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Medically Verified By: Dr. Smriti Jhunjhunwala
Jodo Mai Dard Kyu Hota Hai: आजकल हम सभी का लाइफस्टाइल इतना बदल गया है कि हर उम्र का व्यक्ति शारीरिक रूप से कमजोर हो रहा है। खासकर अगर हम 45 से कम उम्र की महिलाओं की बात करें तो उनमें जोड़ों के दर्द की समस्या अधिक देखने को मिल रही है। वैसे तो यह आम समस्या है लेकिन यह पहले 50 की उम्र के बाद हुआ करती थी, लेकिन अब युवा महिलाएं भी इसकी चपेट में आ गई हैं। ऐसे में अगर समय रहते इसे ठीक नहीं किया गया तो परेशानी बढ़ सकती है।
इसके पीछे कई कारण हैं जो हमारी रोजमर्रा के लाइफस्टाइल से जुड़े हुए हैं। वो कौन से कारण हैं, इसके बारे में जानने के लिए हमने होम्योपैथी डॉक्टर स्मृति झुनझुनवाला से बात की। तो आज हम आपको इस लेख में कम उम्र में जॉइंट पेन की समस्या पैदा होने के कारणों और उन्हें ठीक करने के तरीकों के बारे में बताने वाले हैं। आइए, समझते हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है और इस परेशानी से छुटकारा पाने के लिए हम क्या कर सकते हैं।
आजकल 9 घंटे ऑफिस में काम की वजह से और थोड़ा मोबाइल और लैपटॉप पर ज्यादा समय बिताने के कारण महिलाएं लंबे समय तक बैठी रहती हैं। ऐसे में बॉडी में अकड़न के साथ स्ट्रेस और जोड़ों में दर्द पैदा हो सकता है, खासकर कमर और घुटनों पर। यही कारण है कि 45 से कम उम्र की महिलाओं में जॉइंट पेन बढ़ रहा है।
45 तक की उम्र वाली ज्यादातर महिलाएं कामकाजी हैं, ऐसे में वह वर्क प्रेशर के चलने न ही सही से खाना खा पाती है और न ही सो पाती हैं। जब शरीर को सही से पोषण नहीं मिलता है जो अंग दुखने लगते हैं और फिर जॉइंट पेन शुरू हो जाता है। इसके अलावा वह तनाव या काम के चलते चाय-कॉफी यानी कैफीन का भी ज्यादा मात्रा में सेवन कर रही हैं। बता दें कि कैफीन ज्यादा होने से यह शरीर में कैल्शियम को ठीक से अब्सॉर्ब होने से रोक सकती है, जो हड्डियों और जोड़ों के लिए बहुत जरूरी है। साथ ही हम सही से खाना नहीं खा रहे हैं तो यह दो कॉम्बिनेशन जॉइंट पेन का कारण बन रहे हैं।
इसमें कोई दो राय नहीं है कि हड्डियां विटामिन डी की कमी से कमजोरी होती हैं। एक तो आजकल बहुत ही ज्यादा पॉल्यूशन है कि धूप में बैठने पर सांसों के जरिए हमारे शरीर में बस धूल ही जा रही है। दूसरा ऑफिस में बैठी महिलाओं को धूप सेकने का समय भी नहीं मिल पाता है। जब शरीर में विटामिन डी नहीं होगा तो कैल्शियम कैसे अब्सॉर्ब होगा, और यह स्थित हड्डियों की कमजोरी व जोड़ों में दर्द पैदा करेगी।
जब हम बहुत ही ज्यादा स्ट्रेस लेते हैं तो इसका सीधा असर हमारे शरीर, त्वचा और यहां तक कि बालों पर भी दिखने लगता है। जी हां, स्ट्रेस लेने से बाल झड़ते हैं, त्वचा डल हो जाती है और शरीर में दर्द होना शुरू हो जाता है। तनाव शरीर में ऐसे हार्मोन कोर्टिसोल रिलीज करता है, जो लंबे समय तक बने रहने पर शरीर में सूजन को बढ़ा देता है और जोड़ों के दर्द का कारण बनता है।
कई बार हमारा शरीर हमें चीख-चीख कर कहता है कि वह कमजोर हो रहा है या शरीर में कोई गड़बड़ी चल रही है। ऐसा बिल्कुल नहीं है कि हमें अचानक ही जोड़ों का दर्द शुरू हो जाता है। यह अक्सर कम एनर्जी, जल्दी थकना या थकावट महसूस करना और सुस्ती जैसे छोटे-छोटे लक्षणों से शुरू होता है। घर व बाहर दोनों जगह काम करती महिलाएं इन्हें 'आज कुछ ज्यादा ही काम कर लिया' कहकर नजरअंदाज कर देती हैं, लेकिन आगे चलकर यह जोड़ों में गंभीर दर्द की समस्या बन जाता है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
रूमेटाइड अर्थराइटिस जोड़ों को प्रभावित करने वाली एक क्रोनिक डिजीज है, जो गठिया का ही एक प्रकार है। यह एक ऑटोइम्यून डिजीज है और इसलिए इसका कोई अब तक जड़ से इलाज नहीं मिल पाया है।
जिन लोगों को अक्सर जोड़ों का दर्द रहता है, उन्हें अपनी डाइट में ऐसा खाना शामिल करना चाहिए जिसमें ज्यादा प्रोटीन और कैल्शियम पाया जाता है।
जोड़ों के दर्द के दौरान हल्की एक्सरसाइज करना जरूरी होता है, जिससे ज्यादा जकड़न नहीं हो पाती है।
जोड़ों में दर्द के पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे कमजोरी, शरीर का वजन ज्यादा होना, गठिया और हड्डियों की कमजोरी आदि।