
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : May 15, 2022 4:12 PM IST
परिवृत्त पार्श्वकोणासन एक खास योग मुद्रा है, जो न सिर्फ आपको शारीरिक लाभ देता है साथ ही यह योग मुद्रा अपनाने से मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार होता है। परिवृत्त पार्श्वकोणासन एक संस्कृत शब्द है, जिसमें परिवृत्त का मतलब घूमना या मुड़ना और पार्श्व का मतलब शरीर के एक तरफ (बगल) से है। अंग्रेजी में इसे रिवॉल्व्ड साइड एंगल पोज़ (Revolved Side Angle Pose) के नाम से जाना जाता है। परिवृत्त पार्श्वकोणासन का अभ्यास नियमित रूप से करने से शरीर में लचीलापन आता है और साथ ही शारीरिक संतुलन में सुधार होने लगता है। वैसे तो यह एक प्राचीन योग मुद्रा है, हालांकि समय के साथ-साथ और आवश्यकताओं के अनुसार इसकी मुद्रा में कुछ बदलाव भी किए जा चुके हैं।
यदि परिवृत्त पार्श्वकोणासन को सही तकनीक के साथ और विशेष बातों का ध्यान रखते हुए किया जाए तो इससे कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं -
पेट के अंगों को उत्तेजित करता है, जिसे पाचन क्रिया तेज होती है और कब्ज जैसी समस्याएं होने का खतरा कम हो जाता है।
रीढ़ की हड्डी में लचीलापन लाता है, जिससे पीठ दर्द नहीं होता और साइटिका जैसे रोग होने के खतरे को कम किया जा सकता है।
परिवृत्त पार्श्वकोणासन को कुशलतापूर्वक करने से शारीरिक संतुलन में सुधार होता है और साथ ही शरीर का सही पोस्चर बनाए रखने में भी मदद मिलती है।
मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करता है, जिससे चिंता, डिप्रेशन व तनाव जैसे मानसिक विकार कम होने लगते हैं और साथ ही व्यक्ति का मूड दिनभर अच्छा रहता है।
हालांकि, परिवृत्त पार्श्वकोणासन से प्राप्त होने वाले स्वास्थ्य लाभ प्रमुख रूप से योगासन के तरीके और अभ्यासकर्ता की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करते हैं।
यदि आप पहली बार परिवृत्त पार्श्वकोणासन अभ्यास करने जा रहे हैं, तो निम्न चरणों की मदद से आप यह योग मुद्रा बना सकते हैं -
अब इस योग मुद्रा की अवधि अपनी क्षमता के अनुसार रखें और फिर धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में आ जाएं। यदि आपको परिवृत्त पार्श्वकोणासन से संबंधित कोई भी सवाल है, तो किसी अनुभवी योग प्रशिक्षक से संपर्क करें।
परिवृत्त पार्श्वकोणासन योग मुद्रा के दौरान कुछ बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना जरूरी है -
कुछ स्वास्थ्य स्थितियां हैं जिनके दौरान परिवृत्त पार्श्वकोणासन अभ्यास करने से पहले डॉक्टर से अनुमति ले लेनी चाहिए -