सिद्धासन योग से होता तेज दिमाग और दूर होती हैं कई बीमारी, जानें विधि

चाहे कोई भी योगासन हो उसे सही तरीके से करना चाहिए, क्योंकि जब हम उसे सही तरीके से करेगें तो उसका नतीजा भी सही होगा।

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Written By: akhilesh dwivedi | Published : September 16, 2018 11:58 PM IST

योगासन से कई तरह की बीमारियां तो ठीक होती ही हैं लेकिन कुछ योग ऐसे हैं जो इंसान के दिमाग पर भी असर डालते हैं। सिद्धासन योग से इंसान के दिमाग पर उत्तम असर होता है। इसके करने से शरीर के सभी तंत्र संचालित हो जाते हैं। अगर योग के इतिहास पर ध्यान दें तो इस योग का उपयोग सिद्ध पुरुषों के द्वारा किया जाता था इसलिए  इसका नाम सिद्धासन कहा जाता है। सिद्ध पुरुष से मतलब है जो सभी तरह की बैद्धिकता को प्राप्त कर लेता हो। सिद्धासन के नियमित अभ्यास से शरीर में ताजगी का संचार होता है। सिद्धासन करने शरीर के सभी विकार दूर होते हैं।

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सिद्धासन योग करने की विधि

चाहे कोई भी योगासन हो उसे सही तरीके से करना चाहिए, क्योंकि जब हम उसे सही तरीके से करेगें तो उसका नतीजा भी सही होगा। यदि हम किसी भी आसन को करने के लिए गलत तरीका अपनाते हैं, तो हमें फायदा तो नहीं होता बल्कि हमारे शरीर को नुकसान का सामना करना पड़ता है।

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  • जब भी हम इस आसन को करते हैं तो सबसे पहले आसन पर बैठ कर अपने पैरों को खोल दें।
  • अब बाएं पैर की एड़ी को गुप्त अंग के मध्य भाग में रखें।
  • अब दाएं पैर को उठायें और गुप्त अंग के मध्य भाग पर स्थिर करें।
  • इस बात पर ध्यान दें कि आप के दोनों पैरों के पंजे, जांघ और पिंडली के मध्य रहें।
  • हथेली ऊपर की ओर रहे। अपने दोनों हाथ एक दूसरे के ऊपर गोद में रखें अर्थात् आप के दोनों हाथों को दोनों घुटनों के ऊपर ज्ञान मुद्रा में रखें।
  • अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें तथा अपनी आखों को बंद कर दें और इसी स्थिति में बनें रहें।
  • श्वासोच्छ्वास आराम से स्वाभाविक रूप से चलने दें।
  • इस आसन का अभ्यास पांच मिनट तक करते रहें।

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सिद्धासन योग के लाभ

  1. सिद्धासन के नियमित अभ्यास से शरीर की समस्त नाड़ियों का शुद्धिकरण होता है।
  2. इस आसन से मन को एकाग्र करना आसान होता है।
  3. विद्यार्थियों के लिए यह आसन विशेष लाभकारी होता है, क्योंकि इसे करने से दिमाग तेज होता है।
  4. जठराग्नि तेज होता है।
  5. इसको करने से हमारा दिमाग स्थिर रहता है, एकाग्रता तेज होती है, जिससे स्मरण शक्ति बढ़ती है।
  6. ध्यान करने के लिए यह एक उपयुक्त आसन होता है और पाचन क्रिया नियमित होती है।
  7. यह आसन श्वास के रोग, ह्रदय रोग, अजीर्ण, दमा, आदि अनेक रोगों में लाभकारी होता है।
  8. कुण्डलिनी शक्ति को जागृत करने के लिए इस आसन को बहुत उपयुक्त माना जाता है।

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