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Written By: Anshumala | Published : September 14, 2019 10:26 AM IST
जानें, क्या है भ्रमण प्राणायाम और इसके फायदे। © Shutterstock.
लंबी उम्र तक सेहतमंद बने रहना चाहते हैं, तो आपको नियमित रूप से योगासन और मेडिटेशन को अपनी दिनचर्या में शामिल करना होगा। आप चाहें तो सेहतमंद रहने के लिए प्राणायाम से भी शुरुआत कर सकते हैं। प्राणायाम अब तक आप बैठकर करते होंगे, लेकिन हम बता रहे हैं टहलते हुए करने वाले प्राणायाम के बारे में। इस प्राणायाम को नाम दिया गया है भ्रमण प्राणायाम (Bhraman Pranayam)। भ्रमण का अर्थ होता है टहलना यानी एक ऐसा प्राणायाम जिसे आप टहलते हुए कर सकते हैं। यह 35 से 55 वर्ष के महिलाओं और पुरुषों के लिए अधिक लाभकारी होता है। इसके कई फायदे होते हैं। जानें, भ्रमण प्राणायम (Bhraman Pranayam) कैसे करें और इसके फायदे (Bhraman Pranayam benefits) क्या-क्या होते हैं...
भ्रमण प्राणायाम (How to do Bhraman Pranayam) मुख्य रूप से सांस लेने-छोड़ने से संबंधित होता है। इसे ब्रीदिंग तकनीक भी कह सकते हैं। इसे करना काफी आसान है, हर कोई जो सुबह-शाम टहलता है, वह इसका अभ्यास कर सकता है। इसे करने के लिए जब आप टहलते हैं, तब उस समय करें। टहलने के दौरान शरीर को सीधा रखते हुए सांस धीरे-धीरे लें। जब अच्छी तरह से गहरी सांस ले लें, तो उसके बाद सांस छोड़ दें। ध्यान रहे कि सांस लेने से ज्यादा समय आपको सांस छोड़ते समय लगाना है। सांस को 5-7 कदमों तक अंदर ही रोके रखें और फिर धीरे-धीरे सांस को छोड़ें। इस प्रक्रिया को कम से कम 10 बार जरूर दोहराएं। समझ नहीं आ रहा कैसे करें भ्रमण प्राणायाम तो एक्सपर्ट की सलाह लेकर ही इसका अभ्यास करें।
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1 इसके नियमित अभ्यास से फेफड़े मजबूत (Bhraman Pranayam benefits) होते हैं।
2 टीबी, सांस से संबंधित रोग, टायफॉइड, इन्फ्लूएंजा आदि रोगों से बचने के लिए आप भ्रमण प्राणायाम का अभ्यास हर दिन कर सकते हैं।
3 दिल स्वस्थ रहता है। दिल की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है। सांस लेने-छोड़ने की प्रक्रिया से ब्लड फ्लो सही तरीके से होता है, दिल का दौरा पड़ने की संभावना कम हो जाती है।
4 जो लोग शरीर काफी कमजोरी महसूस करते हैं, उन्हें भी इसका अभ्यास करना चाहिए।
5 बाल अधिक गिरते हैं या अन्य कोई बालों से संबंधित समस्या आपको परेशान कर रही है, तो भ्रमण प्राणायाम करें।
सांस तेजी से या जल्दबाजी में ना लें और ना ही छोड़ें। अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही इसका अभ्यास करें और सांस लेने की प्रक्रिया को बढ़ाएं। सीने में दर्द महसूस हो, तो इसे करना बंद कर दें। जब असहज महसूस होना ठीक हो जाए, तो दोबारा से इसका अभ्यास करना शुरू कर सकते हैं।