Yoga for Better Sleep : रात में नींद नहीं आती गहरी तो करें शिथिलासन, जानें फायदे

आपको भी रात में नींद नहीं आती है, तो आप योग (Yoga for Better Sleep) का सहारा भी ले सकते हैं। शिथिलासन (shithilasana for better sleep) करने से नींद ना आने की समस्या दूर होती है। जानें, शिथिलासन (shithilasana benefits) कैसे करें और इसके फायदे क्या हैं...

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Written By: Anshumala | Updated : January 19, 2020 7:36 PM IST

नींद ना आना सेहत के लिए सही नहीं है। अनिद्रा की समस्या कई कारणों से हो सकती है, जैसे भागती-दौड़ती जिंदगी, देर रात तक जागकर टीवी देखना, वीडियो गेम खेलना, मोबाइल चलाना, ऑफिस का काम करना आदि अनिद्रा की समस्या उत्पन्न कर सकता है। स्वस्थ रहने के हर किसी को 6 से 7 घंटे की नींद जरूरी होती है। तनाव या सही दिनचर्या नहीं होने के कारण भी लोगों को नींद नहीं आने की समस्या होती है। थायरॉइड हार्मोन, टेस्टोस्टेरोन, कोर्टिसोल और ग्रोथ हार्मोन के कारण नींद की समस्या होती है। आपको भी रात में नींद नहीं आती है, तो आप योग (Yoga for Better Sleep) का सहारा भी ले सकते हैं। शिथिलासन (shithilasana for better sleep) करने से नींद ना आने की समस्या दूर होती है। जानें, शिथिलासन (shithilasana benefits) कैसे करें और इसके फायदे क्या हैं...

नींद नहीं आती तो करें शिथिलासन (Reduce sleeping disorder with shithilasana)

रात में बार-बार नींद टूट जाती है या दो-तीन घंटे से ज्यादा नींद नहीं आती, तो यह सेहत के लिए सही नहीं है। इस वजह से आप सारा दिन आलस, सुस्ती महसूस करेंगे। मूड भी फ्रेश नहीं रहेगा। हर बात में चिड़चिड़ा महसूस करेंगे। नींद आने के लिए नींद की गोलियां खाते हैं, तो ऐसा ना करें। बस, आप प्रतिदिन शिथिलासन का अभ्यास करना शुरू कर दें।

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शिथिलासन तनाव और अनिद्रा दूर करता है। रात में जिन्हें गहरी नींद नहीं आती, उन्हें प्रतिदिन शिथिलासन का अभ्यास करना चाहिए। कुछ ही दिनों में नींद अच्छी आने लगेगी। साथ ही नींद न आने की समस्या से होने वाली बीमारियों से भी आप बचे रहेंगे।

शिथिलासन करने का तरीका (How to practice shithilasana)

पेट के बल दाईं करवट लेट जाएं। दायां हाथ और दायां पैर सीधा रखें। हाथ जांघों से लगे हुए हों। बाएं हाथ की कोहनी को मोड़कर मुंह के सामने इस प्रकार रखें कि कोहनी से कंधे तक 90 डिग्री का कोण बनता हो। बाएं पैर को इस प्रकार मोड़ें कि उसकी एड़ी दाएं पैर के घुटने को छूती हो। इसी प्रकार, बाईं करवट लेटकर करते समय बाएं हाथ-पैर को सीधा और दाएं पैर को मोड़कर रखें। इसे दाईं करवट लेटकर करना उच्च रक्तचाप के लिए और बाईं करवट लेटकर करना निम्न रक्तचाप के लिए लाभकारी है।

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