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Written By: Editorial Team | Updated : June 21, 2018 12:03 PM IST
दुरस्त पाचन तंत्र, बेहतर स्वास्थ्य प्राप्ति का एक महत्वपूर्ण स्तम्भ है योग। अगर व्यक्ति का पाचन तंत्र सुचारू रूप से काम करे, तो वह पेट दर्द, कब्ज, पेट के घाव (अल्सर), कील मुहांसों और वायु-विकार (गैस बनना) आदि अनेक समस्याओं से बच सकता है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2018 पर श्री श्री स्कूल ऑफ योग (आर्ट ऑफ लिविंग) की निदेशक कमलेश बरवाल ने हमें बताए पाचन तंत्र को फिट रखने के कुछ महत्वपूर्ण आसनों के बारे में।
क्यों बिगड़ता है पाचन तंत्र
अधिक मात्रा में तथा असमय भोजन करने, प्रकृति विरुद्ध पदार्थों के सेवन व तनाव आदि के फलस्वरूप पाचन तंत्र बिगड़ जाता है। इसे दुरस्त करने के लिए हम एक दो समय का उपवास करते हैं या कुछ एंटासिड (अम्ल-रोधी) गोलियां खा लेते है। इन सबसे लाभ तो होता है पर यह अस्थायी होता है।
स्थायी उपचार
हालांकि, अपने दैनिक जीवनचर्या में समूल परिवर्तन करना बड़ा कठिन है। फिर भी अपने पाचन तंत्र को सशक्त बनाने व पुनर्जीवन प्रदान करने के लिए कुछ प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। शरीर को अपनी पूर्व स्वस्थ अवस्था में लौटाने में योग से अधिक कारगर कोई और उपाय हो नहीं सकता। यह किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव से रहित एक प्रामाणिक तकनीक है, जो जीवनचर्या में बिना कोई विशेष परिवर्तन के शरीर को प्राकृतिक और सम्पूर्ण रूप से स्वस्थ करने में सक्षम है। निम्न योगासनों का अभ्यास उदर संबधी अंगों को शिथिलता प्रदान कर और तनाव मुक्त बनाकर, पाचनतंत्र को स्वस्थ सुचारू व सक्रिय बनाता है।
उस्ट्रासन (Camel pose)
उस्ट्रासन शरीर के अग्र-भाग में खिंचाव उत्पन्न करता है, जिससे उदर के सभी अंग सक्रिय हो जाते है। यह आसन शारीरिक मुद्रा (उठते बैठते समय शरीर की स्थिति ) को संतुलित करता है तथा महिलाओं को मासिक स्राव में होने वाले कष्ट से मुक्ति प्रदान करता है।
पवन मुक्तासन (Pavana muktasana)
पवन मुक्तासन से उदर के अंगों की मालिश होती है और उन्हें बल प्राप्त होता है। यह शरीर में जमा होने वाली वायु के निस्सरण में सहायक है और पाचन क्रिया को उद्दीप्त करता है।
धनुरासन (Dhanurasana)
धनुरासन उदर की मांसपेशियों में खिंचाव कर उन्हें बल प्रदान करता है। इससे शरीर कब्ज से मुक्त होता है और मासिक धर्म के कष्ट से भी छुटकारा मिलता है।
नौकासन (Naukasana)
यह आसन भी पेट के समस्त अंगों को बल प्रदान करता है, जिसके फलस्वरूप पाचन क्रिया में सुधार होता है। यह शरीर में इकट्ठे हुए तनाव को कम करता है तथा पीठ को सुदृढ़ करता है।
सेतुबंधासन (SetuBandhasan)
यह आसन पेट की मांसपेशियों को उत्प्रेरित करता है, जिससे पाचन बेहतर होता है। इसके अभ्यास से व्यक्ति तनाव, निराशा व चिंता से मुक्त हो जाता है।
पद्मासन (Lotus pose)
यह बैठ कर किया जाने वाला एक सरल आसन है, जो पाचन क्रिया को उन्नत करता है। मांसपेशियों के तनाव को कम करता है और रक्तचाप को नियंत्रित करता है।
आयुर्वेद– उत्तम स्वास्थ्य की कूंजी
योग के अभ्यास के साथ-साथ अपनी जीवनचर्या में आयुर्वेद को अपनाना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। आयुर्वेद हमारे शरीर की प्रकृति को संतुलित रखने के लिए उचित जीवनचर्या निर्धारित करने में सहायक है। आयुर्वेद हमें रोगों के निवारण के उपाय बताने के साथ-साथ उनके उत्पन्न होने के मूल कारणों को इंगित करता है। योग एक प्रभावी तकनीक है, जो न केवल पाचन तंत्र के लिए उपयोगी है अपितु वह सम्पूर्ण शरीर को सुगठित गठन करता है। अगर आप किसी प्रकार का शारीरिक व्यायाम करते हैं, तो उसमें आप योग आसनों का समावेश कर सकते हैं। किसी भी व्यायाम की तरह योग का असर नजर आने में भी समय लगता है। नियमित अभ्यास आपके पाचन तंत्र को सुदृढ़ कर आपके शारीरिक सौष्ठव को बढ़ाता है तथा शरीर को लचीला पन प्रदान करता है। प्रत्येक दिन आधा घंटे का समय अपनी योग चटाई पर बिताइए। उपरोक्त योगासनों में स्वयं को स्थिर कर अपने पाचनतंत्र को उसके उच्चतम स्तर पर पुनर्स्थापित कीजिए।
ध्यान रखने योग्य बातें
भोजन से आधा घंटे पूर्व व पश्चात पानी न पिएं।
रात में गरिष्ठ भोजन का सेवन न करें।
भोजन के तुरंत बाद लेटें नहीं, आधे घंटे बाद लेटें।
नियमित योगाभ्यास करें।
फास्ट फूड या जंक फूड से बचें।
अधिक रेशे (फाइबर) वाले पदार्थों का सेवन करें।
चित्रस्रोत: www.artofliving.org, Shutterstock.