगा।

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Written By: Anshumala | Updated : January 12, 2020 6:14 PM IST

प्रेग्नेंसी के बाद अक्सर महिलाओं के पेट, कमर, जांघों का हिस्सा मोटा, ढीला, लटका हुआ सा नजर आने लगता है। शरीर के इन भागों की त्वचा में कसावट यानी टाइटनेस नहीं रह जाती है। चर्बी बढ़ने से ये झूले हुए से नजर आते हैं, जो देखने में बहुत भद्दे लगते हैं। ऐसे में मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए योग का सहारा जरूर लें। आप प्रेग्नेंसी में कुछ खास तरह के योग (Yoga Benefits in Pregnancy) जैसे पर्यांकासन करेंगी, तो जांघों, पेट की मांसपेशियों में कसाव बना रहेगा। डिलीवरी के बाद चाहती हैं कि पेट, जांघ, कमर का हिस्सा लूज ना हो जाए, इस एक योगासन का अभ्यास आप प्रेग्नेंसी के शुरुआती महीनों से ही करना शुरू कर दें। हर महिला को प्रेग्नेंसी के समय योग (Yoga in pregnancy) करना चाहिए।

यदि आपको योग या कोई एक्सरसाइज करने से डर लगता है, तो (Yoga benefits in Pregnancy) तो किसी योग एक्सपर्ट से सलाह ले लें। योग के जरिए खुद के साथ-साथ अपने गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत को भी आप बना सकती हैं। जानें, किस तरह से पर्यांकासन करें और क्या हैं इसके लाभ…

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प्रेग्नेंसी में करें पर्यांकासन (paryankasana in pregnancy)

पर्यांकासन को काउच पोज (couch pose yoga) भी कहते हैं। इसका अभ्यास करने के लिए सबसे पहले आप फर्श पर एक दरी या आरामदायक चटाई बिछाकर बैठ जाएं। अब इसके ऊपर पीठ के बल लेट जाएं। अपने दोनों पैरों को सीधा रखें। घुटने एक-दूसरे के सामानांतर और साथ रहें। अब दोनों पैर को घुटनों के बीच से इस तरह मोड़ें की पैर के पंजे आपके जांघों के पास आ जाएं। जितनी देर तक अपनी क्षमता के अनुसार इस अवस्था में रह सकती हैं, रहने की कोशिश करें। सांस सामान्य गति में रखें।

पर्यांकासन करने के फायदे (paryankasana Benefits)

पर्यांकासन (paryankasana in pregnancy) करने से जांघों और पेट के आसपास की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है।

डिलीवरी के दौरान तकलीफ कम होती है। आसानी से प्रसव हो जाता है।

पर्यांकासन करने से मूत्र संबंधी बीमारियों से बचाव होता है। इससे प्रजनन अंग भी स्वस्थ रहते हैं।

प्रेग्नेंट महिलाओं को पर्यांकासन का अभ्यास जरूर करना चाहिए, क्योंकि डिलीवरी के दौरान प्रसव पीड़ा कम होती है।