वर्ल्ड वॉएस डे 2019 : कर्कश आवाज को सुरीला बनाते हैं ये 4 आसन, नियमित करें इनका अभ्यास

''वर्ल्ड वॉएस डे'' पर जानें किन योगासनों के नियमित अभ्यास से आप अपनी आवाज को वर्षों सुरीली और मधुर बनाए रख सकते हैं।

WrittenBy

Written By: Anshumala | Updated : April 15, 2019 1:18 PM IST

कुछ लोगों का व्यक्तित्व काफी आकर्षक होता है, पर जैसे ही वह अपनी बात कहने के लिए अपना मुंह खोलते हैं, तो उनके व्यक्तित्व का सारा आकर्षण फीका पड़ जाता है। दरअसल, एक अच्छी आवाज सभी को आकर्षित करती है। इससे पर्सनालिटी में निखार भी आता है। यदि आपकी आवाज सुनते ही लोग निराश हो जाते हैं या फिर फटी हुई और कर्कश आवाज है, तो इसे आप कुछ आसान और योग मुद्रा के अभ्यास से सुरीला बना सकते हैं। योग में आवाज को बेहतर बनाने के लिए मुख्य रूप से गले और सांस पर ध्यान केन्द्रित किया जाता है। योगासन से गले का चक्र खुलता है। यदि आप प्राणायाम करते हैं, तो इससे आपके वोकल कार्ड्स ठीक होते हैं। यहां हम बता रहे हैं कुछ योगासन, जो आवाज को सुरीला बनाते हैं...

इसे भी पढ़ें : वर्ल्ड वॉएस डे 2019 : आवाज की जादू को रखना है बरकरार, तो जरूर आजमाएं ये टिप्स

उज्जायी प्राणायाम

उज्जायी प्राणायाम सांस की नलिका, स्वरतंत्र आदि को संतुलित बनाता है। उज्जायी प्राणायाम जल तत्व पर नियंत्रण लाता है। इसके नियमित अभ्यास से वाणी को मधुर बना सकते हैं।

यूं करें उज्जायी प्राणायाम 

जमीन पर सुखासन या पद्मासन की मुद्रा में सीधे बैठ जाएं। गहरी सांस लें। सांस लेते समय गले से आवाज निकालें। अब सांस कुछ सेकेंड के लिए रोककर रखें। शरीर पर बिना दबाव बनाएं सांस छोड़ दें। इसके नियमित अभ्यास से गला खुलता है और आवाज मधुर होती है।

भ्रामरी प्राणायाम

भ्रामरी प्राणायाम तनाव को दूर करता है। दिमाग को शांति और सुकून मिलता है। गले से सम्बंधित रोगों को दूर करता है। इसके नियमित अभ्यास से सुरीली आवाज पा सकते हैं।

यूं करें भ्रामरी प्राणायाम

पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं। आंखों को बंद कर लें। मन को शांत रखें। अब मेरुदंड को सीधा और दोनों हाथों को बगल में अपने कंधों के समांतर फैलाएं। हाथों को कोहनियों से मोड़ते हुए कान के नजदीक ले जाएं। अंगूठों से कानों को बंद कर लें। अब नाक से सांस भरकर धीरे-धीरे कंठ से भंवरे की तरह आवाज करते हुए सांस छोड़ें। पहले नाक से सांस अंदर लें और फिर बाहर छोड़ें। इसके अभ्यास 5 से 10 बार करें।

इसे भी पढ़ें : आवाज के जादू को रखना है बरकरार, तो करें शंख मुद्रा का अभ्यास

Singhasana for better voice सिंहासन उच्चारण ग्रंथियों को मजबूत करके स्वर उच्चारण सुधारता है। © Shutterstock.

सिंहासन

सिंहासन उच्चारण ग्रंथियों को मजबूत करका है, जिससे स्वर उच्चारण में सुधार आती है। गायकों को अपनी आवाज को और बेहतर बनाने के लिए सिंहासन का अभ्यास जरूर करना चाहिए। यह नाक, कान, गले और मुंह की समस्याओं को भी दूर करता है। इससे रक्तसंचार बेहतर होता है। चेहरे तथा गर्दन में कोमलता आती है। हकलाहट दूर होती है और आवाज की मिठास बढ़ती है।

यू करें सिंहासन

वज्रासन या पद्मासन में बैठें। घुटने के बीच गैप रखकर, पंजों को नीचे की ओर मोड़ें। दोनों हाथों को घुटनों पर रखें और आगे की तरफ झुकें। सांस लेते हुए कंधों को थोड़ा-सा ऊपर उठाएं। जीभ को बाहर निकालें, आंखों को चौड़ी करके ऊपर की तरफ देखें।  अब सिंह जैसी आवाज निकालें। ऐसा कम से कम 3-5 बार करें। अंत में गले की मालिश करें।

matsyasana for sweet voice मत्स्यासन करने से गला साफ रहता है। © Shutterstock.

मत्स्यासन

इसके अभ्यास के दौरान शरीर का आकार मछली जैसा बन जाता है, इसलिए इसे मत्स्यासन कहते हैं। इससे गला साफ होता है। खांसी की समस्या समाप्त होती है।

यूं करें मत्स्यासन

पद्मासन में बैठ जाएं। पीछे की ओर झुकें और लेट जाएं। अब दोनों हाथों को एक-दूसरे से बांधकर सिर के पीछे रखें। पीठ के हिस्से को ऊपर उठाकर गर्दन मोड़ते हुए सिर के ऊपरी हिस्से को जमीन पर टिकाएं। दोनों पैर के अंगूठे को हाथों से पकड़ें। कोहनियां जमीन से सटी रहें। इस स्थिति में 5 सेकेंड तक रुकें। इस दौरान सांसों की गति नियमित रखें। आवाज को मधुर बनाए रखना चाहते हैं, तो नियमित रूप से इन सभी योगासनों को जरूर करें।

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source