Yoga Mudra : पेट की समस्याओं का जड़ से करती है इलाज ''गरुड़ मुद्रा''

मुद्रा योग से आप पेट से संबंधित रोगों का इलाज कर सकते हैं। इसमें से एक मुद्रा है गरुड़ मुद्रा, (Garuda Mudra) जो पेट की समस्याओं को कम करने में लाभदायक साबित हो सकती है।

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Written By: Anshumala | Published : November 25, 2019 4:32 PM IST

कुछ भी उल्टा-सीधा खा लेने से अक्सर लोगों को पेट दर्द, अपच, गैस, कब्ज आदि की समस्या हो जाती है। कई बार पेट के अंदर अल्सर होने के कारण भी दर्द रहता है। यदि दर्द लगातार बनी रहे, तो इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। वैसे, आज जिस तरह की लाइफस्टाइल और खानपान की आदत लोगों की होती जा रही है, उससे पेट दर्द, गैस होना बहुत ही कॉमन समस्या है। काम के दबाव में देर रात तक जागना, मसालेदार भोजन करना, शारीरिक मेहनत ना करना आदि के कारण पेट की समस्याएं भी बढ़ रही हैं। पेट से संबंधित बीमारियों को खान-पान में थोड़ा बदलाव लाकर और योग मुद्रा का अभ्यास (Mudra for Stomach pain) करके बचा जा सकता है। मुद्रा कई हैं, जिसमें गरुड़ मुद्रा (Garuda Mudra) पेट से संबंधित रोगों का इलाज करती है।

कैसे करें गरुड़ मुद्रा का अभ्यास

बाईं हथेली को ऊपर की ओर रखें। अब उस पर दाईं हथेली को इस प्रकार रखें कि दोनों हाथों की उंगलियां एक-दूसरे को ढकें नहीं। इस स्थिति में दस बार गहरी सांस लें और छोड़ें। इसके बाद हथेलियों को नाभि पर ले आएं और फिर दस बार गहरी सांस लें-छोड़ें। फिर, हथेलियों को नाभि के और ऊपर के हिस्से पर रखें और पुनः 10 बार लंबी सांस लें-छोड़ें। अंत में, यही प्रक्रिया अपनी हथेलियों को सीने पर रखकर दुहराएं। इसके बाद हथेलियों को खोल दें और बाईं हथेली को सीने पर और दाईं हथेली को बाएं कंधे की दिशा में रखते हुए पुनः 10 बार गहरी सांस लें और छोड़ें। पूरी प्रक्रिया बमुश्किल चार मिनट में पूरी हो जाती है। प्रत्येक दिन इसे तीन बार करने से पेट से संबंधित समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है।

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गरुड़ मुद्रा करने से होने वाले सेहत लाभ

कई बार कुछ पेट से संबंधित बीमारियां (Mudra for Stomach pain) हार्ट और रक्त विकार होने की संभावनाओं को भी बढ़ा देते हैं। आपको चाहे पेट दर्द हो, अल्सर हो, अपच या फिर गैस की समस्या परेशान कर रही हो, इसके लिए गरुड़ मुद्रा (Garuda Mudra cures stomach problem) करें। इसे करने से शरीर में ऊर्जा और प्राणशक्ति का संतुलन स्थापित होता है। यह पेट के निचले हिस्से से लेकर कंधे तक की सभी कोशिकाओं, ऊतकों और अंगों को ऊर्जा प्रदान करती है। शरीर में रक्तसंचार बढ़ जाता है। इस मुद्रा को करने से पीरियड्स में होने वाली तकलीफों को भी कम किया जा सकता है। साथ ही पीरियड्स वाले दर्द, पेट में ऐंठन भी कम हो जाता है।

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