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यूरिक एसिड को कम करने में असरदार हैं ये 4 योगासन, जोड़ों के दर्द और सूजन से भी मिलेगी राहत

Yoga For Uric Acid: यूरिक एसिड के स्तर को कंट्रोल करने के लिए कुछ योगासन बेहद फायदेमंद साबित हो सकते हैं। आइए, जानते हैं ऐसे ही कुछ योगासनों के बारे में विस्तार से -

यूरिक एसिड को कम करने में असरदार हैं ये 4 योगासन, जोड़ों के दर्द और सूजन से भी मिलेगी राहत

Written by priya mishra |Published : April 16, 2024 9:44 AM IST

Yoga For Uric Acid: गलत खानपान और खराब जीवनशैली के कारण यूरिक एसिड की समस्या इन दिनों आम हो गई है। दरअसल, यूरिक एसिड शरीर में एक तरह का अपशिष्ट पदार्थ होता है, जो प्यूरिन नामक केमिकल के टूटने से बनता है। शरीर में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने के कारण जोड़ों में दर्द और सूजन, हड्डियों में दर्द, गाउट और किडनी स्टोन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में, यूरिक एसिड को कंट्रोल करना बहुत जरूरी हो जाता है। दवाइयों और डाइट के अलावा योग से यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है। कुछ ऐसे योगासन हैं, जो जोड़ों में जमा यूरिक एसिड क्रिस्टल को तोड़ने में मदद कर सकते हैं। आज इस लेख में हम आपको ऐसे ही कुछ योगासनों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके नियमित अभ्यास से यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है (Yoga To Control Uric Acid In Hindi)।

ताड़ासन

इस योगासन को करने के लिए जमीन पर सीधे खड़े हो जाएं।

इस दौरान अपनी कमर को सीधा रखें और आपके पैर आपस में जुड़े होने चाहिए।

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अब हाथ जोड़ने की मुद्रा में खड़े हो जाएं और धीरे-धीरे अपने हाथों को ऊपर की ओर ले जाएं।

अब अपनी एड़ियों पर उठने की कोशिश करें और शरीर का भार अपने निचले हिस्से पर डालें।

कुछ सेकंड तक इस स्थिति में रहने के बाद वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं।

इस प्रक्रिया को 10-15 बार दोहराएं।

धनुरासन

इस आसन को करने के लिए योगा मैट पर पेट के बल लेट जाएं।

अपने दोनों हाथों को सीधा रखें।

अब अपने घुटनों को मोड़ते हुए सांस छोड़ें।

अपनी एड़ी को अपने नितंबों के पास लाएं।

अब धनुषाकार होते हुए, अपने पैरों की उंगलियों को हाथों से पकड़ें।

अब गहरी सांस लेते हुए अपनी छाती को जमीन से ऊपर उठाएं।

फिर सांस छोड़े हुए, वापस प्रारंभिक मुद्रा में आ जाएं।

इस आसन को आप 3 से 5 बार कर सकते हैं।

भुजंगासन

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं।

अपनी कोहनियों को कमर से सटा के रखें और हथेलियां ऊपर की ओर रखें।

अब धीरे-धीरे सांस भरते हुए, अपनी छाती को ऊपर की ओर उठाएं।

उसके बाद अपने पेट वाले हिस्से को धीरे-धीरे ऊपर उठा लें।

इस स्थिति में 30-60 सेकंड तक रहें।

फिर सांस छोड़ते हुए प्रारंभिक मुद्रा में आ जाएं।

इस प्रक्रिया को 3-5 बार दोहराएं।

उष्ट्रासन

इस आसन को करने के लिए जमीन पर घुटने के बल बैठ जाएं और दोनों हाथों को कूल्हों पर रखें।

ध्यान रखें कि दोनों घुटने आपके कंधों के समानांतर हों।

अब गहरी सांस लें और रीढ़ की निचली हड्डी पर आगे की तरफ दबाव डालें।

इस दौरान पूरा दबाव नाभि पर महसूस होना चाहिए।

इसके बाद अपने हाथों से पैरों को पकड़ें और कमर को पीछे की तरफ मोड़ें।।

इस स्थिति में 30-60 सेकेंड रुकने के बाद आप धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आ सकते हैं।

इस प्रक्रिया को 3-5 बार दोहराएं।

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Disclaimer: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशनल उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरु की जानी चाहिए।