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आज है योग दिवस (Yoga Day) योग का जो लोग नियमित अभ्यास करते हैं, योग के महत्व को समझते हैं, वो हमेशा स्वस्थ रहते हैं। योग दिवस (Yoga Day) पर यह जानना बहुत महत्वपूर्ण है कि योग के लाभ क्या हैं ? आज की भाग-दौड़ भरी लाइफस्टाइल में अक्सर लोग तनाव (stress), थकान, इंफर्टिलिटी का शिकार हो जाते हैं। योग और तनाव का गहरा संबंध है।
योग तनाव को दूर कर हमें रिलैक्स करता है। फिजिकल, मेंटल या इमोशनल सभी तरह के स्ट्रेस यानी तनाव से दूर रखता है। हर दिन योग करने से आप ऊर्जावान बने रहते हैं। आधुनिक जीवनशैली में आगे बढ़ने और सफल होने के दबाव को हर व्यक्ति महसूस कर रहा है। इसके कारण लोगों को तमाम तरह की शारीरिक और मानसिक बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इनसे मुक्ति पाने के लिए योग और ध्यान जैसी पारंपरिक विधियां काफी कारगर साबित हो सकती हैं।
आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में लगभग प्रत्येक व्यक्ति भारी तनाव, असुरक्षा और चिंता के बीच से गुजर रहा है। इससे उसे उच्च और निम्न रक्तचाप, दिल की बीमारियां, मधुमेह, मानसिक असंतुलन जैसी बीमारियां हो रही हैं।
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योग करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है। खुले वातावरण, कॉटन और ढीले कपड़े पहनकर योग करना चाहिए। रोज सुबह खाली पेट योग का अभ्यास करना सेहत के लिए लाभप्रद होता है। योग करने से न सिर्फ आपको तनाव से राहत मिलता है, बल्कि आपके याद रखने की शक्ति भी बढ़ती है। मदर्स लैप आईवीएफ सेंटर की मेडिकल डायरेक्टर व आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. शोभा गुप्ता बात रही हैं किस तरह शीतली प्राणायाम तनाव और इंफर्टिलिटी की समस्या को दूर करने में कारगर है।
महानगरों में इस प्रकार के मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं, क्योंकि यहां आपाधापी रहती है। इसके अलावा पारिवारिक एकाकीपन भी अक्सर जोड़ों में अवसाद व बेचैनी पैदा करता है। आजकल लड़के-लड़कियां देर से शादी करते हैं। शादी करने के तुरंत बाद वह बच्चा नहीं चाहते। इस वजह से शुरुआत में वह कई तरह की सावधानियां बरतते हैं। और फिर जब महिला जल्दी गर्भधारण नहीं कर पाती तो चिंताग्रस्त हो जाती है। निरंतर दबाव में रहने के कारण वह दिन-रात बेचैन रहती है। गर्भधारण नहीं कर पाने के कारण वे निरंतर चिंता, डिप्रेशन, फ्रस्ट्रेशन में घुलने लगती हैं, जिसका असर उनकी सेहत पर पड़ता है।
हाल में हुए एक सर्वे के अनुसार, जो महिलाएं ज्यादा तनाव में रहती हैं, उनमें से 40 प्रतिशत महिलाओं में बांझपन की शिकायत होती है। हालांकि, अभी तक इस बात का ठोस प्रमाण नहीं है कि तनाव के कारण ही बांझपन है। फिर भी इस मुद्दे को लेकर कई मनोचिकित्सक व मनोवैज्ञानिकों ने अपने-अपने तर्क दिए हैं कि जो महिलाएं तनाव और डिप्रेशन में रहती हैं उनमें यह समस्या दोगुनी हो जाती है।
निरंतर चिंता और तनाव में रहने के कारण महिला व पुरुष दोनों के हारमोन्स असंतुलित होने लगते हैं। हमारे शरीर में केमिकल ट्रांसमीटर होता है। सेरोटोनियर और डोपामीन नामक हार्मोन मिलकर आपके दिमाग को संतुलित रखते हैं। शारीरिक स्तर पर महिलाओं में भारी अनियमित रक्तस्राव, मासिक धर्म के दौरान थकान, पेट में मरोड़, पेडू में दर्द या कब्ज की शिकायत हो जाती है। हारमोन्स का असर आपके दिमाग से होता है। जब आप लगातार किसी दबाव में रहते हैं, तो हार्मोन्स असंतुलित हो जाते हैं।
-आर्थिक रूप से परेशान लोग भी जल्दी तनाव में आते हैं।
- वर्क लोड होने पर भी हम पर तनाव हावी होने लगता है।
- ज्यादातर मामलों में आर्थिक स्थिति से ज्यादा रिलेशनशिप संबंधित मामले तनाव बढ़ाते हैं।
- टेक्नोलॉजी का ज्यादा इस्तेमाल लोगों में तनाव बढ़ा रहा है।
- हेल्थ प्रॉब्लम से भी तनाव पैदा होता है।
तनाव में योग करने से सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम को राहत मिलती है, जो बेचैनी को कम करती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि नियमित योग करने से तनाव कम होने के साथ ही फोकस बढ़ता है, जागरूकता आती है। यदि आप योग के जरिए तनाव को दूर करना चाहते हैं, तो सबसे उत्तम योगासन है शीतली प्राणायाम का अभ्यास करना।
शीतली प्राणायाम जैसा की इसके नाम से ही पता चलता है, इस प्राणायाम का संबंध शीतलता से है। यह शरीर को ठंडक प्रदान करता है। इस प्राणायाम को सभी योगासनों के बाद करना चाहिए। ऐसा करने से शरीर की थकान और मानसिक तनाव दूर होते हैं। इसके अलावा यह मन को शांति भी प्रदान करता है।
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शीतली प्राणायाम तनाव और इंफर्टिलिटी की समस्या को दूर करने में मदद करता है। © Shutterstock.[/caption]
अगर आप तनाव जल्दी ले लेते हैं या सिर दर्द की समस्या से परेशान हैं तो यह आसान आपके लिए बहुत फायदेमंद है। यह सिर दर्द को दूर भगाता है और दिमाग को शांत रखता है। यह प्राणायाम बहुत ही सरल और आसान है।
1 सबसे पहले चटाई बिछाकर बैठ जाएं। इसे आप किसी भी पद्मासन, सुखासन या अन्य किसी आसन में बैठकर भी कर सकते हैं।
2 इसके बाद अपनी जीभ को बाहर की तरफ निकालकर एक नली (पाइप) के सामान बना लें।
3 अब जीभ द्वारा बनाई गई नली के माध्यम से सांस लें और वायु से पेट को पूरा भर लें। अब पुनः जीभ को अंदर की तरह कर ले और मुंह को बंद कर लें।
4 इसके बाद अपनी गर्दन को आगे की ओर झुकाकर, अपने जबड़े के अगले भाग को छाती से लगाएं और थोड़ी देर के लिए सांस रोककर रखें।
5 अब वापस से गर्दन को सीधा कर लें और नाक से वायु को बाहर निकल दें। कोशिश करें सांस बाहर निकालने का समय, सांस अंदर खीचने के समय से अधिक हो। इस प्रक्रिया को आप अपनी क्षमतानुसार 40 बार तक कर सकते हैं।
- शरीर की आंतरिक गर्मी को कम करने का यह सबसे अच्छा तरीका है।
- मस्तिष्क और भावनात्मक उत्तेजना तथा मन की चंचलता को कम करने में सहायक है।
- यदि इसे सोने से पूर्व किया जाए तो गहरी और अच्छी नींद आती है तथा दिमाग भी शांत रहता है।
- गर्मी के दिनों में शरीर को ठंडक पहुंचाने में सहायक होता है।
- एसिडिटी और रक्तचाप को कम करता है।
- पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है तथा हृदय रोगों में लाभकारी है।
- अगर वातावरण में ठंडक या नमी हो तो यह प्राणायाम नहीं करना चाहिए।
- दमा और सर्दी-जुखाम से पीड़ित व्यक्तियों को नहीं करना चाहिए।
- अगर आपका रक्तचाप कम रहता है तब भी यह प्राणायाम नहीं करना चाहिए।