नेशनल सेफ मदरहुड डे 2019 : प्रेगनेंसी में करें उष्ट्रासन, डिलीवरी के दौरान नहीं आएगी कोई समस्या

उष्ट्रासन का अभ्यास प्रेगनेंट महिलाओं को जरूर करना चाहिए। इसके अभ्यास से रीढ़ की हड्डियां मजबूत होती हैं। पेट और कमर को यह लचीला बनाता है।

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Written By: Anshumala | Published : April 11, 2019 5:10 PM IST

प्रेगनेंसी के दिनों में हर कदम फूंक-फूंक कर रखना होता है। आपकी जरा सी लापरवाही आपके साथ-साथ आपके गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। प्रेगनेंसी में शारीरिक और मानसिक रूप से फिट रहना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही खानपान और एक्टिव रहना भी जरूरी है। इससे डिलीवरी के दौरान आप बहुत हद तक लेबर पेन और किसी भी समस्या से बची रहेंगी।

अक्सर महिलाएं प्रेगनेंसी के दिनों में कई बातों को लेकर तनाव में रहने लगती हैं। आपको हमेशा एक बाद याद रखनी चाहिए कि इन दिनों तनावपूर्ण रहना, आपको मानसिक रूप से परेशान कर सकता है। इन दिनों मन की शांति बनाए रखना जरूरी होता है। तन और मन शांत रहेगा, तो यह स्‍ट्रेसफुल प्रॉसेस भी बिल्‍कुल आसान हो जाएगा। इससे बचने के लिए योग ही एकमात्र जरिया है। प्रेगनेंसी में कई ऐसे आसन हैं, जिनके अभ्यास से आप हेल्दी और फिट रह सकती हैं। हालांकि, कोई भी आसन करने से पहले डॉक्‍टर की सलाह जरूर ले लें। आमतौर पर किसी भी योगाभ्यास की शुरुआत चौथे महीने से लेकर नौवें महीने तक ही करनी चाहिए। जानें, प्रेगनेंसी के दिनों में कौन सा योग करना आपके लिए फायदेमंद रहेगा।

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उष्ट्रासन के लाभ

इस आसन को प्रेगनेंट महिलाओं को जरूर करना चाहिए। इसके अभ्यास से रीढ़ की हड्डियां मजबूत होती हैं। पेट और कमर को लचीला बनाता है। पैनक्रियाज की सक्रियता बढ़ाकर शुगर लेवल को नियंत्रित रखता है। जिन महिलाओं को डायबिटीज की समस्या है, उन्हें इसका अभ्यास जरूर करना चाहिए। फेफड़ों और आंखों के लिए भी फायदेमंद है। इसे करने से शरीर में खून का प्रवाह आपके सिर में होता है, जिससे एनर्जी लेवल बढ़ती है। इससे प्रेगनेंसी में आप पूर्ण रूप से चार्ज्ड महसूस करेंगी।

कैसे करें

पैरों को लंबाई में फैलाकर बैठें। दाएं पैर के घुटने को मोड़ते हुए, दाईं एड़ी को दाएं नितंब (हिप) के नीचे रखें। इसी तरह बाएं पैर को मोड़ते हुए बाईं एड़ी को बाएं नितंब के नीचे रखें। घुटनों के बल खड़े हो जाएं। ध्यान रहे कि दोनों घुटने और पैरों के पंजे समान दूरी पर खुले हों। लंबी सांस लें और सांस छोड़ते हुए कमर के ऊपरी हिस्से को पीछे की ओर ले जाएं। दाईं हथेली से दाईं एड़ी को और बाईं हथेली से बाईं एड़ी को पकड़ने की कोशिश करें। ध्यान रहे, पीछे झुकते समय गर्दन को झटका न लगे।

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सांस का व्‍यायाम

इसमें केवल अपनी सांसो को अंदर लें और बाहर छोड़ें। इसके लिए किसी एकांत जगह पर चटाई बिछाकर बैठ जाएं। धीरे-धीरे सांस अंदर लें और बाहर छोड़ें। प्रेगनेंसी में प्राणायाम करना भी लाभदायक होता है।

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