
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Published : June 24, 2020 5:14 PM IST
World Vitiligo day 2020: विटिलिगो यानि सफेद दाग त्वचा संबंधी एक ऐसी समस्या है जिसे अक्सर लोग एक बीमारी समझ लेते हैं जबकि डॉक्टर्स की नजरों में ये सिर्फ एक कॉस्मेटिक समस्या है। विटिलिगो होने पर शरीर के अलग अलग हिस्सों में सफेद दाग या धब्बे दिखाई देते हैं। ये हाथ, पैर, होंठ, आंख, कान और पेट कहीं पर भी हो सकते हैं। कई बार छोटे छोटे सफेद दाग मिलकर एक बड़ा धब्बा बना लेते हैं। हालांकि यह कोई बीमारी नहीं है लेकिन फिर भी समाज में इसे लेकर कई तरह की भ्रांतियां फैली हैं। यह रोग किसी भी तरह से जान का खतरा नहीं बनता है। लेकिन यह सच है कि इसने होने से संबंधित व्यक्ति तनाव, डिप्रेशन और हीन भावना का शिकार हो जाता है।
सफेद दाग के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए हर साल 25 जून को वर्ल्ड विटिलिगो डे मनाया जाता है। आज इसी मौके पर हम आपको सफेद दाग के संदर्भ में समाज में फैली भ्रांतियां और उसके निवारण के तरीके बता रहे हैं।
मेडिकल भाषा में सफेद दाग को एक बीमारी नहीं बल्कि ऑटो-इम्यून डिसऑर्डर कहा जाता है। यह स्थिति तब होती है जब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) शरीर को ही प्रभावित करने लगती है। जिसके चलते स्किन के कुछ हिस्सों का रंग अचानक से बदलने लगता है। या यूं कह सकते हैं कि स्किन का रंग को सामान्य रखने वाली कोशिकाएं मेलानोसाइट धीरे धीरे मरने लगती हैं। मेडिकल भाषा में सफेद दाग को वीटिलिगो, ल्यूकोडर्मा, फुलेरी, श्वेत पात और कोढ़ भी कहा जाता है। बता दें कि शरीर में सफेद दाग दो तरह से होते हैं।
आपने भी कहीं न कहीं लोगों को यह अवश्य सुना होगा कि सफेद दाग छूने से फैलता है। जिन लोगों को सफेद दाग की समस्या होती है, सामान्य लोग उन्हें नहीं छूनें हैं और उनके साथ किसी तरह का आदान प्रदान करने से भी बचते हैं। लोगों को लगता है कि इन्हें छूने से उन्हें भी सफेद दाग की समस्या हो जाएगी। जबकि यह बिल्कुल गलत है।
लोगों के मन में यह धारणा बनी हुई है कि सफेद दाग उन्हीं बच्चों को होता है जिनके माता पिता में से कोई एक इसका शिकार हो। जबकि मेडिकल साइंस इस बात को सिरे से नकार चुकी है कि ऐसा नहीं है कि यह रोग पूरी तरह से जेनेटिक है। ऐसा केवल 10 प्रतिशत लोगों में पाया जा सकता है।
कुछ लोगों को सफेद दाग और सोरायसिस में कोई अंतर नहीं दिखता है। वहीं आपको बता दें कि सफेद दाग का लेप्रसी से भी कोई संबंध नहीं है। क्योंकि सोरायसिस के दाग पूरी तरह से अलग होते हैं। उनमें धब्बे होने पर सफेद रंग के बुरादे के रूप में डैंड्रफ सा दिखता है जबकि सफेद दाग में ऐसा नहीं होता है।
यह भी पूरी तरह से मिथ है। क्योकि सफेद दाग किसी भी तरह से कुष्ठ रोग नहीं है। आम लोगों को सफेद दाग से ग्रसित रोगी से घृणा करने के बजाय उन्हें अपनाना चाहिए और उन्हें मानसिक रूप से सुदृढ़ बनाना चाहिए।