Bharadvajasana Aka Bharadvaja's Twist Benefits- भरद्वाजासन के फायदे, तरीका, लाभ और नुकसान

भरद्वाजासन (Bharadvaja's twist) के फायदे व नुकसान- भरद्वाजासन एक सरल योग मुद्रा है, जो तन व मन दोनों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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Written By: Mukesh Sharma | Updated : May 15, 2022 11:32 AM IST

भरद्वाजासन एक प्राचीन योग मुद्रा है और इससे मिलने वाले स्वास्थ्य लाभों को लेकर वर्तमान में भी यह काफी प्रचलित है। यह एक सरल योग मुद्रा है, जिसका अभ्यास करने के लिए न तो अधिक शारीरिक बल की आवश्यकता पड़ती है और न ही व्यक्ति को शरीर का हवा में संतुलन बनाकर रखना पड़ता है। भरद्वाजासन का नाम भारद्वाज मुनि के नाम पर पड़ा और अंग्रेजी में इसे भरद्वाजाज ट्विस्ट (Bharadvaja's twist) के नाम से जाना जाता है। भरद्वाजासन प्रमुख रूप से रीढ़ की हड्डी, जांघ, पिंडली और कंधों की मांसपेशियों को लचीला बनाता है। हालांकि, सही तकनीक के साथ अभ्यास करने से इससे कई मानसिक समस्याओं को दूर किया जा सकता है।

भरद्वाजासन के फायदे (Benefits of Bharadvaja's twist)

भरद्वाजासन ऐसा योगाभ्यास है, जिसे सही तकनीक और विशेष बातों का ध्यान रखते हुए किया जाए तो इससे निम्न स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं -

1. कमर की चर्बी कम करे भरद्वाजासन

भरद्वाजासन योगाभ्यास करने से कमर के दोनों तरफ के हिस्सों में खिंचाव आता है, इससे मांसपेशियां मजबूत होने के साथ-साथ कमर की चर्बी कम करने में मदद मिलती है।

2. पीठ की जकड़न को दूर करे भरद्वाजासन

जिन लोगों को पीठ में जकड़न की समस्या रहती है, तो उनके लिए यह योगासन काफी लाभदायक हो सकता है। भरद्वाजासन के दौरान पीठ की मांसपेशियों में उचित तनाव व खिंचाव आता है, जिससे पीठ और गर्दन की जकड़न कम होती है।

3. कूल्हे व घुटने के जोड़ों में लाभ

भरद्वाजासन योगाभ्यास करने से कूल्हे और घुटने के जोड़ों पर भी सकारात्कमक प्रभाव पड़ता है। इस योग मुद्रा से घुटने व कूल्हे के जोड़ों में मौजूद संरचनाओं में खिंचाव आने लगता है और जोड़ खुलने लगते हैं।

4. भरद्वाजासन से करे पाचन क्रिया में सुधार

यह योग मुद्रा पेट के मांसपेशियों में खिंचाव भी लाती है और साथ ही पेट के अंदरूनी अंगों में भी सकारात्मक दबाव पड़ता है। पेट की मांसपेशियों में दबाव पड़ने से उसके अंदरूनी अंग प्रभावी रूप से काम करना बंद कर देते हैं औऱ पाचन क्रिया में सुधार हो जाता है।

हालांकि, भरद्वाजासन से प्राप्त होने वाले स्वास्थ्य लाभ पूरी तरह से योगासन के तरीके और आपकी स्वास्थ्य स्थिति पर आधारित होते हैं।

भरद्वाजासन करने का तरीका (Steps to do Bharadvaja's twist)

यदि आप पहली बार भरद्वाजासन अभ्यास करने जा रहे हैं, तो आपको निम्न चरणों का पालन करके यह योग मुद्रा बनाने में मदद मिल सकती है -

  • Step 1 - सबसे पहले सपाट जमीन पर मैट बिछा लें और उस पर दंडासन योग मुद्रा में बैठ जाएं
  • Step 2 - दोनों घुटनों को मोड़ते हुए पैरों को अपने बाएं कूल्हे के पास लाएं और इस दौरान शरीर का वजन दाएं कूल्हे पर रखें
  • Step 3 - हाथ की मदद से दाएं पैर को टखने से पकड़ कर उठाएं और बाईं जांघ पर रख लें
  • Step 4 - रीढ़ की हड्डी व गर्दन को सीधा रखें और धीरे-धीरे गहरी सांस लेते रहें
  • Step 5 - अब बाएं हाथ को दाएं घुटने पर रखें और उसे धीरे-धीरे अपनी तरफ खींचें
  • Step 6 - दाएं हाथ पीछे से लाते हुए अपने हाथ से दाएं पैर के अंगूठे को पकड़ें

इस योग मुद्रा को आमतौर पर आप अपनी क्षमता के अनुसार बनाकर रख सकते हैं और फिर इसके बाद धीरे-धीरे सामान्य मुद्रा में आ सकते हैं।

भरद्वाजासन के दौरान सावधानियां (Precautions during Bharadvaja's twist)

भरद्वाजासन अभ्यास करने के दौरान निम्न बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है -

  • योग क्रिया शुरू करने से पहले वार्म अप कर लें
  • कमर व गर्दन को सीधा रखें
  • टखने को जांघ पर बलपूर्वक न रखें

भरद्वाजासन कब न करें (When not to do Bharadvaja's twist)

निम्न स्थितियों में भरद्वाजासन अभ्यास करने से पहले डॉक्टर से अनुमति ले लेनी चाहिए -

  • शरीर के किसी हिस्से में गंभीर दर्द या चोट लगी होना
  • थकावट या मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होना
  • मासिक धर्म या गर्भावस्था
  • उच्च या निम्न रक्तचाप होना
  • शारीरिक संतुलन न बना पाना या वृद्धावस्था
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