Plant Based Diet Side Effects: शरीर के लिए हानिकारक भी हो सकती है ये Diet

दरअसल प्लांट बेस्ट डाइट में डेयरी प्रोडक्ट का सेवन कम किया जाता है, जबकि फल, सब्जियां, साबुत अनाज, फलियां, नट और बीज जैसी चीजों का इस्तेमाल ज्यादा होता है।

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Published by: TheHealthSite.com | Published : August 30, 2023 9:18 PM IST

Plant Based Diet Side Effects: हम में से ऐसे कई लोग हैं जो खुद हेल्दी और फिट रखने के लिए प्लांट बेस्ड डाइट को फॉलो करते हैं। लेकिन शायद आप जानते नहीं इसके फायदे नहीं नुकसान भी हैं। कैसे? हम बताते हैं। लेकिन उससे पहले आपको बता दें की प्लांट बेस्ड डाइट होता क्या है। दरअसल प्लांट बेस्ट डाइट में डेयरी प्रोडक्ट का सेवन कम किया जाता है, जबकि फल, सब्जियां, साबुत अनाज, फलियां, नट और बीज जैसी चीजों का इस्तेमाल ज्यादा होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सिर्फ इनसे शरीर के लिए जरूरी न्यूट्रिएंट्स की कमी पूरी हो सकती है ? तो चलिए में आगे बढ़ते हैं और जानते हैं की प्लांट बेस्ड डाइट के नुकसान क्या हैं।

गैस और सूजन

प्लांट बेस्ड फूड्स से फाइबर की मात्रा काफी बढ़ सकती, जिससे गैस और ब्लोटिंग की परेशानी हो सकती है। खासकर अगर आपको इसकी आदत नहीं है। ऐसे में डाइट में फाइबर युक्त फूड्स को धीरे-धीरे शामिल करें और हाइड्रेटेड रहें। इससे गैस और सूजन की परेशानी को कम करने में आपको मदद मिल सकती है।

वजन बढ़ना

वैसे तो प्लांट-बेस्ड डाइट को Weight Loss करने के लिए काफी हेल्पफुल माना गया है। लेकिन जैसे कि हम इसके कुछ साइड इफेक्ट्स पर बात कर रहे हैं तो  इसमें वजन बढ़ना भी शामिल है....बता दें, ज्यादा क्वांटीटी में सैचुरेटे वेजिटेरियन फूड आइटम्स या हाई कैलोरी वाले प्लांट-बेस्ड स्नैक्स खाने से वजन बढ़ सकता है।

एलर्जी और सेंसिटिविटी

नट्स, सोया या ग्लूटेन फ्री अनाज जैसे कुछ ऐसे प्लांट बेस्ड फूड आइटम्स हैं, जिसपर ज्यादा डिपेंड रहने से कुछ लोगों में एलर्जी या सेंसिटिविटी पैदा हो सकती है। ऐसे में जोखिम को कम करने के लिए डाइट में और भी ऑप्शन को आप जोड़ सकते हैं।

माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स की कमी

प्लांट बेस्ड डाइट से कभी-कभी विटामिन बी12, आयरन, जिंक, कैल्शियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड जैसे पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। ऐसे में ऐसा डाइट प्लान करें, जिससे आपको यह सभी पोषक तत्व भी मिल सकें।

डाइजेशन से जुड़ी समस्याएं

प्लांट-बेस्ड डाइट में फर्मेंटेड कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा हो सकती है, जो सेंसिटीव लोगों में इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) की समस्या पैदा कर सकता है। इसमें डाइजेशन से जुड़ी परेशानियां ट्रिगर हो सकती हैं।

थायरॉयड फंक्शन

ब्रोकोली और केले जैसी सब्जियों में ऐसे कम्पाउंड होते हैं, जिसको ज्यादा खाने से थायरॉइड फंक्शन बिगड़ सकता है। हालांकी इन सब्जियों को पकाकर खाने से इसके असर को कम करने में मदद मिल सकती है।

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