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शलभासन एक प्राचीन योग मुद्रा है, जिसका नाम शलभ और आसन दो शब्दों से मिलकर बना है। यह योगाभ्यास करने के दौरान शरीर की आकृति शलभ (एक प्रकार का कीट) के समान दिखाई पड़ती है, जिसके अनुसार इस योग मुद्रा का नाम पड़ा। अंग्रेजी में शलभासन को “लोकस्ट पोज” (Locust pose) के नाम से जाना जाता है। यह योगासन शुरुआती अभ्यासकर्ताओं के लिए काफी प्रभावी माना जाता है, जिसकी मदद से पीठ व रीढ़ की हड्डी में लचीलता बढ़ती और साथ ही पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। शुरुआत में शलभासन करने में थोड़ी जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, अभ्यास की मदद से इसे सही तकनीक के साथ करने में सफलता मिल सकती है। आज इस लेख में हम शलभासन से मिलने वाले स्वास्थ्य लाभों को जानेंगे और साथ में यह भी जानकारी लेंगे कि इसका अभ्यास करने का सही तरीका क्या है।
शलभासन प्रमुख रूप से पीठ में मौजूद मांसपेशियों व हड्डियों को मजबूत बनाता है और उनमें लचीलता लाता है। शलभासन से मिलने वाले प्रमुख लाभों में निम्न शामिल है -
इस योग क्रिया को शरीर की कई मांसपेशियों के लिए लाभदायक माना जाता है। इशें पीठ, जांघ, सीने और कोर मांसपेशियां शामिल हैं।
शलभासन को ऐसी योग मुद्राओं में शामिल किया जाता है, जिन्हें करने के लिए संतुलन की आवश्यकता पड़ती है। साथ ही इससे कोर मांसपेशियां मजबूत बनती है और शारीरिक संतुलन व मुद्रा दोनों में सुधार होता है।
शलभासन के दौरान पेट की मांसपेशियों में खिंचाव आता है और साथ ही पेट के अंदर के अंग भी उत्तेजित हो जाते हैं और पाचन क्रिया को तेज करने में मदद मिलती है।
शलभासन योग मुद्रा सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य में ही सुधार नहीं करती है, बल्कि इससे मानसिक स्वास्थ्य में भी काफी सुधार होता है। नियमित रूप से शलभासन अभ्यास करने से डिप्रेशन, चिंता, तनाव और अनिद्रा जैसी स्थितियों का इलाज किया जा सकता है।
हालांकि, उपरोक्त बताए गए शलभासन के स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने के लिए उसे सही तरीके के साथ करना जरूरी है। यदि आप पहली बार शलभासन अभ्यास करने जा रहे हैं या फिर आपको इसकी सही विधि की जानकारी नहीं है तो किसी अच्छे योग प्रशिक्षक से मदद लेने की सलाह दी जाती है।
शलभासन से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने के लिए इस योगासन को करने का सही तरीका पता होना जरूरी है। आप निम्न चरणों के माध्यम से शलभासन सीख सकते हैं -
इस मुद्रा को आप एक मिनट तक करके रख सकते हैं और उसके बाद सांस छोड़ते हुए शरीर के उठाए गए अंगों को धीरे-धीरे नीचे ले आएं। इसके बाद कुछ देर तक शरीर को आराम करने दें और फिर यही प्रक्रिया दोहराएं
शुरुआती योगासन सीखने वालों के लिए शरीर को हवा में रखना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, इसलिए वे इस योग मुद्रा के दौरान अपने हाथों को जमीन पर ही रख सकते हैं और सिर्फ उतना ही शरीर उठा सकते हैं जितना उनसे संभव हो पाता है।
शलभासन के दौरान कोई भी क्रिया बलपूर्वक करने की कोशिश न करें और न ही तेजी या झटके के साथ शरीर के अंगों को उठाएं। ऐसा करने से शरीर के कुछ हिस्सों में दर्द हो सकता है।
यदि आपको स्वास्थ्य से संबंधी निम्न समस्याएं हैं, तो आपको शलभासन न करने की सलाह दी जाती है -