जीरो ग्रेविटी में बॉडी कैसे ​रिस्पांस करती है?

Sunita Williams Space Mission: एस्ट्रनॉट अपने मिशन को लेकर स्पेस में जाते रहते हैं। फिलहाल सुनीता विलियम्स लगभग 9 महीने से स्पेस में हैं और आज यानि कि 18 मार्च को उनकी धरती पर ​वापसी हो रही है। आइए जानते हैं जीरो ग्रेविटी में इंसान की बॉडी कैसे रिस्पांस करती है और क्या बदलाव आता है।

18 Mar, 2025

Himank

ब्रेन की तरफ बढ़ जाता है ब्लड फ्लो

क्योंकि धरती में ग्रेविटी है इसलिए यहां शरीर में खून सिर से पैरों की तरफ रहता है लेकिन स्पेस में ब्लड और बाकी का फ्लूइड सिर की ओर चला जाता है, जिससे चेहरा फूला हुआ दिखता है और नाक बंद रहती है। (Sunita Williams Latest News)

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रीढ़ की हड्डी भी लंबी हो जाती है

रीढ़ की हड्डी में बदलाव भी जीरो ग्रेविटी के कारण आता है। ऐसे में एस्ट्रोनॉट्स की रीढ़ की हड्डी की लंबाई 2-3 इंच तक बढ़ सकती है, हालांकि धरती पर वापस आने के बाद वो नॉर्मल हो जाती है।

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हार्ट का आकार भी बदल जाता है

स्पेस में रहने के दौरान हार्ट के साइज में भी बदलाव आता है। नॉर्मल इंसान के हार्ट का साइज अंडाकार होता है लेकिन स्पेस मेंर रह ने के दौरान वो गोल हो जाता है।

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Insomnia हो सकता है

स्पेस में रहने के चलते नींद बहुत प्रभावित होती है जिसके चलते इनसोम्निया की दिक्कत हो सकती है।

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आंखों की रोशनी

स्पेस में सिर की तरह फ्लूइड फ्लो बढ़ने से आंखों पर ज्यादा दबाव पड़ता है जिससे एस्ट्रोनॉट्स की आंखे कमजोर हो सकती है। धरती पर आने के बाद भी कुछ दिनों तक उन्हें धुंधला दिख सकता है।

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हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं

जब इंसान जीरो ग्रेविटी में रहता है तो मांसपेशियां और हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। इसलिए एस्ट्रोनॉट्स को रोज एक्सरसाइज़ करनी पड़ती है।

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इम्युनि सिस्टम भी हो जाता है कमजोर

लंबे समय तक जब एस्ट्रोनॉट जीरो ग्रेविटी में स्पेस में रहते हैं तो उनका इम्युन सिस्टम भी कमजोर हो जाता है।

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