Parivrtta Parsvakonasana Aka Revolved Side Angle Pose Benefits- परिवृत्त पार्श्वकोणासन के फायदे, तरीका, लाभ और नुकसान

परिवृत्त पार्श्वकोणासन (Revolved Side Angle Pose) के फायदे व नुकसान- परिवृत्त पार्श्वकोणासन एक खास योग मुद्रा है, जिसकी मदद से शरीर की मांसपेशियां लचीली होने लगती हैं और साथ ही इसके नियमित अभ्यास से कई रोगों से बचाव किया जा सकता है।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : May 15, 2022 4:12 PM IST

परिवृत्त पार्श्वकोणासन एक खास योग मुद्रा है, जो न सिर्फ आपको शारीरिक लाभ देता है साथ ही यह योग मुद्रा अपनाने से मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार होता है। परिवृत्त पार्श्वकोणासन एक संस्कृत शब्द है, जिसमें परिवृत्त का मतलब घूमना या मुड़ना और पार्श्व का मतलब शरीर के एक तरफ (बगल) से है। अंग्रेजी में इसे रिवॉल्व्ड साइड एंगल पोज़ (Revolved Side Angle Pose) के नाम से जाना जाता है। परिवृत्त पार्श्वकोणासन का अभ्यास नियमित रूप से करने से शरीर में लचीलापन आता है और साथ ही शारीरिक संतुलन में सुधार होने लगता है। वैसे तो यह एक प्राचीन योग मुद्रा है, हालांकि समय के साथ-साथ और आवश्यकताओं के अनुसार इसकी मुद्रा में कुछ बदलाव भी किए जा चुके हैं।

परिवृत्त पार्श्वकोणासन के लाभ (Benefits of Revolved Side Angle Pose)

यदि परिवृत्त पार्श्वकोणासन को सही तकनीक के साथ और विशेष बातों का ध्यान रखते हुए किया जाए तो इससे कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं -

1. पाचन क्रिया को तेज करता है परिवृत्त पार्श्वकोणासन

पेट के अंगों को उत्तेजित करता है, जिसे पाचन क्रिया तेज होती है और कब्ज जैसी समस्याएं होने का खतरा कम हो जाता है।

2. परिवृत्त पार्श्वकोणासन लाए रीढ़ की हड्डी में लचीलापन

रीढ़ की हड्डी में लचीलापन लाता है, जिससे पीठ दर्द नहीं होता और साइटिका जैसे रोग होने के खतरे को कम किया जा सकता है।

3. परिवृत्त पार्श्वकोणासन करता है शारीरिक संतुलन में सुधार

परिवृत्त पार्श्वकोणासन को कुशलतापूर्वक करने से शारीरिक संतुलन में सुधार होता है और साथ ही शरीर का सही पोस्चर बनाए रखने में भी मदद मिलती है।

4. मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाता है परिवृत्त पार्श्वकोणासन

मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करता है, जिससे चिंता, डिप्रेशन व तनाव जैसे मानसिक विकार कम होने लगते हैं और साथ ही व्यक्ति का मूड दिनभर अच्छा रहता है।

हालांकि, परिवृत्त पार्श्वकोणासन से प्राप्त होने वाले स्वास्थ्य लाभ प्रमुख रूप से योगासन के तरीके और अभ्यासकर्ता की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करते हैं।

परिवृत्त पार्श्वकोणासन का तरीका (Steps to do Revolved Side Angle Pose)

यदि आप पहली बार परिवृत्त पार्श्वकोणासन अभ्यास करने जा रहे हैं, तो निम्न चरणों की मदद से आप यह योग मुद्रा बना सकते हैं -

  • Step 1 - सबसे पहले सपाट जमीन पर मैट बिछा लें और उस पर ताड़ासन मुद्रा में खड़े हो जाएं
  • Step 2 - गहरी सांस लेते हुए दोनों पैरों को फैलाएं और दोनों के बीच में लगभग 4 फीट की दूरी बना लें
  • Step 3 - दाएं पैर को 90 और बाएं को 60 डिग्री के एंगल पर घुमाएं
  • Step 4 - अब दाएं यानी अगले पैर के घुटने को 90 डिग्री के कोण पर मोड़ें और जांघ को जमीन के समांतर ले आएं
  • Step 5 - अब दोनों हाथों को जोड़ लें और रीढ़ की हड्डी व गर्दन को सीधा रखते हुए धड़ को दाईं तरफ मोड़ें
  • Step 6 - जितना हो सके अपने बगल को दाएं पैर की जांघ व घुटने के करीब रखने की कोशिश करें
  • Step 7 - इसी दौरान बाएं पैर के घुटने को मोड़ते हुए जमीन के करीब ले जाएं

अब इस योग मुद्रा की अवधि अपनी क्षमता के अनुसार रखें और फिर धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में आ जाएं। यदि आपको परिवृत्त पार्श्वकोणासन से संबंधित कोई भी सवाल है, तो किसी अनुभवी योग प्रशिक्षक से संपर्क करें।

परिवृत्त पार्श्वकोणासन के दौरान सावधानियां (Precautions during Revolved Side Angle Pose)

परिवृत्त पार्श्वकोणासन योग मुद्रा के दौरान कुछ बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना जरूरी है -

  • योगाभ्यास शुरू करने से पहले स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज और वार्म अप कर लें
  • गर्दन पर अधिक जोर न डालें और जितना हो सके रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें
  • कोई क्रिया बलपूर्वक न करें और न ही कोई झटका लगने दें
  • इस दौरान कोई भी दर्द या तनाव महसूस होने पर मुद्रा को वहीं रोक दें

परिवृत्त पार्श्वकोणासन कब न करें (When to to do Revolved Side Angle Pose)

कुछ स्वास्थ्य स्थितियां हैं जिनके दौरान परिवृत्त पार्श्वकोणासन अभ्यास करने से पहले डॉक्टर से अनुमति ले लेनी चाहिए -

  • शरीर के किसी हिस्से में दर्द या गंभीर चोट लगी होना
  • रक्तचाप कम या ज्यादा होना
  • सांस या हृदय संबंधी रोग
  • शारीरिक संतुलन बनाने में दिक्कत (जैसे कि वृद्धावस्था या विकलांगता)
  • मासिक धर्म या गर्भावस्था
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