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कहते हैं- मन के हारे हार है, मन के जीते जीत। इच्छा-अनिच्छा सब हमारी मनोदशा का परिणाम है। हमारी मनोदशा कैसी होगी, यह केवल इस पर निर्भर नहीं है कि हमारे प्रयास किस दिशा में हैं, बल्कि इस पर भी निर्भर करता है कि हम मस्तिष्क को अपने अनुकूल रखने के लिए क्या प्रयास करते हैं? इसमें जल की भूमिका महत्वपूर्ण है।
क्या है इच्छाशक्ति
किसी श्रेष्ठ सोच-विचार और भाव को जीवन में साकार कर दिखाने की शक्ति को इच्छाशक्ति कहते हैं। सफलता की समस्त दिशाओं में फिर वह चाहे भौतिक हो या आध्यात्मिक, संकल्प शक्ति एक सबसे उत्तम, महत्त्वपूर्ण और उपयोगी औजार है। संकल्प शक्ति को दृढ़ बनाकर हम अपनी सोच के अनुसार चीजों को पा सकते हैं। यह सब किसी जादू का नहीं, बल्कि श्रेष्ठ और शक्तिशाली संकल्प शक्ति का ही कमाल होता है।
क्या कहता है शोध
केली मैकगोनिगल पीएचडी एंड लेखक ऑफ विलपावर इंस्टिंक्ट के अनुसार, इच्छाशक्ति एक प्रतिक्रिया है जो मस्तिष्क और शरीर दोनों से आती है। प्रीफ्रंटल कोर्टेक्स (माथे के पीछे मस्तिष्क का खंड) वह हिस्सा है जो निर्णय लेने और हमारे व्यवहार को विनियमित करने जैसी चीजों में मदद करता है। आत्मसंयम या इच्छाशक्ति, इस शीर्षक के अंतर्गत आते हैं और इस प्रकार मस्तिष्क के इस हिस्से का ध्यान रखा जाना चाहिए।
सोहम मुद्रा से बढ़ाएं इच्छाशक्ति
मुद्रा-चिकित्सा विशेषज्ञ कुमार राधारमण कुमार कहते हैं कि हमारे शरीर और रक्त का 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा जल है। जल की इस मात्रा में थोड़ी-सी भी कमी हमारे मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को धीमा करती है और यही हमारे अवसाद, उदासी, निष्क्रियता, नकारात्मक विचारों आदि का कारण बनता है, क्योंकि जल-तत्व का संबंध हमारे स्वाधिष्ठान चक्र से है जो हमारी सृजनात्मक शक्तियों को नियंत्रित करता है। सोहम मुद्रा हमारी मानसिक और इच्छाशक्ति को बढ़ाती है और नई ऊर्जा, आत्मविश्वास, उत्साह पैदा करती है। इससे जल-तत्व की पूर्ति होती है और मस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उदासी और डिप्रेशन को दूर करने में यह काफी कारगर है। अगर इस मुद्रा के साथ सांस भरते हुए ऊँ की लम्बी ध्वनि की जाए तो नाभि से मस्तिष्क तक कंपन होता है और मस्तिष्क की कोशिकाएं जागृत होती हैं।
कैसे करें सोहम मुद्रा
दोनों हाथों को जांघों पर रखकर अंगूठे के शीर्ष को कनिष्ठा की जड़ में लगाएं। धीरे-धीरे सांस भरें और इसी मुद्रा में मुट्ठी बना लें। ऊँ की लम्बी ध्वनि सात बार करें और उसे दाएं कान से सुनें। धीरे-धीरे सांस बाहर करते हुए पेट की मांसपेशियों को संकुचित करें और उड्डियान बंध लगाएं। अब अपने हाथ खोलकर अपने हाथ-पैरों को तानें और कल्पना करें कि आप अवसादमुक्त हो रहे हैं।
कितनी बार
प्रतिदिन सोहम मुद्रा का अभ्साय न्यूनतम 7 और अधिकतम 49 बार करें।
ध्यान से भी बढ़ती है इच्छाशक्ति
एक शोध में कहा गया है कि ध्यान यानी मेडिटेशन से भी इच्छाशक्ति बढ़ती है। साथ ही ध्यान तनाव प्रबंधन और आत्म जागरूकता में सुधार करने में भी मदद करती है। इसके लिए आपको जीवन भर ध्यान का अभ्यास करने की जरूरत नहीं है। छह से आठ सप्ताह लगातार मेडिटेशन करने से भी मस्तिष्क में परिवर्तन देखा जा सकता है।
चित्रस्रोत: Shutterstock.