वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे 2018 : रोज करेंगे ये तीन आसन तो हेपेटाइटिस में होगा लाभ

वक्रासन, मंडूकासन और पवनमुक्तासन हेपेटाइटिस के रोगियों के लिए विशेष लाभकारी है। इनसे लीवर की अच्छी मसाज हो जाती है।

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Written By: Anshumala | Published : July 27, 2018 6:20 PM IST

हेपेटाइटिस लीवर की बीमारी है, जिसका एक प्रमुख लक्षण है- पीलिया। हेपेटाइटिस में लीवर में सूजन हो जाती है और पाचन गड़बड़ा जाता है। छह महीने से अधिक समय तक उपचार न हो तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। योग में ऐसे कई उपाय हैं, जो हेपेटाइटिस के लक्षणों को समाप्त कर इसके दुष्प्रभावों या साइड एफेक्ट्स से निजात दिलाते हैं। आसनों में पवन मुक्तासन और सूर्य नमस्कार इसमें खास तौर से उपयोगी है।

ओशोधारा के योगाचार्य ओशो सिद्धार्थ औलिया का कहना है कि यों तो आसनों में अर्द्धमत्स्येन्द्रासन, मत्स्यासन, त्रिकोणासन, शशांकासन, नौकासन, उत्तानपादासन और सूर्य नमस्कार ये सभी इसमें फायदेमंद हैं, लेकिन वक्रासन, मंडूकासन और पवनमुक्तासन हेपेटाइटिस के रोगियों के लिए विशेष लाभकारी है। इनसे लीवर की अच्छी मसाज हो जाती है।

वक्रासन

पांवों को फैलाकर जमीन पर पास-पास रखें। रीढ़ सीधी और तनावरहित हो। बाएं पैर को मोड़कर दाएं घुटने के पास रखें। सांस छोड़ते हुए कमर को बाईं ओर मोड़ें। अब कोहनी से बाएं पैर के घुटने को दबाव के साथ अपनी ओर खीचें ताकि पेट पर दबाव पड़े। बाएं हाथ को कमर के पीछे जमीन पर सीधा रखें। अब गर्दन घुमाकर दाईं ओर मोड़कर जितना पीछे संभव हो, देखें। इस क्रम में दायां पैर, कमर और बायां हाथ बिल्कुल सीधा रखें। कुछ पल बाद लंबी सांस लेते हुए प्रारंभिक अवस्था में आएं। यह एक चक्र हुआ। यही क्रिया दूसरी ओर से दोहराएं। इसे 3 से 5 चक्र करें।

vakrasana in hepatitis

सावधानी

पूरी प्रक्रिया के दौरान सांस लेने और छोड़ने की गति धीमी रहे। खाली पेट ही करें। घुटने का दर्द होने पर इसे बिल्कुल भी न करें साथ ही गर्दन, कोहनी, पेट या कमर दर्द में करने से परहेज करें।

मंडूकासन

सबसे पहले वज्रासन में बैठ जाएं। दोनों हाथों की मुट्ठी बनाकर नाभि के पास रखें। अब सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें ताकि मुट्ठियों का दबाव नाभि-क्षेत्र पर पड़े। सामने की ओर देखें। 8-10 सेकेंड इस स्थिति में रुकने के बाद, सांस भरते हुए मूल स्थिति में लौट आएं।

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सावधानी

इस आसन को प्रेगनेंट महिलाओं को करने से बचना चाहिए।

पवनमुक्तासन

पीठ के बल लेटकर पैरों को जमीन के समानान्तर रखें। सांस छोड़कर बहिर्कुंभक लगाएं और दोनों हाथों के सहारे दाएं घुटने को पास लाकर उससे नासिकाग्र को सटाने का प्रयास करें। इस क्रम में जांघों से पेट दबेगा। इस स्थिति में कुछ पल रुकने के बाद, सांस भरते हुए वापस मूल स्थिति में आ जाएं। फिर यही क्रिया बाएं घुटने को पास लाकर दुहराएं। इस प्रकार 5 से 10 बार इस क्रिया को दुहराएं।

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सावधानी

उच्च रक्तचाप, साइटिका और स्लिप डिस्क के रोगी इसे करने से बचें।

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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