Don’t Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
- लेटेस्ट
- डिज़ीज़
- डाइट
- फिटनेस
- ब्यूटी
- घरेलू नुस्खे
- वीडियो
- पुरुष स्वास्थ्य
- मेंटल हेल्थ
- सेक्सुअल हेल्थ
- फोटो स्टोरी
- आयुष
- पेरेंटिंग
- न्यूज
योग में कई तरह के आसन हैं जो इंसान को स्वस्थ्य व फिट रखते हैं। कुछ आसनों के बारे में लोग जानते हैं लेकिन उनको करने की सही विधि नहीं जानते हैं। आपने मूलबंध और जालंधर बंध के बारे में भी सुना होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं इन्हें कैसे करना और इनसे क्या-क्या फायदे होते हैं ? मूलबंध, जालंधर बंध और उड्डीयान बंध को त्रिबंध के नाम से भी जाना जाता है। इसका उपयोग योग में कुंडलिनी जागरण के लिए किया जाता है। आइए जानते हैं इन तीनों बंध को कैसे करते हैं और इनके क्या फायदे होते हैं।
करने का तरीका
इस आसन को करने के लिए सबसे पहले गहरी सांस लेते हुए मूलबंध लगाएं, फिर जालंधर बंध. इसके बाद श्वास को सहजता से बाहर निकालें. यही प्रक्रिया सांस छोड़कर दोबारा करें यानी बहिर्कुंभक के साथ मूलबंध और जालंधर बंध. इससे मूलाधार से सहस्त्रार के बीच ऊर्जा का आवागमन सहज रहता है और कुंडलिनी जागरण से किसी नुकसान की आशंका नहीं रहती।
क्या रखें सावधानी
जब भी इस आसान को करें स्वच्छ और हवादार स्थान पर बैठकर ही करें. अगर आप पेट, फेंफड़े और गले के किसी भी गंभीर रोग से पीड़ित हो तो यह आसन बंध नहीं करें।
क्या मिलते हैं लाभ
इससे गले, गुदा, पेशाब, फेंफड़े और पेट संबंधी रोग दूर होते हैं और इसके अभ्यास से दमा, अति अमल्ता, अर्जीण, कब्ज, अपच आदि रोग भी नष्ट होते हैं. इससे चेहरे की चमक बढ़ती है. अल्सर कोलाईटिस रोग ठीक होता है और फेफड़े की दूषित वायु निकलने से हृदय की कार्यक्षमता भी बढ़ती है।
ये भी पढ़ेंः सर्दी के मौसम में बड़ी इलायची का क्यों करे सेवन।
ये भी पढ़ेंः रोजाना एक्सरसाइज में डायबिटीज के मरीज को ध्यान रखनी चाहिए ये 5 बातें।
ये भी पढ़ेंः सुबह उठने के 20 मिनट तक कुछ नहीं खाते हैं तो होते हैं ये 4 नुकसान।
ये भी पढ़ेंः हार्ट की एंजियोप्लास्टी में लगने वाले स्टंट के बारे 5 खास बातें।
ये भी पढ़ेंः कैल्शियम के लिए शाकाहारी लोग ठंड के मौसम जरूर खाएं ये 5 सुपरफूड।