
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Updated : July 1, 2022 11:28 AM IST
मत्स्यासन (Matsyasana in hindi) को अंग्रेजी में “फिश पोज” (Fish pose in hindi) कहा जाता है, जो मुख्य रूप से रीढ़ की हड्डी, पीठ का ऊपरी सिरा और गर्दन का निचला सिरा मजबूत बनाने के लिए किया जाता है। इसमें रीढ़ को ऊपर व नीचे एक निश्चित लय के साथ हलचल दी जाती है, जो पानी में मछली के तैरने की क्रिया से मेल खाती है। इसी कारण से इस योगासन का नाम मत्स्यासन या फिश पोज है। मत्स्यासन से न सिर्फ शारीरिक रूप से आपको अनेक फायदे देता है, बल्कि इससे मस्तिष्क की स्थिति में भी सुधार रहता है और कई भावनात्मक समस्याएं दूर हो जाती हैं। चलिए जानते हैं मत्स्यासन योगाभ्यास करने से क्या-क्या फायदे मिलते हैं और इस दौरान किन सावधानियों का पालन करना जरूरी होता है।
मत्स्यासन से मिलने वाले स्वास्थ्य लाभों में निम्न शामिल हैं -
यदि मत्स्यासन का सही विधि के अनुसार अभ्यास किया जाए तो इससे दोनों कूल्हों की पेशियां मजबूत हो सकती हैं।
मत्स्यासन पसलियों के बीच पाई जाने वाली मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। ये मांसपेशियां सांस लेने के दौरान छाती को सिकुड़ने व खुलने में मदद करती हैं जिससे आप सामान्य रूप से सांस ले पाते हैं।
नियमित रूप से मत्स्यासन अभ्यास करने से रीढ़ व गर्दन की हड्डी के आसपास की मांसपेशियां मजबूत हो जाती है, जो उन्हें सहारा प्रदान करती हैं।
मत्स्यासन की मदद से पेट के लचीलेपन को बढ़ाया जा सकता है, जिससे पेट दर्द, अपच और अन्य कई समस्याओं से छुटकारा पाने में मदद मिल सकती है।
मत्स्यासन योग से संपूर्ण स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने के लिए उसे सही विधि के अनुसार करना जरूरी है, जो इस प्रकार है -
हालांकि, मत्स्यासन एक जटिल योगासन है जिसे सीखने में समय लग सकता है और करते समय गलती भी हो सकती है। इसलिए आपको योग प्रशिक्षक की मदद से यह योगासन सीखने की सलाह दी जाती है।
किसी भी योगासन को करते समय विशेष सावधानियां बरतना जरूरी होता है, ताकि उसका कोई विपरीत प्रभाव आपके शरीर पर न पड़े। मत्स्यासन करते समय निम्न बातों का ध्यान रखना जरूरी है -
कुछ स्थितियों में मत्स्यासन अभ्यास नहीं करना चाहिए, जिनमें निम्न स्वास्थ्य समस्याएं भी शामिल हैं -