
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : May 5, 2022 8:13 PM IST
अन्य योगासनों की तरह पर्श्वोत्तनासन का जन्म भी प्राचीन भारत में हुआ और आज दुनियाभर में इसका अभ्यास किया जाता है। पर्श्वोत्तनासन प्रमुख रूप से रीढ़ की हड्डी में लचीलापन लाता है और साथ ही कूल्हों के जोड़ों की जकड़न को दूर करता है। यह एक मध्यम श्रेणी की योग मुद्रा है और योग प्रशिक्षक की मदद से इसे शुरुआती अभ्यासकर्ता भी कर सकते हैं। पर्श्वोत्तनासन में शरीर की आकृति एक पिरामिड की तरह बन जाती है और इसलिए अंग्रेजी में इसे “पिरामिड पॉज” के नाम से जाना जाता है।
यदि पर्श्वोत्तनासन योग मुद्रा को सही तकनीक के साथ और विशेष बातों का ध्यान रखते हुए किया जाए तो इससे कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं -
पर्श्वोत्तनासन को सही तकनीक के साथ करने से इससे पीठ की जकड़न कम होने लगती है और पीठ में दर्द से छुटकारा मिल जाता है।
पर्श्वोत्तनासन के योगाभ्यास के दौरान रीढ़ की हड्डी में काफी महत्वपूर्ण मोड़ आते हैं, जिससे लचीलापन बढ़ता है।
पर्श्वोत्तनासन से हैम्स्ट्रिंग समेत जांघों में मौजूद अन्य मांसपेशियों की एक्सरसाइज होने लगती है और समय के साथ-साथ वे मजबूत बन जाती हैं।
नियमित रूप से पर्श्वोत्तनासन अभ्यास करने से मानसिक रूप से शांति मिलती है और डिप्रेशन, तनाव व चिंता जैसे लक्षणों से छुटकारा मिलता है।
हालांकि, पर्श्वोत्तनासन से प्राप्त होने वाले स्वास्थ्य लाभ प्रमुख रूप से योगासन के तरीके और अभ्यासकर्ता की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करते हैं।
यदि आप पहली बार पर्श्वोत्तनासन अभ्यास करने जा रहे हैं, तो निम्न चरणों का पालन करके आपको यह योग मुद्रा बनाने में मदद मिल सकती है -
इस योग मुद्रा को अपनी क्षमता के अनुसार अवधि तक रखें और फिर धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में आ जाएं। यदि आपको पर्श्वोत्तनासन मुद्रा से संबंधित कोई भी सवाल है, तो किसी अच्छे योग प्रशिक्षक से संपर्क करें।
पर्श्वोत्तनासन अभ्यास आमतौर पर योग प्रशिक्षक के निगरानी में ही किया जाता है और इस दौरान निम्न सावधानियां बरतनी जरूरी होती हैं -
कुछ स्वास्थ्य स्थितियां हैं जिनके दौरान पर्श्वोत्तनासन अभ्यास करने से पहले डॉक्टर से अनुमति ले लेनी चाहिए -