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गर्भाशय को हेल्दी रखने में मददगार हैं ये 3 योगासन, फर्टिलिटी होगी मजबूत

Yoga For Healthy Uterus: कुछ योगासन गर्भाशय को हेल्दी रखने में मददगार साबित हो सकते हैं। इनके नियमित अभ्यास से फर्टिलिटी बूस्ट होती है।

गर्भाशय को हेल्दी रखने में मददगार हैं ये 3 योगासन, फर्टिलिटी होगी मजबूत

Written by priya mishra |Published : January 23, 2024 9:01 AM IST

Yoga For Healthy Uterus: योग करने से शरीर को अनगिनत लाभ मिलते हैं। यह न सिर्फ मन को शांत रखता है, बल्कि कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को भी दूर करता है। कुछ योगासनों के नियमित अभ्यास से महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याएं दूर हो सकती हैं। जैसा कि हम जानते हैं कि आज के समय में कई महिलाओं को फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में, योग की मदद से आप अपनी फर्टिलिटी को बूस्ट कर सकती हैं। योग के कुछ ऐसे आसान हैं, जो गर्भाशय और ओवरी को हेल्दी रखने में मदद कर सकते हैं। इससे कंसीव करने में आसानी होगी और कई बीमारियां भी दूर रहेंगी। आज इस लेख में हम आपको ऐसे ही कुछ योगासनों के बारे में बता रहे हैं, जिनके अभ्यास से महिलाएं अपने गर्भाशय को हेल्दी रख सकती हैं।

बद्ध कोणासन

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले योगा मैट पर पैरों को सीधा करके बैठ जाएं।

फिर अपने घुटनों को मोड़कर दोनों तलवों को एक-दूसरे से मिला लें।

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इसके बाद अपने हाथों को इंटरलॉक कर लें और पैरों के तलवों को पकड़ लें।

इसके बाद अपनी दोनों आंखें बंद कर लें और पैरों को ऊपर-नीचे हिलाएं।

इस आसन को आप 3-5 मिनट तक कर सकती हैं।

पश्चिमोत्तानासन

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले योगा मैट पर सुखासन में बैठ जाएं।

अब अपने दोनों पैरों को सामने की ओर सीध में खोलकर बैठ जाएं। दोनों एड़ी और पंजे मिले रहेंगे।

अब सांस छोड़ते हुए और आगे की ओर झुकते हुए दोनों हाथों से दोनों पैरों के अंगूठे पकड़ लें।

माथे को घुटनों से लगाएं और दोनों कोहनियों को जमीन पर टिकाएं।

इस मुद्रा में 1-2 मिनट तक रहें।

इसके बाद अपनी प्रारंभिक मुद्रा में लौट आएं।

इस प्रक्रिया को 3-5 बार दोहराएं।

सेतुबंधासन

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं।

अब अपने घुटनों को मोड़ें और तलवों को जमीन पर रखें।

अपने दोनों हाथों से पैरों की एड़ियों को पकड़ें।

सांस लेते हुए धीरे-धीरे अपनी बॉडी को ऊपर उठाएं।

इस मुद्रा में 1-2 मिनट तक रहें।

इसके बाद सांस छोड़ते हुए प्रारंभिक मुद्रा में आ जाएं।

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इस प्रक्रिया को 3-5 बार दोहराएं।