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वर्ल्ड डायबिटीज डे 2018 : डायबिटीज को देना है मात, तो रोज करें ये तीन आसन

डायबिटीज होने का मुख्य कारण है- व्यायाम न करना और न ही शरीर को अन्य रूप में सक्रिय रखना। यह रोग पूरे शरीर को शक्तिहीन बना देता है और समय रहते इलाज न हो तो किडनी, आंख सहित अन्य अंगों पर भी बुरा असर पड़ता है।

14 नवंबर को ''वर्ल्ड डायबिटीज डे'' मनाया जाता है। इस बार का थीम ''द फैमिली एंड डायबिटीज'' है। डायबिटीज की समस्या आज बड़ों के साथ-साथ बच्चों को भी देखने को मिल रही है।

योगाचार्य डॉ. रमेश पुरी कहते हैं कि हम सभी जानते हैं कि डायबिटीज एक खतरनाक रोग है। इससे ग्रसित व्यक्ति का स्वास्थ्य दिन-प्रतिदिन गिरता जाता है और इस बीमारी की चपेट में हर उस व्यक्ति के आने की आशंका रहती है, जो परिश्रम नहीं करते और आराम की जिंदगी जीते हैं। डायबिटीज होने का मुख्य कारण है- व्यायाम न करना और न ही शरीर को अन्य रूप में सक्रिय रखना। यह रोग पूरे शरीर को शक्तिहीन बना देता है और समय रहते इलाज न हो तो किडनी, आंख सहित अन्य अंगों पर भी बुरा असर पड़ता है। कुछ आसनों के जरिए इस रोग पर काबू पाया जा सकता है।

योग तन-मन को तो स्वस्थ रखता ही है, कई बीमारियों में भी रामबाण साबित होता है। यह डायबिटीज जैसी गंभीर मानी जाने वाली बीमारी से भी मुक्ति दिलाता है। मन और शरीर को प्रभावित करने वाले रोग, जैसे उच्च रक्तचाप, तनाव, लकवा और मधुमेह (डायबिटीज) काफी गंभीर माने जाते हैं लेकिन योग की सहायता से इन रोगों पर भी काबू पर पाया जा सकता है।

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मधुमेह मुद्रा

डायबिटीज से निजात दिलाने में मधुमेह मुद्रा कारगर है, जिसे दिन में दो-तीन बार खाली पेट ही की जानी चाहिए। वज्रासन में कुर्सी पर बैठ जाएं। दोनों हाथों के अंगूठों को मुट्ठी बनाकर बंद कर लें। दोनों मुट्ठियों की हड्डियों के पिछले हिस्से को मिलाकर पहले नाभि के ऊपरी हिस्से पर, फिर नीचे रखकर लम्बी गहरी सांस लें और फिर इसे छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें। तीसरे चरण में बाईं हथेली को नाभि पर रखें और दाएं हाथ को तिरछा करते हुए बाएं हाथ के ऊपर रखें। अंगूठे एक-दूसरे को क्रॉस करते हुए हों। तीनों चरणों में 10-10 बार सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें। आगे झुकते समय नितम्ब एडियों के साथ ही लगे रहें।

[caption id="attachment_622785" align="alignnone" width="655"]Salabhasana and diabetes शलभासन। © Shutterstock[/caption]

शलभासन

पेट के बल लेट जाएं। एड़ियां मिला लें। पंजे के बल लेटे हुए चेहरे को सामने कर ठोढ़ी को भूमि पर लगा दें। दोनों हाथों को मिलाकर इस प्रकार जंघाओं के नीचे रखें कि हथेली ऊपर की ओर रहे। अब पीछे से टांगों को सीधा रखते हुए श्वास भरते हुए नाभि से नीचे वाले और ऊपर वाले भाग को एक साथ उठाएं, कुछ समय रुकें, फिर धीरे-धीरे वापस आएं। यह आसन कम से कम 3 बार करें। यह आसन मधुमेह में लाभदायक है। इसके साथ-साथ मोटापा, कंधे, फेफड़ों और हृदय के लिए भी गुणकारी है। इसके अभ्यास से पेट संबंधित सभी रोग दूर हो जाते हैं।

उड्डीयान बंध

पद्मासन या सुखासन में बैठकर पूरी तरह से सांस बाहर निकालें। फिर भीतर सिकोड़कर ऊपर की ओर खींचें। नाभि तथा आंतें पीठ की तरफ दबाएं। इससे पेट के स्थान पर गड्ढा-सा दिखाई देगा। इसे कहते हैं उड्डीयान बंध। इसके नियमित अभ्यास से मधुमेह की समस्या से आप बचे रह सकते हैं। साथ ही कब्ज की समस्या से छुटकारा मिलता है और भूख भी लगती है। इससे छाती भी चौड़ी होती है। अल्सर, हर्निया, हार्ट के मरीज और हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों को शलभासन और उड्डीयान बंध नहीं करना चाहिए।

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