
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : May 15, 2022 8:16 PM IST
रीढ़ की हड्डी को प्रभावी रूप से लचीला बनाने वाले योगासनों में वृश्चिकासन को भी गिना जाता है। वृश्चिकासन एक जटिल योगासन है, जिसकी योग मुद्रा बनाने के शरीर का संतुलन होना जरूरी है। इस योगासन में शारीरिक मुद्रा एक बिच्छू (वृश्चिक) जैसी प्रतीत होती है और उसी के आधार पर उसका नाम वृश्चिकासन रखा गया। अंग्रेजी में इसे “स्कोर्पियन पोज” (Scorpion pose) के नाम से जाना जाता है।
यदि वृश्चिकासन का अभ्यास सही तकनीक के साथ और विशेष ध्यान रखते हुए किया जाए तो इससे कई स्वास्थ्य लाभ हो सकते हैं -
रीढ़ की हड्डी के लिए वृश्चिकासन को काफी प्रभावी योगासन माना गया है। इस योगासन का अभ्यास करने से पीठ में दर्द, अकड़न व अन्य समस्याएं दूर होने लगती हैं।
इस योगासन के दौरान शरीर का सारा वजन बाहों और कंधों पर पड़ता है, जिसके परिणामस्वरूप इन अंगों की मांसपेशियां मजबूत होने लगती हैं।
यदि आप नियमित रूप से और सही तकनीक के साथ वृश्चिकासन अभ्यास कर रहे हैं, तो इससे आपके शरीर में सहनशीलता और धैर्य का विकास होता है।
वृश्चिकासन काफी हद तक आपके शारीरिक संतुलन पर आधारित होता है। जब आप इस योगासन को सही तरीके से करने लग जाते हैं तो इसका मतलब आपके शारीरिक संतुलन में भी काफी सुधार हो गया है।
हालांकि, वृश्चिकासन से प्राप्त होने वाले लाभ प्रमुख रूप से योगासन अभ्यास के तरीके और अभ्यासकर्ता की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करते हैं।
यदि आप पहली बार वृश्चिकासन अभ्यास करने जा रहे हैं, तो निम्न कुछ स्टेप्स बताए गए हैं जिन्हें अपनाकर आपको यह योग मुद्रा बनाने में मदद मिल सकती है -
यह योग मुद्रा बनाने की अवधि आप अपनी क्षमता के अनुसार रख सकते हैं और फिर धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में आ सकते हैं। यदि आपको इस योगासन से संबंधित कोई सवाल है, तो आपको किसी अच्छे योग प्रशिक्षक से संपर्क करने की सलाह दी जाती है।
वृश्चिकासन एक जटिल योगासन है, जिसके दौरान निम्न बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है -
यदि आपको स्वास्थ्य संबंधी निम्न समस्याएं है, तो वृश्चिकासन अभ्यास करने से पहले डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए -