Safe Motherhood: प्रेग्नेंसी से लेकर डिलीवरी तक महिलाओं को जरूर जाननी चाहिए ये 9 बातें
Safe Motherhood: प्रेग्नेंसी से लेकर डिलीवरी तक महिलाओं को जरूर जाननी चाहिए ये 9 बातें
डॉ. सुनीता चौहान बताती हैं कि हेल्दी प्रेग्नेंसी न केवल मां के लिए, बल्कि बच्चे के भविष्य के लिए भी बेहद अहम होती है। प्रेग्नेंसी के 9 महीने बच्चे के शारीरिक, मानसिक और इम्यून सिस्टम की नींव रखते हैं।
Written By:
Ashu Kumar Das
| Published : January 23, 2026 3:39 PM IST
Pregnancy to Delivery Every women Deserves to Know these health things: हर महिला के लिए मातृत्व (Motherhood) जीवन का सबसे सुंदर लेकिन सेंसिटिव चरण होता है। प्रेग्नेंसी के दौरान महिला के शरीर, मन और जीवनशैली में बड़े बदलाव आते हैं। ऐसे में Safe Motherhood यानी सुरक्षित मातृत्व का महत्व और भी बढ़ जाता है। सुरक्षित मातृत्व का मतलब सिर्फ सुरक्षित डिलीवरी नहीं, बल्कि स्वस्थ गर्भावस्था, स्वस्थ मां और स्वस्थ शिशु से है।
मध्यप्रदेश के इंदौर स्थित कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल की ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. सुनीता चौहान का कहना है कि आज भी भारत में कई प्रेग्नेंट महिलाएं सही जानकारी, समय पर जांच और पोषण की कमी के कारण जटिलताओं का सामना करती हैं। इसलिए प्रेग्नेंसी से लेकर डिलीवरी तक हर महिला को 10 बातों के बारे में पता होना चाहिए।
Healthy Pregnancy क्यों जरूरी है?
डॉ. सुनीता चौहान बताती हैं कि हेल्दी प्रेग्नेंसी न केवल मां के लिए, बल्कि बच्चे के भविष्य के लिए भी बेहद अहम होती है। प्रेग्नेंसी के 9 महीने बच्चे के शारीरिक, मानसिक और इम्यून सिस्टम की नींव रखते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली मां के खानपान, जीवनशैली और एक्सरसाइज का पूरी तरह से ध्यान रखा जाए, तो इससे भविष्य में शिशु की सेहत को सही रखने में मदद मिलती है। हेल्दी प्रेग्नेंसी से प्रीमैच्योर डिलीवरी से बचाव होता है। डिलीवरी के बाद बच्चे का वजन सामान्य रहता है। इसके साथ ही मां और बच्चे दोनों को ही एनीमिया, हाई BP, डायबिटीज जैसी समस्याएं कम होती हैं।
प्रेग्नेंसी से लेकर डिलीवरी तक महिलाओं के लिए 10 जरूरी बातें
पहला चेकअप है जरूरी- डॉ. सुनीता चौहान का कहना है कि जैसे ही प्रेग्नेंसी टेस्ट पॉजिटिव हो, तुरंत गायनेकोलॉजिस्ट से मिलें। पहला चेकअप बहुत जरूरी होता है, क्योंकि इसी में डॉक्टर आपकी हेल्थ हिस्ट्री, BP, वजन, ब्लड टेस्ट और जरूरी सलाह तय करते हैं। पहले चेकअप के बाद जैसे ही आपको फोलिड एसिड की गोलियां दें, उसे तुरंत खाना शुरू कर दें। आपके और गर्भ में पलने वाले बच्चे के लिए फोलिक एसिड क्यों जरूरी है, इसके बारे में डॉक्टर से पूछताछ जरूर करें।
शुरुआती 3 महीने हैं संवेदनशील- प्रेग्नेंसी के पहले 12 हफ्ते में बच्चे के अंग बनना शुरू होते हैं। इस दौरान कुछ गलत आदतें (धूम्रपान, शराब, self-medication) बच्चे की ग्रोथ पर असर डाल सकती हैं। डॉक्टर कहती हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को बिना डॉक्टरी सलाह के दवा लेने से बचना चाहिए। शुरुआती स्टेज में भारी वजन उठाने, नींद और ज्यादा स्ट्रेस लेने से बचें।
सही डाइट- भारत में ज्यादातर महिलाएं सोचती हैं, हेल्दी प्रेग्नेंसी के लिए उन्हें 2 लोगों का खाना खाना चाहिए। लेकिन सिर्फ खाने की मात्रा नहीं बल्कि असल में गुणवत्ता (nutrition) ज्यादा जरूरी है। प्रेग्नेंट महिलाओं को दूध/दही/पनीर (Calcium), दाल, चना, सोया, अंडा (Protein), हरी सब्जियां (Iron + folate) जैसी चीजें खानी चाहिए। मां और शिशु दोनों को किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या न हो, इसके लिए महिलाओं को जंक फूड, ज्यादा मीठा खाने से परहेज करना चाहिए।
सप्लीमेंट जरूरी हैं- प्रेग्नेंसी में खून की कमी (Anemia) बहुत आम है। डॉक्टर अक्सर आयरन, फोलिक एसिड और कैल्शियम देते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान दिए जाने वाले सप्लीमेंट को सही समय पर लेना बहुत जरूरी होता है। डॉक्टर का कहना है कि प्रेग्नेंट महिलाओं को आयरन और कैल्शियम को एक साथ नहीं लेना चाहिए। आयरन सप्लीमेंट के साथ विटामिन सी युक्त फूड्स को खाने का हिस्सा बनाना चाहिए।
टेस्ट और अल्ट्रासाउंड जरूरी है- प्रेग्नेंसी के दौरान सही समय पर विभिन्न प्रकार के टेस्ट करवाने से बच्चा और मां दोनों की स्थिति का पता चलता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह पर प्रेग्नेंट महिलाओं को समय पर ब्लड ग्रुप टेस्ट, एचबी, शुगर, थायराइड प्रोफाइल, यूरिन टेस्ट जरूर करवाना चाहिए।
वजन का बढ़ना- आमतौर प्रेग्नेंसी के दौरान 10 से 12 किलो वजन बढ़ना सामान्य बात मानी जाती है। लेकिन जरूरत से ज्यादा वजन मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है। प्रेग्नेंसीमें जरूरत से ज्यादा वजन बढ़ने से हाई ब्लड प्रेशर, डिलीवरी में परेशानी, हाई शुगर की परेशानी हो सकती है।
योग और एक्सरसाइज है जरूरी- डॉक्टर कहती हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान ज्यादातर महिलाएं खुद को बीमार मान लेती हैं और किसी भी प्रकार की फिजिकल एक्टिविटी करने से बचती हैं। पर ऐसा करना बिल्कुल गलत है। प्रेग्नेंसी कोई बीमारी नहीं है जब आप पूरा दिन सोए ही रहेंगी। प्रेग्नेंसी को हेल्दी रखने के लिए दिन में एक बार 30 मिनट वॉक और एक्सरसाइज जरूरी है। जो महिलाएं वॉक या एक्सरसाइज नहीं कर सकती हैं, वो योग और प्राणायाम का विकल्प अपना सकती हैं।
डिलीवरी के लिए तैयारी- प्रेग्नेंसी के बाद डिलीवरी के समय महिलाएं मानसिक तौर घर पर घबरा जाती हैं। इसलिए प्रेग्नेंसी के 8वें महीने में ही डिलीवरी की तैयारी करना जरूरी है। डॉक्टर प्रेग्नेंसी के 8वें महीने में हॉस्पिटल बैग तैयार करने की सलाह देती हैं। अपने हॉस्पिटल बैग में सभी रिपोर्ट/ID, कपड़े, सैनिटरी पैड, बेबी कपड़े, डायपर, चार्जर, पानी की बोतल जरूर रखें। इसके अलावा आपकी डिलीवरी किस हॉस्पिटल में किस डॉक्टर के पास होगी। डिलीवरी के समय अगर ब्लड की जरूरत पड़ेगी तो डोनर कौन होगा, इसके बारे में भी पहले से तैयारी कर लें।
आराम है जरूरी- भारतीय घरों में आज भी दादी-नानी महिलाओं को डिलीवरी के बाद सिर्फ 40 से 45 दिन ही आराम करने देते हैं। इस समय सीमा के बाद महिलाओं को रेगुलर काम पर लगाया जाता है। लेकिन हर महिला के साथ ऐसा नहीं होता है। डिलीवरी के बाद मां का शरीर दोबारा तैयार होने के लिए कितना समय लगेगा, ये डिलीवरी के प्रकार, डिलीवरी के बाद महिला का ध्यान कैसे रखा गया है, इस बात पर निर्भर करता है। डिलीवरी के बाद आपको तुरंत काम के लिए बोला जाता है, तो आप मना कर सकती हैं। डिलीवरी के बाद पहले आपको और अपने बच्चे के आराम के बारे में सोचना हैं।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.