छींक और उबासी में आदित्य मुद्रा, फाइलेरिया में उद्गीत प्राणायाम करने से मिलेगी राहत

फाइलेरिया (हाथीपांव) रोग कृमियों द्वारा होता है। यह रोग प्रमुख रूप से मच्छरों की क्यूलेक्स प्रजाति द्वारा फैलाया जाता है।

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Written By: Anshumala | Published : October 18, 2018 9:32 AM IST

बार-बार छींक और उबासी आना भी ठीक नहीं। यदि आप मीटिंग या दोस्तों के बीच बैठे हैं, खासकर सार्वजनिक जगहों पर आपको लगातार छींक आए तो सामने वाला भी इससे परेशान हो सकता है। कई लोगों को सुबह उठते ही काफी छींकें आती हैं। योगाचार्य डॉ. प्रशांत कुमार कहते हैं कि  यह समस्या शरीर में पृथ्वी तत्व की कमी के कारण पैदा होती है। इसका कारण एलर्जी हो, संक्रमण हो, मौसम परिवर्तन हो या फिर प्रदूषण-आदित्य मुद्रा से उसका लाभ तत्काल मिलता है जिन लोगों को साधना करते समय कुछ न कुछ अवरोध महसूस होता है, उन्हें भी इससे लाभ होगा।

कैसे करें आदित्य मुद्रा

अंगूठे के अग्रभाग को अनामिका की जड़ में लगाएं। शेष उंगलियों को सीधा और मिलाकर रखें। दोनों हथेलियां पास-पास रखकर यह मुद्रा लगाएं। थोड़ी-थोड़ी देर बाद दोनों हथेलियों को परस्पर रगड़ते रहें। इस मुद्रा से कुछ ही देर में छींक और उबासी बंद हो जाएगी। इसके तुरन्त बाद मुद्रा खोल दें अन्यथा पृथ्वी तत्व के बढ़ने से मोटापे की समस्या हो सकती है।

जब हो फाइलेरिया

आपने देखा होगा कि कुछ लोगों के पैर बहुत ज्यादा मोटे, फूले या सूजे हुए नजर आते हैं। जानते हैं इस समस्या को क्या कहते हैं? यह रोग है फाइलेरिया (हाथीपांव)। यह रोग कृमियों द्वारा होता है। यह रोग प्रमुख रूप से मच्छरों की क्यूलेक्स प्रजाति द्वारा फैलाया जाता है। माइक्रोफाइलेरिया के रूप में कृमि मनुष्य के रक्त में घूमता रहता है। जब मच्छर खून चूसता है तो यह मच्छर में पहुच जाता है। फिर यही मच्छर मनुष्यों में रोग पहुंचाता है। फाइलेरिया विशेष रूप से अफ्रीका, एशिया और पश्चिमी अमेरिका में पाया जाता है। भारत में भी यह प्रमुख स्वास्थ्य समस्या है। ऐसा माना जाता है कि लगभग दो करोड़ व्यक्तियों में यह बीमारी किसी-न-किसी रूप में मौजूद है। यह रोग उन स्थानों में रहने वाले लोगों में ज्यादा होता है, जिन स्थानों में पानी का प्रभाव ज्यादा हो, जहां वर्षा ज्यादा समय तक ज्यादा मात्रा में होती हो, नमी ज्यादा रहती हो, जहां के जलाशय गंदे हों। अधिकतर मामलों में इस रोग के लक्षणों का प्रारंभिक अवस्था में पता नहीं चल पाता है, जिससे इलाज में मुश्किल हो सकती है। हालांकि, आप नियमित योगाभ्यास करके भी इस समस्या से बच सकते हैं। इसके लिए आप प्रतिदिन उद्गीत प्राणायाम करना शुरू कर दें।

pranayam health benefits फाइलेरिया में उद्गीत प्राणायाम करने से इस समस्या से छुटकारा मिलता है। © Shutterstock

फाइलेरिया में उद्गीत प्राणायाम

फाइलेरिया में पांव बहुत ज्यादा सूज जाते हैं। फाइलेरिया में कोई भी दवा कुछ हद तक ही कारगर होती है। इससे पीड़ित व्यक्ति को वायुकारक तत्वों से परहेज करना चाहिए और हमेशा गुनगुने पानी का सेवन ही करना चाहिए। रोजाना सुबह उद्गीत प्राणायाम लाभकारी है। सुखपूर्वक बैठकर सामान्य गति से लम्बी-गहरी सांस अंदर लें और ऊँ के उच्चारण के साथ सामान्य गति से ही सांस छोड़ें। ऊँ के उच्चारण में “ओ” से तीन गुना अधिक समय “म” के उच्चारण पर हो। सांस लेते समय अपने आसपास सकारात्मक ऊर्जा की मौजूदगी महसूस करें। ध्यान अग्निचक्र पर हो। प्रतिदिन तीन से चार मिनट तक अथवा औसतन सात बार तक अभ्यास करें। उद्गीत प्राणायाम और भोजन के बीच तीन से पांच घंटे का अंतराल रखें।

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