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वशिष्ठासन एक प्राचीन योग मुद्रा है, जो पूरी तरह से एक हाथ के संतुलन पर निर्भर करती है। इस योग मुद्रा में एक हाथ की हथेली और पैर के तलवे के एक हिस्से पर शरीर का वजन डालकर संतुलन बनाया जाता है। वशिष्ठासन न सिर्फ शरीर की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है, इसके साथ-साथ इससे मानसिक स्वास्थ्य में भी काफी सुधार होते हैं। इस योग मुद्रा का नाम प्राचीन काल के महान गुरु वशिष्ठ के नाम पर पड़ा है और अंग्रेजी में इसे “साइड प्लैंक पॉज” के नाम से जाना जाता है।
यदि वशिष्ठासन योग मुद्रा को सही तकनीक के साथ और विशेष बातों का ध्यान रखते हुए किया जाए तो इससे कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं -
वशिष्ठासन के दौरान आधे शरीर का वजन एक हाथ पर पड़ता है, जिससे कलाई और बाइसेप्स की मांसपेशियां मजबूत होने लगती हैं।
वशिष्ठासन के दौरान पेट की मांसपेशियों में खिंचाव पड़ता है, जिससे वे मजबूत होने लगती हैं। पेट की चर्बी को कम करने के लिए लिए भी वशिष्ठासन काफी लाभदायक हो सकता है।
वशिष्ठासन अभ्यासकर्ताओं को एक हाथ और पैर पर शरीर का संतुलन बनाना सिखाता है। नियमित रूप से और सही तकनीक के साथ यह योगाभ्यास करने से शारीरिक संतुलन को भी काफी बेहतर किया जा सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करने के लिए भी वशिष्ठासन काफी लाभदायक योग मुद्रा है। इसकी मदद से बार-बार चिंता और तनाव होने जैसे लक्षणों को दूर किया जा सकता है
हालांकि, वशिष्ठासन से प्राप्त होने वाले स्वास्थ्य लाभ पूरी तरह से योगासन के तरीके और आपकी स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करते हैं।
यदि आप पहली बार वशिष्ठासन अभ्यास करने जा रहे हैं, तो निम्न चरणों का पालन करके आपको यह योग मुद्रा बनाने में मदद मिल सकती है -
इस योग क्रिया को आप अपनी क्षमता के अनुसार अवधि तक कर सकते हैं और फिर धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में आ सकते हैं। यदि आपको इससे संबंधित कोई भी सवाल है, तो किसी अच्छे योग प्रशिक्षक से संपर्क करें।
वशिष्ठासन अभ्यास आमतौर पर योग प्रशिक्षक के निगरानी में ही किया जाता है और इस दौरान निम्न सावधानियां बरतनी जरूरी होती हैं -
कुछ स्वास्थ्य स्थितियां हैं जिनके दौरान वशिष्ठासन अभ्यास करने से पहले डॉक्टर से अनुमति ले लेनी चाहिए -