कैंसर ट्रीटमेंट के दौरान गर्भधारण करना सेफ है, कहीं बाद में फर्टिलिटी खत्म हो गई तो?

Kya Cancer ke Bad Aap ma Ban Sakti Hai: किसी महिला के जीवन को कैंसर कई अलग-अलग तरीके से प्रभावित कर सकता है और उमें से एक है उसके मां बनने का सपना टूटना। आज हम इस लेख में इसी बारे में बात करेंगे।

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Written By: Mukesh Sharma | Updated : February 4, 2026 5:11 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Priya Gupta

Can You Get Pregnant After Cancer Treatment: कैंसर का अगर समय रहते इलाज शुरू न किया जाए या फिर अगर सही इलाज न हो पाए तो यह जानलेवा बन जाता है। लेकिन इस बारे में हम कम बात करते हैं कि कैंसर की तरह कैंसर का ट्रीटमेंट भी मरीज के जीवन को पूरी तरह से प्रभावित हो जाता है। कैंसर आज के समय में आम बीमारी बनती जा रही है, हर किसी को इस बारे में पता है इंटरनेट पर लोग आसानी से पढ़ रहे हैं। लेकिन आज हम महिलाओं के दृष्टिकोण से बात करेंगे और कैंसर की उस डार्क साइड के बारे में बात करेंगे जो महिलाओं को ज्यादा प्रभावित करेंगे। एक समय आता है जब मां बनना ही हर महिला का सपना होता है, लेकिन अगर दुर्भाग्यपूर्ण वे कैंसर जैसी किसी जानलेवा बीमारी की चपेट में आ जाती हैं तो उन्हें अपना यह सपना टूटने का डर भी रहने लगता है। अगर किसी महिला को कैंसर है, तो कहीं न कहीं उसके मन में यह सवाल जरूर होगा कि कहीं कैंसर के बाद उसकी मां बनने की क्षमता खत्म न हो जाए। आज हम इस बारे में ही बात करेंगे और जयपुर के कोकून हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट, ऑब्सट्रेटिक्स एंड गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. प्रिया गुप्ता द्वारा इस इस मामले पर बताई गई कुछ खास जानकारियों के बारे में पढ़ेंगे

महिला के जीवन पर कैंसर का प्रभाव

अनुसार कैंसर के दौरान हर व्यक्ति के मन में अपने सवाल उठते हैं। खासकर उन महिलाओं के लिए जो मां बनने की सोच रही हों, फर्टिलिटी यानी प्रजनन क्षमता और प्रेगनेंसी को लेकर चिंता सबसे ज्यादा होती है। लेकिन अब मेडिकल साइंस में इतनी प्रगति हो गई है कि कैंसर का इलाज खत्म होने के बाद भी प्रेगनेंसी संभव है। अगर इलाज के दौरान विशेषज्ञ डॉक्टर की निगरानी में रहें, तो प्रेगनेंसी सुरक्षित भी हो सकती है। कैंसर से जुड़ी महिलाओं के लिए जरूरी है कि वे संभावित जोखिम और उपलब्ध विकल्पों की जानकारी रखें, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ अपने भविष्य की योजना बना सकें। आज के इस लेख में हम इसे आसान और विस्तार से समझेंगे।

कैंसर ट्रीटमेंट के बाद प्रेगनेंसी

कैंसर और कैंसर के इलाज का प्रभाव हर व्यक्ति के शरीर, उसके स्वास्थ्य, कैंसर की गंभीरता और व्यक्ति के मानसिक हौसले के आधार पर अलग-अलग होता है। कैंसर सर्वाइवर्स के लिए इलाज खत्म होने के बाद प्रेगनेंसी न केवल संभव है, बल्कि आमतौर पर सुरक्षित भी मानी जाती है। कैंसर के ट्रीटमेंट में समय के साथ-साथ कई सुधार हुए हैं, जिसमें ये ट्रीटमेंट न सिर्फ और ज्यादा प्रभावी हुए हैं बल्कि साथ ही साथ शरीर पर इनका साइड इफेक्ट भी कम हुआ है। कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी और अन्य कई एडवांस तकनीक के ट्रीटमेंट हैं, जिनके इस्तेमाल के दौरान भी महिलाओं की प्रजनन क्षमता बनी रहती है।

अगर कोई महिला जिसका हाल ही में कैंसर ट्रीटमेंट हुआ है और वह कंसीव करने का सोच रही है, तो उसे अपने स्वास्थ्य की ठीक से जांच करानी चाहिए। ताकि आने वाले समय में उसे या उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को किसी भी तरह की समस्या न हो पाए। क्योंकि गर्भावस्था शरीर की एक बेहद नाजुक अवस्था होती है, न कि कोई बीमारी। इस दौरान महिला पर्याप्त पोषण भी चाहिए होगा और साथ ही साथ मानसिक रूप से भी उसका सही रहना बहुत जरूरी है।

स्वास्थ्य का सही होना भी जरूरी है

जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया है कि कैंसर और उसके ट्रीटमेंट का शरीर पर प्रभाव कैसा होगा वह अलग-अलग व्यक्ति पर निर्भर करता है। प्रेगनेंसी की संभावना भी कुछ बातों पर निर्भर करती है, जैसे कैंसर का प्रकार, उम्र और इलाज का तरीका। हालांकि, कुछ प्रकार के कैंसर ट्रीटमेंट ओवरीज को प्रभावित कर सकते हैं या अंडों की संख्या कम कर सकते हैं, जिससे गर्भधारण में मुश्किल आ सकती है। फिर भी, कई महिलाएं कैंसर को काबू में करने के बाद प्राकृतिक रूप से या डॉक्टर की मदद से सफलतापूर्वक गर्भवती होती हैं। डॉक्टर अक्सर इलाज खत्म होने के बाद कुछ समय इंतजार करने की सलाह देते हैं, ताकि शरीर पूरी तरह स्वस्थ हो और इलाज के बचा हुआ असर कम हो।

इसलिए जो भी कैंसर सर्वाइवर महिलाएं गर्भधारण करना चाहती हैं और कैंसर से हिचकिचा रही हैं तो उन्हें सिर्फ कैंसर पर अपना सारा ध्यान नहीं लगाना चाहिए। साथ ही साथ उन्हें अपनी स्वास्थ्य क्षमता का पता भी लगाना पड़ेगा। कीमोथेरेपी से शरीर कमजोर पड़ सकता है और गर्भधारण भी शरीर को नाजुक व संवेदनशील बनता है, तो महिला को भी यह सोचना होगा कि क्या उसका शरीर दोनों परिस्थितियों को एक साथ संभालने के लिए तैयार है? इसलिए सबसे पहले यह सवाल आपको करना होगा कि आप मानसिक और शारीरिक रूप से इस चीज के लिए तैयार हैं या नहीं।

प्रेगनेंसी से दोबारा कैंसर का खतरा?

बहुत सी कैंसर सर्वाइवर महिलाएं तो कई बार इस डर से भी गर्भधारण नहीं करती हैं, कि कहीं प्रेगनेंसी से कैंसर का खतरा फिर से न बढ़ जाए। लेकिन मेडिकल रिसर्चों में यह पाया गया हैकि कैंसर के बाद प्रेगनेंसी से दोबारा कैंसर होने का खतरा नहीं बढ़ता है। सही मेडिकल गाइडेंस में, कैंसर सर्वाइवर्स भी हेल्दी प्रेगनेंसी और सुरक्षित चाइल्डबर्थ का अनुभव कर सकती हैं।

कैंसर और गर्भावस्था वैसे तो दोनों पूरी तरह से अलग-अलग कंडीशन है, लेकिन हमारे शरीर का बायोलॉजिकल सिस्टम यानी हमारे शरीर की संरचना और उसके काम करने की प्रक्रिया बेहद जटिल होती है। इसलिए कुछ रिसर्च यह भी कहती हैं कि कुछ अलग-अलग पहलुओं पर कैंसर और प्रेगनेंसी एक दूसरे से जुड़े हुए पाते हैं और इनमें से कुछ रिसर्चों के बारे में हम आपको नीचे बताने वाले हैं -

नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट, की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग कुछ हद तक ब्रेस्ट कैंसर, एंडोमेट्रियल कैंसर और ओवेरियन कैंसर आदि का खतरा बढ़ा सकता है। रिपोर्ट में बताया गया कि ऐसा आमतौर पर कुछ अलग-अलग पहलुओं के आधार पर होता है जैसे -

  • 30 की उम्र के बाद गर्भधारण करना
  • लंबे समय तक ब्रेस्टफीडिंग करना
  • प्रेगनेंसी के दौरान कुछ हार्मोन दवाएं लेना (Diethylstilbestrol)

अमेरिकन कैंसर सोसायटी द्वारा पब्लिश की गई एक रिपोर्ट के अनुसार उसमें यह सरल शब्दों में कहा गया है कि प्रेगनेंसी के दौरान कैंसर डायग्नोस होना दुर्लभ है, लेकिन यह पूरी तरह से संभव है। प्रेग्नेंसी के दौरान आमतौर पर ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, थायराइड कैंसर, कोलन कैंसर और ओवेरियन कैंसर है।

कैंसर ट्रीटमेंट के दौरान प्रेगनेंसी

यह भी एक अच्छा सवाल है, जो कैंसर ट्रीटमेंट के बाद प्रेग्नेंट होने से पूरी तरह से अलग है। कुछ महिलाओं के मन में यह सवाल आता भी है, कि कैंसर ट्रीटमेंट के दौरान गर्भधारण किया जा सकता है या नहीं। दरअसल, इसे हमें अलग-अलग पहलुओं के आधार पर समझेंगे।

  • पहले से ही प्रेग्नेंट होना - कुछ मामलों में ऐसा भी होता है कि महिला पहले से प्रेग्नेंट होती है और उसी दौरान कैंसर का पता चलता है, या प्रेगनेंसी के शुरुआती समय में इलाज शुरू करना पड़ जाता है। प्रेगनेंसी के दौरान कैंसर का इलाज करना एक जटिल प्रक्रिया होती है, जिसमें कई विशेषज्ञ डॉक्टरों की संयुक्त टीम काम करती है। इसमें ऑन्कोलॉजिस्ट, ऑब्सटेट्रिशियन और नोनटोलॉजिस्ट शामिल होते हैं, ताकि मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य का संतुलन बना रहे।
प्रेगनेंसी के दूसरे और तीसरे चरण में कुछ कैंसर उपचार सुरक्षित रूप से दिए जा सकते हैं, लेकिन शुरुआती चरण में रेडिएशन और कुछ कीमोथेरेपी दवाएं बच्चे के लिए जोखिम भरी हो सकती हैं। इसलिए इलाज की योजना बहुत सोच-समझकर तैयार की जाती है, ताकि कैंसर का प्रभावी उपचार भी हो और बच्चे को नुकसान भी कम से कम पहुंचे। ऐसे हालात में भी कई महिलाएं स्वस्थ बच्चों को जन्म देती हैं और साथ ही कैंसर का सफल इलाज भी करवा पाती हैं।

  • बाद में प्रेग्नेंट होना - यह पूरी तरह से एक अलग केस बनता है और यह कितना सुरक्षित है और कितना नहीं यह पूरी तरह से डॉक्टर मरीज के स्वास्थ्य की जांच करके बता सकते हैं। मरीज की स्वास्थ्य क्षमता को देखते हुए डॉक्टर कैंसर ट्रीटमेंट के दौरान ही प्रेग्नेंट होने की सलाह दे सकते हैं, जबकि ऐसा डॉक्टर सिर्फ तभी करते हैं जब किसी कारण से उस महिला का जल्द से जल्द प्रेग्नेंट होना जरूरी हो।
हालांकि, जिसमें महिला कैंसर के ट्रीटमेंट के दौरान ही गर्भधारण करने की कोशिश कर रही होती है, ऐसे ज्यादातर मामलों में डॉक्टर महिला को उस समय गर्भधारण करने की सलाह नहीं देते हैं। क्योंकि इससे न सिर्फ मां के लिए जटिलताएं बढ़ सकती हैं साथ ही साथ उस समय गर्भ में पलने वाले बच्चे के स्वास्थ्य पर भी कीमोथेरेपी व अन्य कैंसर ट्रीटमेंट का गंभीर असर पड़ सकता है।

गर्भावस्था किसी भी महिला के शरीर के लिए एक बेहद संवेदनशील स्थिति होती है, जिसमें उसका शरीर काफी नाजुक हो जाता है। दूसरी तरफ कैंसर ट्रीटमेंट जैसे कीमोथेरेपी आदि का असर शरीर पर काफी गंभीर रूप से पड़ सकता है। हालांकि, इसका असर कुछ हद तक स्वास्थ्य क्षमता के आधार पर होता है और ऐसा माना जाता है कि जिन लोगों को स्वास्थ्य कमजोर होता है कीमोथेरेपी का प्रभाव ज्यादा उन्हीं पर पड़ता है।

ऐसे में हम अच्छे से जानते हैं कि प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं का शरीर नाजुक हो जाता है और उनका स्वास्थ्य कमजोर पड़ जाता है। इससे कीमोथेरेपी व अन्य कैंसर ट्रीटमेंट का उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। कैंसर से लड़ रही जो भी महिलाएं गर्भवती होना चाहती हैं, तो कंसीव करने की कोशिश करने से पहले ही एक बार डॉक्टर से इस बारे में अच्छे से सलाह लें। अगर डॉक्टर आपको इस दौरान गर्भधारण की अनुमति देते हैं, तो उनके द्वारा दिए गए सभी सुझाव व दिशा निर्देश अच्छे से सुनें ताकि इस दौरान जितना हो सके जटिलताएं होने का खतरा कम रहे।

इलाज से पहले फर्टिलिटी को सुरक्षित रखने के विकल्प

ज्यादातर महिलाएं इस बारे में सोच नहीं पाती हैं, लेकिन यह कैंसर से जूझ रही उस महिला के लिए सबसे जरूरी और सबसे सुरक्षित विकल्प है जो भविष्य में मां बनना चाहती है यानी अपनी फर्टिलिटी को बनाए रखना चाहती है। अगर किसी महिला में कैंसर डायग्नोस हुआ है और गर्भधारण करना चाहती है, तो कैंसर के इलाज से पहले फर्टिलिटी को सुरक्षित रखने के लिए अब कई बेहतर विकल्प उपलब्ध हैं, जिन्हें कैंसर केयर में एक अहम प्रगति माना जा रहा है। इलाज शुरू होने से पहले एग फ्रीजिंग, एम्ब्रियो फ्रीजिंग और ओवरीयन टिश्यू को सुरक्षित रखने जैसी तकनीकों की मदद से भविष्य में प्रेगनेंसी की संभावना को बचाया जा सकता है।

ये विकल्प खास तौर पर उन महिलाओं के लिए फायदेमंद होते हैं, जो कैंसर ट्रीटमेंट के बाद बेबी प्लान करने का सोच रही हैं। इससे न सिर्फ उन्हें इलाज से जुड़ा व्यावहारिक समाधान मिलता है, बल्कि मानसिक रूप से भी भरोसा मिलता है कि कैंसर डायग्नोसिस के बावजूद भी मां बनने का सपना पूरा किया जा सकता है। सही जानकारी, अनुभवी डॉक्टरों और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ महिलाएं कैंसर के बाद भी सुरक्षित और स्वस्थ प्रेगनेंसी की ओर आगे बढ़ सकती हैं।

अगर आप किसी भी ऐसी महिला को जानते हैं जो कैंसर से जूझ रही है और उसे भविष्य में वह बेबी प्लान करने का सोच रही है। उन्हें आप निम्न तकनीकों के बारे में कुछ खास जानकारी दे सकते हैं -

  1. एग फ्रीजिंग - यह महिलाओं की फर्टिलिटी को बचाने के लिए एक खास तकनीक है, जिन्हें आमतौर पर वे महिलाएं अपनाती हैं जिन्हें 30 के बाद गर्भधारण करना है। इस तकनीक में महिला के शरीर से अंडे निकाल कर उन्हें फ्रीज कर दिया जाता है, ताकि फ्यूचर में जब वह मां बनना चाहे तो उन अंडों का इस्तेमाल किया जा सके।
  2. एम्ब्रियो फ्रीजिंग - यह भी फर्टिलिटी प्रिजरवेशन की ही एक तकनीक है, जो आमतौर पर एग फ्रीजिंग से ज्यादा प्रभावी मानी जाती है। इस तकनीक में पहले से ही फर्टिलाइज हुए भ्रूण यानी एम्ब्रियो को अत्यंत ठंडे तापमान में प्रिजर्व किया जाता है। इसमें प्रेगनेंसी फ्यूचर प्रेगनेंसी के चांस ज्यादा इसलिए होते हैं क्योंकि भ्रूण पहले ही फर्टिलाइज हो चुका होता है।
  3. ओवेरियन टिशू - इस तकनीक में ओवेरियन टिश्यूज के टुकड़े को फ्रीज करके प्रिजर्व किया जाता है। दरअसल, यह ओवरी की बाहरी परत है, जिसमें अंडे होते हैं और यह परत हार्मोन भी जारी करती है। इसलिए इस परत के टुकड़े को भविष्य के लिए अत्यंत ठंडे तापमान में फ्रीज कर दिया जाता है।

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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