अंतरिक्ष में पीरियड्स आने पर क्या करती हैं महिला एस्ट्रोनॉट्स?

स्पेस में पीरियड्स को लेकर कई सवाल उठते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह धरती की तरह ही नॉर्मल तरीके से होते हैं। माइक्रोग्रैविटी के बावजूद, शरीर का नैचुरल सिस्टम ब्लड को कंट्रोल में रखता है, जिससे कोई दिक्कत नहीं होती।

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Published by: Lakshmi Sharma | Published : March 28, 2025 5:53 PM IST

Astronauts Periods: क्या आपने कभी सोचा है कि अगर धरती पर पीरियड्स मैनेज करना इतना स्ट्रेसफुल है, तो स्पेस में यह कैसे होता होगा? जब नासा की एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स 9 महीने तक अंतरिक्ष में फंसी रहीं, तो उनके सामने और भी कई चैलेंज आए होंगे—लेकिन महिलाओं के दिमाग में एक सवाल जरूर आया होगा… स्पेस में पीरियड्स कैसे हैंडल किए जाते हैं?

अंतरिक्ष में पहली बार कोई महिला 1963 में गई थी—वेलेंटीना टेरेश्कोवा! तब से अब तक 99 और महिलाएं स्पेस में जा चुकी हैं। लेकिन तब ये सवाल उठता था कि माइक्रोग्रैविटी में पीरियड्स मैनेज करना मुश्किल होगा या नहीं? क्या ब्लड फ्लोट करेगा? क्या शरीर पर कोई असर पड़ेगा?

रिसर्च और एक्सपर्ट्स के मुताबिक, स्पेस में भी पीरियड्स बिल्कुल वैसे ही होते हैं जैसे धरती पर। शरीर के अंदर का नैचुरल सिस्टम काम करता है, और ब्लड कहीं फ्लोट नहीं करता—क्योंकि कैपिलरी एक्शन और सरफेस टेंशन की वजह से ब्लड कंट्रोल में रहता है। यानी जो लोग सोचते थे कि स्पेस में ब्लड हवा में उड़ेगा, वो गलत थे!