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Written By: Anshumala | Published : February 12, 2019 5:18 PM IST
मूर्छा प्राणायाम के लाभ । © Shutterstock.
यदि आप तनाव, चिंता और क्रोध आने से परेशान हैं, तो योगासन का सहारा ले सकते हैं। इसके लिए सबसे उपयोगी है मूर्छा प्राणायाम। इसके नियमित अभ्यास से मानसिक समस्याओं से छुटकारा मिलने के साथ-साथ धातु रोग और नपुंसकता जैसे रोग भी दूर होते हैं।
यूं करें मूर्छा प्राणायाम
इस प्राणायाम के लिए स्थिर और अचल आसन की आवश्यकता है। पद्मासन या सिद्धासन उत्तम है। सिर को थोड़ा पीछे झुकाकर आकाशी मुद्रा करते हुए पूरक करें। ध्यान रखें, पूरक दोनों नासिका- छिद्रों से दीर्घ परंतु धीरे हो। अंतरंग कुम्भक करें और शाम्भवी मुद्रा करते हुए स्थिर रहें। भुजाओं को एकदम सीधा रखें और घुटनों को हाथों से दबाएं। हाथों को मोड़ते हुए तथा सिर को सामने पूर्व स्थिति में लाते हुए रेचक करें और आंखों को बंद रखें। अब पूरे शरीर को कुछ सेकेंड के लिए शिथिल करें। इस अवस्था में आप शरीरिक एवं मानसिक रूप से शांति एवं हल्केपन का अनुभव करें। इसे बार-बार अभ्यास में लाएं।
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कितनी देर करें मूर्छा प्राणायाम
बिना तनाव के अधिकतम अवधि तक अभ्यास कर सकते हैं। ध्यान रखें, अभ्यास के साथ ही धीरे-धीरे अवधि में वृद्धि करने की कोशिश करें। बेहोशी की अनुभूति तक जितनी आवृत्तियां सम्भव हों करें। योग विशेषज्ञों की मानें तो इस प्राणायाम को आसन के उपरांत या निद्रा से पूर्व करना चाहिए। इससे शारीरिक एंव मानसिक लाभ मिलता है।
मूर्छा प्राणायाम के लाभ
- ध्यान की अच्छी तैयारी कराता है तथा मन को अंतर्मुखी बनाता है।
- यह प्राणायाम मनुष्य को आत्मिक स्तर तक पहुंचाने में मदद करता है।
- शारीरिक एवं मानसिक स्थिरता प्रदान करता है।
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- तनाव, चिंता तथा क्रोध को दूर करने के लिए यह उपयोगी प्राणायाम है।
- जो व्यक्ति रक्तचाप, विक्षेपों व मानसिक समस्याओं से ग्रस्त है, उसके लिए यह प्राणायाम लाभप्रद है।
- धातु रोग, प्रमेह और नपुंसकता आदि रोगों में यह असरदार है।
मूर्छा प्राणायाम की सावधानियां
जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है या जिन्हें चक्कर आते हों, उन्हें यह प्राणायाम नहीं करना चाहिए। मस्तिक–दाब से पीड़ित लोगों के लिए यह अभ्यास वर्जित है।