
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : May 6, 2022 7:58 PM IST
परिघासन मांसपेशियों में लचीलता प्रदान करने वाला एक विशेष योगासन है, जिसे आमतौर पर एक स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज के रूप में भी किया जाता है। यह मध्यम श्रेणी की योग मुद्रा है, जिसे करने के लिए शरीर में पर्याप्त लचीलता होनी जरूरी है। यह योगासन आमतौर पर कांख, कंधे, जांघ और पीठ के दोनों तरफ की मांसपेशियों में खिंचाव लाती है। साथ ही इससे रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने में भी मदद मिलती है। इस योगासन का नाम संस्कृत के शब्द “परिघ” पर पड़ा है, जिसका हिंदी में मतलब द्वार होता है। परिघासन में शारीरिक मुद्रा एक द्वार की भांति बन जाती है और इसलिए अंग्रेजी में भी इसे गेट पॉज (Gate pose) के नाम से जाना जाता है।
यदि परिघासन योग मुद्रा को सही तकनीक के साथ और विशेष बातों का ध्यान रखते हुए किया जाए तो इससे कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं -
परिघासन योग मुद्रा के दौरान शरीर की कई महत्वपूर्ण मांसपेशियों की एक्सरसाइज होती है और धीरे-धीरे ये मजबूत बन जाती हैं।
परिघासन योगाभ्यास के दौरान कमर में कई बार मोड़ आते हैं, जिससे रीढ़ की हड्डी की लचीलता बढ़ने लगती है।
यदि सही तकनीक के साथ परिघासन अभ्यास किया जा रहा है, तो इससे शरीर के कई महत्वपूर्ण हिस्सों में रक्त की आपूर्ति बढ़ जाती है।
सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं परिघासन योग मुद्रा मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभदायक है। इससे डिप्रेशन, चिंता व तनाव जैसे लक्षणों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
हालांकि, परिघासन से प्राप्त होने वाले स्वास्थ्य लाभ प्रमुख रूप से योगासन के तरीके और अभ्यासकर्ता की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करते हैं।
यदि आप पहली बार परिघासन अभ्यास करने जा रहे हैं, तो निम्न चरणों का पालन करके आपको यह योग मुद्रा बनाने में मदद मिल सकती है -
इस योग मुद्रा को आप लगभग तीस सेकेंड या अपनी क्षमता के अनुसार अवधि तक बना कर रख सकते हैं और फिर धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में आ सकते हैं। यदि आपको इस बारे में कोई भी सवाल है, तो योग प्रशिक्षक से संपर्क करें।
परिघासन अभ्यास आमतौर पर योग प्रशिक्षक के निगरानी में ही किया जाता है और इस दौरान निम्न सावधानियां बरतनी जरूरी होती हैं -
कुछ स्वास्थ्य स्थितियां हैं जिनके दौरान परिघासन अभ्यास करने से पहले डॉक्टर से अनुमति ले लेनी चाहिए -