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ऑटोइम्यून डिसॉर्डर क्या हैं? एक्सपर्ट से जानिए योग और लाइफस्टाइल की मदद से कैसे किया जा सकता है इन्हें मैनेज

ऑटोइम्यून बीमारियों के स्थायी इलाज नहीं हैं ऐसे में लाइफस्टाइल, योग और अन्य तरीकों से इन बीमारियों के लक्षणों को कम करने में मदद हो सकती है।

ऑटोइम्यून डिसॉर्डर क्या हैं? एक्सपर्ट से जानिए योग और लाइफस्टाइल की मदद से कैसे किया जा सकता है इन्हें मैनेज

Written by Sadhna Tiwari |Updated : January 21, 2025 8:57 PM IST

Tips to manage autoimmune disorders: ऑटोइम्यून डिजिज ऐसी बीमारियां जो किसी व्यक्ति को जन्म के समय से हो सकती है और अधिकांश मामलों में इन समस्याओं से आजीवन छुटकारा नहीं मिल पाता। शरीर में मौजूद इम्यून सेल्स शरीर की रोग-प्रतिरोधक शक्ति या इम्यूनिटी बढ़ाने (boosting immunity) का काम करता है। जब शरीर की इम्यून पॉवर बहुत कम हो जाती है या बहुत बढ़ जाती है तो इससे आपको इम्यून सिस्टम से जुड़ी गड़बड़ियां शुरू हो जाती हैं। इम्यून सेल्स का स्तर अगर बहुत अधिक हो तो ये सेल्स आपके शरीर को अंदर से ही डैमेज करने लगते हैं। इस कंडीशन को ऑटो इम्यून डिजिज कहा जाता है। वैस्कुलाइटिस, मल्टीपल स्केलेरोसिस,रूमेटॉइड आर्थराइटिस ,टाइप-1 डायबिटीज, ल्यूपस, मायोसाइटिस ऑटोइम्यून डिसॉर्डर्स और बीमारियां हैं।

ऑटोइम्यून डिजिजेज के साथ जीवन जीना और इन बीमारियों को मैनेज करना एक मुश्किल काम हो सकता है। लेकिन, स्ट्रेस को कम करने के लिए कुछ मेथड्स (methods to control stress) का इस्तेमाल करऑटोइम्यून बीमारियों के लक्षणों (symptoms of autoimmune disorders) को कंट्रोल किया जा सकता है और इस तरह बीमारी को मैनेज करने और ओवरऑल हेल्थ को सुधारने में भी मदद हो सकती है।

योग की मदद से ऑटो इम्यून बीमारियों को कैसे मैनेज किया जा सकता है? (Managing autoimmune diseases with yoga)

योग ऑटोइम्यून बीमारियों को मैनेज करने और शरीर में इंफ्लेमेशन को कम करने के साथ-साथ तनाव कम करने और आपकी ओवरऑल हेल्थ को बूस्ट करने का काम कर सकता है। ऑटोइम्यून बीमारियों में मरीज को बेहतर महसूस कराने और जल्दी रिकवरी के लिए कई तरीके से योग की मदद ली जा सकती है।

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अक्षर योग केंद्र के संस्थापक हिमालयन सिद्ध अक्षर (Himalayan Siddhaa Akshar, Founder of Akshar Yoga Kendra) के अनुसार, अपने डेली रूटीन में योग को शामिल करके आप अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के साथ-साथ शरीर में इंफ्लेमेशन के स्तर को कम करने (reduce inflammation) और ऑटोइम्यून बीमारियों को बेहतर तरीके से मैनेज करने (managing autoimmune conditions) का काम कर सकते हैं। अपने शरीर की सुनिए और अपने शरीर की क्षमता के अनुसार ही योग का अभ्यास करें। साथ ही साथ जरूरत के अनुसार समय-समय पर अपने रूटीन में बदलाव भी करें।

आसान योग आसनों का अभ्यास करें

एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि ऑटोइम्यून बीमारियों में योगाभ्यास की शुरूआत ऐसे आसनों से करें जो सरल हों और आसानी से जिनकी प्रैक्टिस की जा सके। आप स्ट्रेचिंग और रिलैक्सेशन के लिए बालासन (child's pose) या मर्जरीआसन (cat-cow stretch) का अभ्यास कर सकते हैं।

प्राणायाम करें (Deep Breathing Exercises)

रोजाना प्राणायाम और डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइजेस का अभ्यास करें। अनुलोम-विलोम और अन्य तरह के प्राणायाम आपके नर्वस सिस्टम को शांत करते हैं और स्ट्रेस लेवल को कम करते हैं।प्राणायाम करने से आपका इम्यून रिस्पॉन्स भी बढ़ता है और आप रिलैक्स्ड महसूस करते हैं।

मेडिटेशन करें (Meditation)

ध्यान करने या मेडिटेशन की मदद से भी शरीर में इंफ्लेमेशन को कम करने और इम्यून फंक्शन को सुधारने में सहायता होती है। मेडिटेशन के अभ्यास से स्ट्रेस बढ़ाने वाले हार्मोन्स जैसे-कॉर्टिसोल का स्तर कम होता है। इससे आप रिलैक्स्ड महसूस करते हैं।

योग निद्रा (Yoga Nindra)

यह एक विशेष तकनीक है जिसकी मदद से नींद से जुड़ी समस्याओं को कम करने और डीप रिलैक्शेसन को बढ़ाने की कोशिश की जाती है। योग निद्रा के नियमित अभ्यास से आपको तनाव से आराम मिलता है।

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लाइफस्टाइल में ये बदलाव ऑटो-इम्यून बीमारियों में हैं मददगार

  1. हेल्दी और बैलेंस्ड डाइट लें। फल, सब्जियों, साबुत अनाज और लीन प्रोटीन को डाइट में शामिल करें।
  2. रोजाना एक्सरसाइज करें। इससे मूड बेहतर होगा, तनाव कम होगा और स्ट्रेस लेवल कम होगा।
  3. पर्याप्त नींद अच्छे इम्यून फंक्शन के लिए बहुत जरूरी है। इससे आपकी ओवरऑल हेल्थ बेहतर होती है। इसीलिए, रोजाना 8 घंटे की नींद सोएं।
  4. स्मोकिंग,अल्कोहल से परहेज करें।

Disclaimer : प्र‍िय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्‍य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।