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अधो मुख स्वानासन करने से कमर और हिप्स को स्ट्रेच करने में मदद मिलती है। इससे शरीर में रक्त का संचार बेहतर होता है। यह योगासन सूर्य नमस्कार में शामिल योगासनों में से एक है। इस आसन को करते वक्त आपके हाथ और पैर जमीन पर दबाव बनाते हैं और कूल्हे और कमर वाला हिस्सा ऊपर की ओर होता है। इस योगासन के दौरान आपका शरीर पिरामिड या त्रिकोणीय आकार में होता है। जानें, अधो मुख स्वानासन करने का तरीका और इससे होने वाले लाभ।
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कैसे करें अधो मुख स्वानासन
पेट के बल लेट जाएं। पैरों को सीधा रखें। हाथों को सीने के बराबर में रखें। हथेलियों को जमीन की तरफ रखें। अब हथेलियों पर दबाव डालकर सीने को ऊपर की ओर उठाएं। इस दौरान घुटनों पर शरीर का वजन रखें। अब घुटनों को सीधा करें और पैरों को जमीन पर रखें। पैरों के बीच और हाथों की उंगुलियों के बीच जगह रखें। इस स्थिति में आपका सिर जमीन की ओर होगा और आपके हिप्स दीवार की तरफ उठे होंगे जबकि शरीर का वजन हाथों और पैरों पर होगा। इस आसन में कुछ देर रुकें। लंबी और गहरी सांस लेते रहें और फिर बालासन स्थिति में आ जाएं। इस आसन को 5-6 मिनट के लिए करें।
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जानें इसके लाभ
- इससे शरीर को स्ट्रेच करने और सभी हिस्सों को मजबूती देने में मदद मिलती है।
- कमर का दर्द दूर होता है।
- पैर, कंधों और बाजुओं को मजबूती मिलती है।
- सिर दर्द, इंसोम्निया की समस्या और थकान को दूर करने के लिए यह योगासन फायदेमंद है।
- जो लोग चिंता, एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याओं के शिकार हैं, उन्हें इसका अभ्यास प्रतिदिन करना चाहिए।
स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए नियमित करें ये 4 आसन
- शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है, जिससे शरीर के सभी हिस्सों में रक्त पहुंचता है।
- स्पाइनल कॉर्ड मजबूत करता है।
- हाथों और पैरों की स्थिरता को बढ़ाता है।
- पेट की मांसपेशियों में खिंचाव उत्पन्न होता है, जिससे ये मजबूत तो होती ही हैं साथ ही पेट से संबंधित विकार भी दूर हो जाते हैं।
किन्हें करने से बचना चाहिए
- पीठ, कमर, कंधों और भुजाओं में चोट लगी होने पर न करें।
- प्रेगनेंसी में न करें।
- कार्पल टनल सिंड्रोम (carpal tunnel syndrome) से पीड़ित हैं तो करने से बचें।
- उच्च रक्तचाप की समस्या, आंखों में संक्रमण, कान के अंदर संक्रमण हो तो इसका अभ्यास न करें।
- डायरिया है या आंखों की रेटिना में परेशानी है तो इसे न करें।