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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : August 6, 2019 5:00 PM IST
हेल्दी डाइट की बात जब आती है तो ब्राउन राइस की बात जरूर आती है. क्योंकि सफेद चावल में ज्यादा कार्बोहाइड्रेड पाया जाता है. ब्राउन राइस के फायदे और न्यूट्रिशन (Brown Rice Nutrition) के बारे में हर कोई जानना चाहता है. क्योंकि सफेद चावल की तुलना में ब्राउन राइस ज्यादा फायदेमंद होता है. भारत में चावल खाने के शौकिन डायबिटीज, मोटापा होने के बाद भी चावल खाने को तरसते रहते हैं. कुछ लोगों का तो बिना चावल के पेट ही नहीं भरता है. चावल को लेकर भारत में कई तरह की पसंद है. कुछ लोगों को सफेद चावल पसंद है तो कुछ लोगों को आर्गेनिक चावल पसंद है. हाल के वर्षों में ब्राउन राइस के फायदे और न्यूट्रिशन (Brown Rice benefits) के बारे में बात कुछ ज्यादा होने लगी है.
दुनिया भर में चावल के 40 से भी अधिक प्रकार मौजूद हैं. लेकिन भारत में बासमती सबसे बड़ा नाम माना जाता है. जब हम ब्राउन राइस की बात करते हैं तो यह चावल के किसी नाम की नहीं बल्कि उसे बनाने में किये गये प्रयोग के कारण पैदा चावल की बात करते हैं. ब्राउन राइस बासमती का भी हो सकता है.
संतुलित भोजन में चावल का अपना एक स्थान है. अगर सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस का सेवन किया जाए तो कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं. जब हम ब्राउन राइस के फायदे और न्यूट्रिशन (Brown Rice health benefits ) की जानकारी ले रहे हैं तो इसके बारे में जरा विस्तार से यहां पर जानने की कोशिश करेंगे.
सबसे पहली बात तो यह कि यह कोई अलग प्रकार का चावल नहीं है. धान से चावल बनाते समय उसकी परत को पूरा न निकालकर भूरे भाग को बचाकर जो चावल बनता है उसे ही ब्राउन राइस कहा जाता है.
इसके अलावा चावल को सफेद और चमकदार करने के लिए पालिस भी की जाती है, जो कि ब्राउन राइस में नहीं की जाती है. आसान शब्दों में कहें तो कम प्रोसेस्ड चावल ही ब्राउन राइस है.
सफेद चावल की तुलना में इसमें फाइबर और पोषक तत्व की मात्रा बहुत अधिक होती है. यह पचने में आसान होने के साथ शरीर को ज्यादा पोषण देने में समर्थ होता है.
Brown Rice Nutrition Facts: सामान्य चावल की तुलना में ब्राउन राइस ज्यादा हेल्दी अपने पोषक तत्वों के कारण ही होता है. अगर हम भूरे चावल में पायी जाने वाली कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट की बात करें तो दोनों ही सफेद चावल की तुलना में अधिक होती है. इसके अलावा ब्राउन राइस में फाइबर की मात्रा सफेद चावल की तुलना में बहुत अधिक होती है.
कैलोरी : 216 Cal
कार्ब्स : 44 Gm
फाइबर : 3.5 Gm
फैट : 1.8 Gm
प्रोटीन : 5 Gm
इसक अलावा ब्राउन राइस में पोटेशियम, कैल्शियम और फोलेट की मात्रा पायी जाती है. इस चावल में मेटाबॉलिक रेट तेज करने का गुण भी पाया जाता है जो वजन कम करने में मददगार होता है.
वजन घटाने की बात जैसे ही आती है तो डाइट से सबसे पहले चावल को ही हटाया जाता है. क्योंकि चावल में कार्ब की मात्रा बहुत अधिक होती है. लेकिन ब्राउन राइस में कार्बोहाइड्रेट के साथ फाइबर भी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है. सफेद चावल की तुलना में ब्राउन राइस में तीन गुना अधिक फाइबर पाया जाता है.
वजन कम करने वाली डाइट की खास बात होती है कि उसमें फाइबर और प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होनी चाहिए. अब अगर आप फाइबर डाइट में जो चीजें ले रहे हैं उनकी जगह ब्राउन राइस को (Brown Rice Weight Loss) भी शामिल कर सकते हैं.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ब्राउन राइस एक होल ग्रेंस फूड है. अर्थात यह बहुत कम प्रोसेस्ड हुआ रहता है. कई शोध में इस बात का पता चला है कि होल ग्रेंस खाने से वजन तेजी से कम होता है.
विश्व में जब डायबिटीज का खतरा बढ़ रहा है, तब ऐसी डाइट लेनी चाहिए जो ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने वाली हो. अगर खाने में ब्राउन राइस को शामिल किया जाता है डायबिटीज का खतरा कम होता है. क्योंकि इसमें पाये जाने वाले पोषक तत्व और फाइबर हेल्दी व बैलेंस डाइट के मानक को पूरा करने वाली होती है.
इसके बारे में डायबिटीज डॉक्टर्स का भी मानना है कि डायबिटीज रोगी भी भूरे चावल का सेवन कर सकते हैं. जैसा की हम सभी जानते हैं कि डायबिटीज रोगी को अपनी डाइट को बैलेंस तरीके से लेना चाहिए. उसका पालन इसके सेवन में भी करना होता है.
भूरे चावल में ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है. क्योंकि इसमें पाया जाने वाला कार्ब पचने के बाद ट्रांस फैट में नहीं बदलाता है. इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ने का डर भी नहीं रहता है.
जब हम हेल्दी डाइट या बैलेंस डाइट की बात करते हैं तो उसमें ऐसे तत्वों को ध्यान रखते हैं जो मांसपेशियों के निर्माण में भी भूमिका निभाते हो. इसमें पाये जाने वाले पोषक तत्व जैसे कि मैग्नीशियम और कैल्शियम मांसपेशियों का निर्माण करते हैं.
कैल्शियम की मात्रा डाइट में जरूरी होती है. हड्डियों की मजबूती के लिए डेली डाइट में कैल्शियम की मात्रा जरूरी होती है. इस लिहाज से भी ब्राउन राइस का सेवन सेहत के लिए अच्छा माना जाता है.
चावल के बारे में कई तरह के भ्रम होते हैं. कोई भी डाइट सीमा से अधिक सेवन करने से उसके साइड इफेक्ट भी होते हैं. इसी तरह ब्राउन राइस का सेवन भी जरूरत से अधिक नहीं करना चाहिए.
बाजार में उपलब्ध फेक ब्राउन राइस के भी बचना चाहिए. मद्रास डायबिटिक रिसर्च फाउंडेशन के अनुसार बाजार में उपलब्ध ज्यादातर ब्राउन राइस फेक हैं. चावल को ब्राउन बनाने के लिए उसे आधा उबालकर सुखाया जाता है. इस तरह के चावल ब्राउन राइस नहीं हैं.
आधे उबले चावल में ट्रांस फैट ज्यादा होता है और यह ब्लड शुगर लेवल को बढ़ाने का भी काम करता है. जब भी आप ब्राउन राइस डाइट में शामिल करें इन बातों का ध्यान जरूर रखें.