Durvasasana Aka Sage Durvasa's Pose Benefits- दुर्वासासन के फायदे, तरीका, लाभ और नुकसान

दुर्वासासन (Sage Durvasa's Pose) के फायदे व नुकसान- दुर्वासासन एक खास प्राचीन योग मुद्रा है। यह एक जटिल योग मुद्रा है, जिसमें अभ्यासकर्ता को एक टांग के बल खड़ा होकर यह योग मुद्रा बनानी पड़ती है।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : May 13, 2022 9:57 PM IST

दुर्वासासन हठ योग की मुद्रा है, जिसका अभ्यास एक टांग पर संतुलन बनाते हुए किया जाता है। यह एक जटिल योग मुद्रा है और इसे शुरुआती अभ्यासकर्ताओं द्वारा नहीं किया जाना चाहिए। दुर्वासासन अभ्यास करने से पहले अभ्यासकर्ता को शरीर को लचीला बनाना पड़ता है और फिर उसके बाद उसे धीरे-धीरे इस योग मुद्रा पर कुशलता पाई जाती है। इस योग मुद्रा का अभ्यास करते समय एक छोटी सी गलती शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है। हालांकि, अनुभवी अभ्यासकर्ताओं के लिए यह बेहद लाभदायक योग मुद्रा है, इससे शरीर के निचले हिस्से से ऊपरी हिस्से तक की सभी मांसपेशियों में लचीलापन आ जाता है। कुछ पौराणिक कथाओं के अनुसार इस योगासन का नाम ऋषि दुर्वासा के नाम पर पड़ा था और अंग्रेजी में इसे “सेज दुर्वासाज पॉज” (Sage Durvasa's Pose) के नाम से जाना जाता है।

दुर्वासासन के फायदे (Benefits of Sage Durvasa's Pose)

दुर्वासासन ऐसा योगाभ्यास है, जिसे सही तकनीक और विशेष बातों का ध्यान रखते हुए किया जाए तो इससे निम्न स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं -

1. मांसपेशियों को मजबूत बनाता है दुर्वासासन

दुर्वासासन का सही तकनीक के साथ अभ्यास करने से इससे शरीर के निचले व ऊपरी हिस्से की मांसपेशियों को मजबूत बनाया जाता है।

2. शारीरिक मुद्रा में सुधार करता है दुर्वासासन

शरीर की प्रमुख मांसपेशियों को मजबूत बनाता है, जिससे शारीरिक संतुलन व बॉडी पोस्चर में सुधार होता है।

3. रक्तस्राव को बढ़ाता है दुर्वासासन

शरीर के सभी हिस्सों में रक्तस्राव बढ़ता है, जिससे सभी अंगों को पर्याप्त मात्रा में रक्त मिल पाता है।

4. तंत्रिका तंत्र में सुधार करता है दुर्वासासन

तंत्रिका तंत्र में सुधार करता है, जिससे शरीर सभी क्रियाएं बिना किसी रुकावट के कर पाता है।

5. दुर्वासासन से होता है मानसिक रोगों में सुधार

चिंता, तनाव व डिप्रेशन जैसे लक्षणों को कम करके मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाता है।

हालांकि, दुर्वासासन से प्राप्त होने वाले स्वास्थ्य लाभ पूरी तरह से योगासन के तरीके और आपकी स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करते हैं।

दुर्वासासन करने का तरीका (Steps to do Sage Durvasa's Pose)

यदि आप पहली बार दुर्वासासन अभ्यास करने जा रहे हैं, तो निम्न चरणों का पालन करके आपको यह योग मुद्रा बनाने में मदद मिल सकती है -

  • Step 1 - सबसे पहले सपाट जमीन पर मैट बिछा लें और उसपर सुखासन योग मुद्रा में बैठ जाएं
  • Step 2 - इसके बाद अपने हाथों की मदद से दाएं पैर को उठाकर धीरे-धीरे अपनी गर्दन पर लाकर रख लें
  • Step 3 - अब बाएं घुटने के मोड़ें और दोनों नितंबों के बीच में ठीक आगे पैर को रख लें
  • Step 4 - दोनों हाथों को जमीन पर रखें और धीरे-धीरे आगे की ओर झुकना शुरू करें
  • Step 5 - संतुलन बनाते हुए बाएं पैर पर बैठ जाएं (उकड़ू) और दोनों हाथों के संतुलन बनाकर रखें
  • Step 6 - अब हल्का जोर लगाते हुए उठना शुरू करें और दोनों हाथों को जोड़ लें

इस योग मुद्रा को आप अपनी क्षमता के अनुसार जितनी देर तक चाहें कर सकते हैं और फिर इसके बाद धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में आ जाएं। यदि आपको किसी भी प्रकार प्रश्न है, जो योग प्रशिक्षक से संपर्क करें।

दुर्वासासन के दौरान सावधानियां (Precautions during Sage Durvasa's Pose)

दुर्वासासन अभ्यास आमतौर पर योग प्रशिक्षक की निगरानी में ही किया जाता है और इस दौरान निम्न सावधानियां बरतनी जरूरी होती हैं -

  • टांग को धीरे-धीरे गर्दन पर रखें और बलपूर्वक खींचने की कोशिश न करें
  • संतुलन बनाने के लिए योग प्रशिक्षक से मदद लें
  • योग क्रिया शुरू करने से पहले टांगों का अच्छे से वार्मअप कर लें
  • शरीर में इतना ही खिंचाव लाएं जितना संभव हो
  • क्रिया के दौरान किसी भी प्रकार का झटका न लगने दें

दुर्वासासन कब न करें (When not to do Sage Durvasa's Pose)

कुछ स्वास्थ्य स्थितियां हैं जिनके दौरान दुर्वासासनअभ्यास करने से पहले डॉक्टर से अनुमति ले लेनी चाहिए -

  • शरीर के किसी हिस्से में दर्द या गंभीर चोट लगी होना
  • हाई बीपी या लो बीपी की समस्या होना
  • सांस या हृदय संबंधी रोग होना
  • शारीरिक संतुलन बनाने में दिक्कत या वृद्धावस्था
  • मासिक धर्म या गर्भावस्था
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