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फेफड़े रहेंगे स्वस्थ जब करेंगे अनुलोम विलोम, जानें इसके अन्य फायदे

अनुलोम विलोम से होने वाले सेहत लाभ, जानें। © Shutterstock.

अनुलोम विलोम प्राणायाम श्वसन क्रिया से जुड़ा है इसलिए यह शरीर में जमा हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने, फेफड़े को स्वस्थ रखने सहित शरीर की तमाम बीमारियों को दूर करने में मदद करता है।

Written by Anshumala |Published : December 11, 2018 7:00 PM IST

अनुलोम विलोम कई प्राणायामों एवं सांस लेने के अभ्यासों में से एक है। यह प्राणायाम हमारे शरीर के तीन दोषों वात, पित्त और कफ को दूर कर शरीर को संतुलित अवस्था में लाने में बहुत सहायक होता है। अनुलोम विलोम का ठीक उल्टा होता है और यह श्वसन से संबंधित बीमारियां जैसे अस्थमा को दूर करने में मदद करता है। यह शरीर को ऊर्जा से भरता है। इसके अभ्यास से तनाव एवं चिंता भी दूर होती है। महिलाओं को अर्थराइटिस जैसी गंभीर समस्या से निजात दिलाता है। स्टूडेंट्स को पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ाने में भी सहायक है। इसका अभ्यास हर उम्र के लोग कर सकते हैं।

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अनुलोम विलोम कैसे करें

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जमीन पर पदमासन की मुद्रा में बैठ जाएं। दाहिने पैर के पंजे को बाएं पैर की जांघ पर और बाएं पैर के पंजे को दाएं पैर की जांघ पर रखें। आंखों को बंद कर लें। अब दाहिने नाक को दाहिने हाथ के अंगूठे से बंद करें और बाएं नाक से धीरे-धीरे गहरी सांस लें। फेफड़े हवा से भर जाएं। अब दाहिने नाक पर रखे दाएं अंगूठे को हटा लें और सांस छोड़ें। सांस छोड़ते समय आपकी मध्य उंगली बाएं नाक के पास हो। अब दाएं नाक से सांस लें और सांस छोड़ते समय दाएं अंगूठे को नाक के पास से हटा लें। इस क्रिया को 5 मिनट तक दोहराएं। इसे सुबह के समय ताजी हवा में बैठकर ही करें।

अनुलोम विलोम से होने वाले सेहत लाभ

- यह प्राणायाम श्वसन क्रिया से जुड़ा है इसलिए यह शरीर में जमा हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने, फेफड़े को स्वस्थ रखने सहित शरीर की तमाम बीमारियों को दूर करने में मदद करता है।

- प्रतिदिन अनुलोम विलोम का अभ्यास करने से वात, पित्त और कफ जैसे शारीरिक दोष दूर होते हैं।

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- नियमित रूप से इसका अभ्यास करने से कोलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता है जिसके कारण ब्लड प्रेशर की समस्या नहीं होती है। मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए भी बहुत फायदेमंद है। इसका अभ्यास करने से शरीर में इंसुलिन का स्तर कम नहीं होता है।

- यह प्राणायाम गठिया, पेट फूलना, नसों में ऐंठन, एसिडिटी और साइनसाइटिस की समस्या को दूर करने में सहायक होता है। 40 साल की उम्र के बाद लोगों को अनुलोम विलोम को अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करना चाहिए।

- इसके अभ्यास से व्यक्ति के मन में सकारात्मक विचार विचार आते हैं। अनुलोम विलोम का प्रतिदिन अभ्यास करने से गुस्सा, चिड़चिड़ापन, तनाव, भूलने की आदत, बेचैनी, उच्च रक्तचाप, अनिद्रा और माइग्रेन जैसी समस्याएं दूर हो जाती हैं। आसान से ये आसन, बढ़ाएंगे यौन शक्ति चुटकियों में

इन बातों का रखें ख्याल

- ब्लड प्रेशर के मरीज इसका अभ्यास करते समय लंबी और गहरी सांस खींचने और छोड़ने का अभ्यास करने से बचें।

- मासिक धर्म हो रहा हो या प्रेगनेंसी हो तो इस स्थिति में अनुलोम विलोम का अभ्यास न करें।

- पेट, हृदय और मस्तिष्क की सर्जरी हुई है तो इसका अभ्यास न करें।

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