PCOS Treatment: पीसीओएस से बचने के लिए जरुर करें ये बदलाव, देखें ये Video

लेकिन क्या आप जानती हैं पीसीओएस का मेन कारण आपकी खराब या यूं कहें इंबैलेंस लाइफस्टाइल है...लेकिन 5 छोटे-छोटे बदलाव कर PCOS से आप खुद को बचा सकती हैं.

Published by Lakshmi Sharma |Published : January 9, 2024 5:32 PM IST

PCOS Naturally Treatment:  आज दुनिया में लगभग 10 प्रतिशत महिलाएं ऐसी हैं जो PCOS से जूझ रही हैं और इसकी वजह से पीरियड साइकिल में गड़बड़ी, सही तरह ओव्यूलेट न होने से कंसीव न कर पाना, चेहरे पर एक्ने या बाल की शिकायत, वजन बढ़ना जैसी समस्या हो सकती है. इतना ही नहीं पीसीओएस की शिकार महिलाओं को डायबिटीज का खतरा भी ज्यादा रहता है.

लेकिन क्या आप जानती हैं पीसीओएस का मेन कारण आपकी खराब या यूं कहें इंबैलेंस लाइफस्टाइल है...लेकिन 5 छोटे-छोटे बदलाव कर PCOS से आप खुद को बचा सकती हैं.

PCOS बचने के लिए करें ये बदलाव

स्ट्रेस

स्ट्रेस irregular पीरियड्स की सबसे बड़ी वजह मानी जाती है. काम के दबाव और पर्सनल लाइफ में कई समस्याओं की वजह से मानसिक तौर पर चुनौती मिलती रहती है. ऐसे में मानसिक सेहत पर दबाव पड़ता है, जो पीरियड्स को irregular कर सकता है.

Diet

Experts की मानें तो खाने में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, फलियां, दालें, मेवा और बीज जैसी चीजों को शामिल करें. इससे इंसुलिन लेवल बना रहता है और पीसीओएस मैनेज रहता है. इसके साथ ही खाने में कार्बोहाइड्रेट कम करें. रिफाइंड कार्ब्स जैसे शुगर, व्हाइट ब्रेड, व्हाइट राइस जैसी चीजों से दूरी बनाएं, क्योंकि इसकी वजह से कई समस्याएं बनती हैं.

एंटी-इन्फ्लेमेटरी फूड्स

बता दें, पीसीओएस एक इन्फ्लेमेटरी कंडीशन मानी जाती है, जिसे डाइट से कंट्रोल में रखा जा सकता है. जैसे-  एक्ने और वेट बढ़ने की समस्या. ऐसे में खाने में टमाटर, पत्तेदार सब्जियां, मैकेरल और टूना जैसी फैटी फिश, ट्री नट्स, जैतून के तेल जैसी चीजों को शामिल करें. वहीं, प्रोसेस्ड फूड्स और शुगरी ड्रिंक्स से भी दूरी बनानी चाहिए.

 फिजिकल एक्टिविटी

पीसीओएस मैनेज करने के लिए हेल्दी खानपान के साथ ही फिजिकली फिट रहना भी बेहद जरूरी है. डॉक्टर का कहना है कि हफ्ते में कम से कम 150 मिनट की एक्सरसाइज तनाव को कंट्रोल करने का काम करता है. इससे वजन भी संतुलित बना रहता है.

विटामिन D

पर्याप्त धूप लेने और विटामिन डी से भरपूर चीजों के सेवन से विटामिन डी की कमी दूर होती है औऱ फर्टिलिटी इंप्रूव होती है. इसके साथ ही यह टाइप 2 डायबिटीज, हार्ट बीमारी और स्ट्रोक की समस्या कम हो सकती है.

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