
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : May 15, 2022 8:06 PM IST
अनन्तासन को टांगों व कूल्हों के जोड़ों में लचीलता बढ़ाने वाले एक प्रभावी योगासन के रूप में जाना जाता है। अनन्तासन शब्द संस्कृत के दो अलग-अलग शब्दों “अनंत” और “आसन” से मिलकर बना है। वहीं अंग्रेजी में इसे “स्लीपिंग विश्नू पोज” (Sleeping vishnu pose) के नाम से जाना जाता है, जिसका नाम भगवान विष्णु पर पड़ा है।
यदि अनन्तासन का अभ्यास सही तकनीक के साथ और विशेष सावधानियां बरतते हुए किया जाए तो इससे निम्न स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं -
अनन्तासन अभ्यास करने से कूल्हों की मांसपेशियों में पर्याप्त रूप से खिंचाव आता है जिससे जोड़ों में लचीलता बढ़ती है और अकड़न जैसी समस्याएं नहीं हो पाती हैं।
सही तकनीक के साथ अनन्तासन अभ्यास करना हैम्स्ट्रिंग समेत अन्य जांघ की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है जिससे शारीरिक संतुलन में भी सुधार होता है।
नियमित रूप से और सही तकनीक के साथ अनन्तासन अभ्यास करने से रीढ़ की हड्डी के आसपास की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और उसे सहारा प्रदान करती हैं
सुखासन की तरह अनन्तासन भी शरीर को आराम प्रदान करता है, जिससे थकावट व मांसपेशियों में दर्द जैसी समस्याएं नहीं होती हैं।
हालांकि, अनन्तासन से प्राप्त होने वाले स्वास्थ्य लाभ प्रमुख रूप से योगासन करने के तरीके और अभ्यासकर्ता की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करते हैं।
यदि आप पहली बार अनन्तासन अभ्यास करने जा रहे हैं, तो निम्न चरणों से आपको यह योग मुद्रा बनाने में मदद मिल सकती है -
इस योगासन की अवधि अपनी क्षमता के अनुसार रखें और फिर धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में आ जाएं। यदि आपको इस योग मुद्रा से संबंधित कोई भी सवाल है, तो किसी अनुभवी योग प्रशिक्षक से बात करें।
अनन्तासन अभ्यास करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना जरूरी है -
कुछ शारीरिक समस्याओं व स्थितियों की मौजूदगी में अनन्तासन अभ्यास करने से पहले डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए -