How to Stop Suicidal Thoughts: अगर आपके मन में बार-बार ऐसा आ रहा है कि "अब मुझसे नहीं होगा", "सब खत्म कर दूं", या फिर जिंदगी बेमतलब लगने लगी है। तो रुकिए, सांस लीजिए। ये कोई कमजोरी नहीं है, बल्कि एक थके हुए दिमाग का S.O.S. सिग्नल है। इसका मतलब है कि आपका माइंड अब इमोशनल फर्स्ट एड मांग रहा है। बिल्कुल वैसे ही जैसे जले हुए हाथ पर मरहम लगाना जरूरी होता है।
डॉ. आस्तिक जोशी कहते हैं कि जब दिमाग इस हद तक थक जाता है, तो सबसे जरूरी है किसी भरोसेमंद इंसान से बात करना। कोई दोस्त, कोई फैमिली मेंबर, या कोई ऐसा इंसान जिससे आप खुलकर बात कर सकते हों। उन्हें बिना डरे बता दीजिए कि दिमाग में क्या चल रहा है। क्योंकि जब तक आप अंदर ही अंदर सब कुछ सोचते रहेंगे, वो सोच उलझती जाती है और और ज़्यादा भारी होती जाती है। बोलना पहला इलाज है।