ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम करे ये 3 आसन, नियमित रूप से करने से ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों को होगा लाभ

अंजनेयासन ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम करने के साथ ही मानसिक एकाग्रता को बढ़ाता है। इससे शरीर का संतुलन सुधरता है। यह पाचन के अंगो में भी सुधार लाता है।

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Written By: Anshumala | Published : April 1, 2019 2:46 PM IST

योग करने से कई रोगों को दूर रखा जा सकता है। योग से शरीर के सभी मर्ज हील हो जाते हैं। योग इतना शक्तिशाली होता है कि इससे कैंसर से भी बचा जा सकता है। योगासन से कैंसर जैसी बीमारियों को आप दूर कर सकते हैं। खासकर, ब्रेस्ट कैंसर में यह काफी फायदेमंद होता है।

दरअसल, दूसरे कैंसर की तुलना में स्तन कैंसर के लक्षणों की पहचान फर्स्ट स्टेज में हो जाती है। इस स्थिति में समय रहते ही योग का अभ्यास करना शुरू कर देने से इसे बढ़ने से रोका जा सकता है। नियमित योग से आप ब्रेस्ट कैंसर होने की संभावनाओं को काफी हद तक कम कर सकते हैं। जानें, उन आसनों के बारे में जो ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम करने में सहायक हैं-

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ब्रेस्ट कैंसर में योग

योग की मदद से स्तन कैंसर के रोगियों को बेहतर महसूस होता है। यह ट्रीटमेंट के दौरान होने वाली थकान, मतली, स्थिरता और कमजोरियों जैसे दुष्प्रभावों को भी दूर करता है। योग से स्तन कैंसर के रोगियों की ताकत और गतिशीलता में सुधार होता है। इस खतरनाक बीमारी से मन में उठने वाली चिंता और तनाव कम होता है।

विरासना

विरसाना एक ऐसी मुद्रा है जो शरीर के अंदर की अशांति को दूर करती है। यह हठ योग आसन का शुरुआती स्तर है। सुबह के समय विरासना का अभ्यास 30 से 60 सेकंड तक करें।

फायदे: विरासना घुटनों और जांघों की स्ट्रेचिंग करते हैं। थके हुए पैरों को ऊर्जा देते हैं। यह पोज पोस्चर को सुधारता है तथा उच्च रक्तचाप कम करने में भी मदद करता है।

yogasana for breast cancer -anjaneyasana अंजनेयासन। © Shutterstock

अंजनेयासन

इसे क्रिसेंट पोज भी कहते हैं। इसका नाम भगवान हनुमान के नाम पर रखा गया है। यह विन्यास योग का शुरुआती आसन है। रोज सुबह या शाम, खाली पेट इसका अभ्यास करीब 15 से 30 सेकंड तक करें।

फायदे: अंजनेयासन मानसिक एकाग्रता को बढ़ाता है। इससे शरीर का संतुलन सुधरता है। मुख्य कार्य पाचन के अंगो में सुधार लाना भी है।

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सेतुबंधासन

इसे ब्रिज पोज भी कहते हैं, क्योंकि यह एक ब्रिज की संरचना की तरह दिखता है। इस आसन को रोज सुबह के समय 30 से 60 सेकंड तक ही करें।

फायदे: सेतुबंधासन छाती को बढ़ाता है और नितम्बों को मजबूत करता है। यह मुद्रा तनाव और हल्के अवसाद को कम करता है। यह उच्च रक्तचाप और अनिद्रा के लिए भी फायदेमंद है।

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