
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : May 10, 2022 5:39 PM IST
लोलासन एक प्राचीन योग मुद्रा है, जिसका अभ्यास आज दुनियाभर में किया जाता है। यह एक मध्यम श्रेणी की योग मुद्रा है, जिसे करने के लिए बल व संतुलन दोनों की आवश्यकता होती है। इस योग मुद्रा में शरीर का सारा वजन दोनों हाथों पर डाला जाता है और इस दौरान शरीर का संतुलन एकदम सटीक रखना पड़ता है। लोलासन को अंग्रेजी में “पेंडेंट पॉज” (Pendant pose) के नाम से जाना जाता है। यदि इस योग मुद्रा को सही तकनीक के साथ किया जाए तो इससे कंधे, पेट व शरीर की अन्य कई मांसपेशियों को मजबूत बनाया जा सकता है।
यदि लोलासन योग मुद्रा को सही तकनीक के साथ और विशेष बातों का ध्यान रखते हुए किया जाए तो इससे कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं -
इसमें कंधे, बांह, सीने और पेट की मांसपेशियों में आवश्यक खिंचाव आने लगता है और मांसपेशियां मजबूत बनने लगती हैं।
नियमित रूप से लोलासन अभ्यास करने से शरीर की मूल मांसपेशियां मजबूत होती हैं और शरीर का संतुलन अच्छा होता है।
इस योग मुद्रा के दौरान पेट के अंदरूनी अंगों में खिंचाव होने लगता है, जिससे पाचन क्रिया तेज हो जाती है।
लोलासन से शारीरिक ही नहीं मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार होता है। नियमित रूप से लोलासन अभ्यास करने से चिंता, तनाव व डिप्रेशन जैसे लक्षण होने लगते हैं और मूड अच्छा रहता है।
हालांकि, लोलासन से प्राप्त होने वाले स्वास्थ्य लाभ प्रमुख रूप से योगासन के तरीके और अभ्यासकर्ता की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करते हैं।
यदि आप पहली बार लोलासन अभ्यास करने जा रहे हैं, तो निम्न चरणों का पालन करके आपको यह योग मुद्रा बनाने में मदद मिल सकती है -
इस योग क्रिया को अपनी क्षमता के अनुसार अवधि तक करें और फिर धीरे-धीरे सामान्य मुद्रा में आ जाएं। यदि आपको लोलासन से संबंधित कोई भी सवाल है, तो किसी अनुभवी योग प्रशिक्षक से संपर्क करें।
लोलासन अभ्यास आमतौर पर योग प्रशिक्षक के निगरानी में ही किया जाता है और इस दौरान निम्न सावधानियां बरतनी जरूरी होती हैं -
कुछ स्वास्थ्य स्थितियां हैं जिनके दौरान लोलासन अभ्यास करने से पहले डॉक्टर से अनुमति ले लेनी चाहिए -