Garbhasana Aka Embryo in Womb Pose Benefits- गर्भासन के फायदे, तरीका, लाभ और नुकसान

गर्भासन (Embryo in Womb Pose) के फायदे व नुकसान- गर्भासन एक खास योग मुद्रा है, जो शरीर के विभिन्न हिस्सों को लचीला बनाती है और उन्हें शक्ति प्रदान करती है।

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Written By: Mukesh Sharma | Updated : May 13, 2022 2:51 PM IST

गर्भासन एक खास योग मुद्रा है, जिसकी मदद से शरीर के कई हिस्सों में लचीलापन लाया जाता है। यह एक मध्यम श्रेणी की योग मुद्रा है, जिसका मतलब इसे शुरुआती अभ्यासकर्ता भी किसी अनुभवी योग प्रशिक्षक की मदद से कर सकते हैं। यह योगासन शरीर के ऊपरी और निचले दोनों हिस्सों को सक्रिय बनाने का काम करता है। हालांकि, इस योग मुद्रा के स्वास्थ्य लाभों को प्राप्त करने के लिए इसे सही तकनीक के साथ करना बेहद जरूरी है। वहीं यदि इसका अभ्यास सही तकनीक के साथ न किया जाए तो इससे स्वास्थ्य के लिए कुछ समस्याएं हो सकती हैं। इस योगासन में अभ्यासकर्ता के शरीर की आकृति गर्भ में पल रहे भ्रूण के समान प्रतीत होती है, जिससे इसका नाम गर्भासन पड़ा। अंग्रेजी में इसे “एंब्रियो इन द वॉम्ब पॉज” (Embryo in Womb Pose) के नाम से जाना जाता है।

गर्भासन के फायदे (Benefits of Embryo in Womb Pose)

यदि सही तरीके के साथ गर्भासन अभ्यास किया जाए तो इससे कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं, जिनमें मुख्य रूप से निम्न शामिल हैं -

1. मांसपेशियों को लचीला बनाए गर्भासन

शरीर के ऊपरी व निचले हिस्से की मांसपेशियों को लचीला बनाता है, जिससे मांसपेशियों में दर्द व ऐंठन की समस्याएं नहीं हो पाती हैं।

2. गर्भासन से बढ़ाएं पाचन

इससे पेट के अंदरूनी अंगों को पर्याप्त खिंचाव मिलता है, जिससे वह उत्तेजित हो जाते हैं और पाचन क्रिया सामान्य रूप से काम करने लगती है।

3. रक्त परिसंचरण में सुधार करे गर्भासन

इससे ब्लड सर्कुलेशन में सुधार होता है, जिससे शरीर के अन्य हिस्सों को पर्याप्त रक्त मिलता है और वे सामान्य रूप से काम करने लग जाते हैं।

4. मानसिक शांति को बढ़ावा देता है गर्भासन

नियमित रूप से यह योगाभ्यास करने से डिप्रेशन, तनाव व चिंता जैसे मानसिक विकार कम होने लगते हैं और मूड अच्छा रहता है।

हालांकि, गर्भासन से प्राप्त होने वाले स्वास्थ्य लाभ पूरी तरह से योगासन के तरीके और आपकी स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करते हैं।

गर्भासन करने का तरीका (Steps to do Embryo in Womb Pose)

यदि आप पहली बार गर्भासन अभ्यास करने जा रहे हैं, तो निम्न चरणों का पालन करके आपको यह योग मुद्रा बनाने में मदद मिल सकती है -

  • Step 1. सबसे पहले सपाट जमीन पर मैट बिछाकर बैठ जाएं
  • Step 2. अब दोनों पैरों को मोड़कर पद्मासन की मुद्रा धारण करें
  • Step 3. इसके बाद दोनों हाथों को टांगों के बीच कुछ इस प्रकार लाएं की कोहनियां पिंडलियों के नीचे आकर मुड़ सकें
  • Step 4. कोहनियों के बल पर टांगों को उठाते हुए दोनों पैरों के तलवों को आपस में जोड़ कर रखें
  • Step 5. शरीर का संतुलन बनाते हुए हाथों को चेहरे पर लाएं और गालों को छूने की कोशिश करें
  • Step 6. अब हल्का का पीछे की तरफ झुकें जिससे शरीर का पूरा भार कूल्हों पर आ जाए
  • Step 7. अपनी क्षमता के अनुसार इस योग मुद्रा को बनाए रखें और फिर सामान्य स्थिति में आ जाएं

यदि आपको गर्भासन योग मुद्रा से संबंधी कोई भी सवाल है, तो किसी अनुभवी योग प्रशिक्षक से संपर्क करें

गर्भासन के दौरान सावधानियां (Precautions during Embryo in Womb Pose)

गर्भासन योग मुद्रा बनाने के दौरान मुख्य रूप से निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए -

  • योग क्रिया शुरू करने से पहले अच्छे से वार्मअप कर लें
  • शरीर में सिर्फ इतना ही खिंचाव आने दे जितना संभव हो
  • किसी प्रकार का झटका न लगने दें
  • टांग गर्दन पर यदि नहीं जा रही है तो बलपूर्वक ऐसा करने की कोशिश न करें
  • पूरा ध्यान योग मुद्रा पर रखें ताकि आपको संतुलन बनाए रखने में कोई दिक्कत न हो

गर्भासन कब न करें (When not to do Embryo in Womb Pose)

कुछ स्वास्थ्य स्थितियां हैं जिनके दौरान अभ्यास करने से पहले डॉक्टर से अनुमति ले लेनी चाहिए -

  • शरीर के किसी हिस्से में दर्द या गंभीर चोट लगी होना
  • हाई या लो बीपी
  • सांस या हृदय संबंधी रोग होना
  • वृद्धावस्था या विकलांगता (जिससे शारीरिक संतुलन बनाने में दिक्कत हो रही हो)
  • मासिक धर्म या गर्भावस्था
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