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What is Perimenopause: अगर आपकी उम्र 35-40 के आसपास है और आपको लग रहा है कि शरीर में कुछ बदलाव हो रहे हैं- अचानक पसीना आ जाना, नींद डिस्टर्ब होना, पीरियड्स कभी टाइम, कभी मिस होना… तो हो सकता है आप ‘परिमेनोपॉज़’ के दौर से गुज़र रही हों। अब ये परिमेनोपॉज़ क्या बला है? ये असल में एक नैचुरल ट्रांज़िशन फेज़ है जो मेनोपॉज़ से पहले आता है। यानी वो वक्त जब शरीर धीरे-धीरे एस्ट्रोजन बनाना कम कर देता है और पीरियड्स बंद होने लगते हैं। ये फेज़ किसी को 40 में शुरू हो सकता है, किसी को 45 में और कई बार 30s में भी इसके लक्षण दिखने लगते हैं।
इस दौरान जो सबसे पहले बदलाव आता है वो है पीरियड्स का अनियमित होना। साथ में चिड़चिड़ापन, हॉट फ्लैशेस, अचानक पसीना, रातों में नींद उड़ जाना, और वजन बढ़ना, खासतौर पर पेट के आसपास। कई महिलाओं को बाल झड़ना, स्किन ड्राय होना, सेक्स के दौरान दर्द जैसी दिक्कतें भी होती हैं। और इन सबके साथ मानसिक असर भी होता है, मूड स्विंग्स, लो लिबिडो, याददाश्त कमज़ोर होना, ध्यान न लगना। अब सवाल ये आता है कि इस फेज़ में प्रेग्नेंसी हो सकती है या नहीं? तो जवाब है-हाँ।