... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Editorial Team | Published : January 28, 2019 8:07 PM IST
आज लोग इतने ज्यादा परेशान रहने लगे हैं, काम का प्रेशर इतना बढ़ गया है कि वे बात-बात में उत्तेजित, क्रोधित हो उठते हैं। आज असंतुष्ट मन एक समस्या बन चुका है। इससे छुटकारा दिलाएगा गर्भासन। यह एक योग आसन है, जिसके जरिए आप न केवल खुद को शांत कर सकते हैं बल्कि शरीर को संतुलित और पाचन-तंत्र को ठीक भी कर सकते हैं।
गर्भासन करने की विधि
पदासन में बैठकर हाथों को पिंडलियों और जांघों के बीच इतना अन्दर डालें कि कुहनियां पिंडलियों में से आसानी से ऊपर मोड़ी जा सकें। हाथों को ऊपर की ओर मोड़ें और कानों को पकड़ें। पूरे शरीर के भार को नितम्बों पर रखें। आराम से जब तक सम्भव हो, इसी स्थिति में रुकें। अब पैरों को नीचे कर लें। हाथों को बाहर निकाल लें। इस अवस्था में कानों को हाथों से पकड़ते समय श्वास बाहर छोड़ें। अंतिम स्थिति में साधारण रूप से सांस लें। शरीर को ठीक तरह से साधने या श्वास-प्रक्रिया पर आप एकाग्रता भी हो सकते हैं।
इसे भी पढ़ें- स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए नियमित करें ये 4 आसन
गर्भासन के लाभ
- शरीर को हल्का और रक्त संचार को बढ़ाने में मदद करता है यह आसन।
- उत्तेजित, क्रोधित और असंतुष्ट मन को शांत करने में यह आसन सहायक है।
- यह शरीर को संतुलित करता है।
- यह स्नायु-दौर्बल्यता को भी दूर करता है।
- खुद पर काबू न पा सकने वाले स्वभाव के व्यक्तियों को इस आसन का अभ्यास दिन में जितनी बार भी सम्भव हो सके, करना चाहिए।
- पाचन-तंत्र को उत्तेजित करता है और भूख को बढ़ाता है।
- ऐसा माना जाता है कि गर्भाशय संबंधित समस्या इस आसन के जरिए दूर किए जा सकते हैं।
- इस आसन से रीढ़ की हड्डी मजबूत व लचीली होती है।
इसे भी पढ़ें- नियमित करेंगे ये 5 आसन, तो डायबिटीज रहेगा कंट्रोल में
सावधानी बरतें
शुरुआत में इस आसन को करते समय कठिनाइयां होगी लेकिन अभ्यास के साथ इस आसन को आसानी से किया जा सकता है। अगर आपसे यह आसन नहीं हो रहा है तो जबरदस्ती न करें। इस आसन का अभ्यास खाली पेट करें अथवा भोजन के तीन से चार घंटे के बाद कर सकते हैं। गर्भवती महिलाओं को इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए। प्रसव के 40 दिन बाद से पुन: इसका अभ्यास किया जा सकता है। साथ ही जिन्हें कमर और पीठ दर्द की समस्या हो उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए।
Disclaimer: The content on TheHealthSite.com is only for informational purposes. It is not at all professional medical advice. Always consult your doctor or a healthcare specialist for any questions regarding your health or a medical condition.