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Published by: Anshumala | Updated : May 22, 2019 5:23 PM IST
गेहूं में यदि अन्य अनाज को मिलाकर आटा पिसवाया जाए, तो ऐसे आटे से बनी रोटी की पौष्टिकता बढ़ जाती है। इस प्रकार के आटे को मल्टीग्रेन आटा या कॉम्बिनेशन फ्लोर कहा जाता है। मल्टीग्रेन आटे से बनी रोटी विभिन्न प्रकार के रोगों में भी लाभदायक होती है।
रोटी तो आप रोज खाती होंगी, लेकिन उसमें कितने प्रकार का आप अनाज इस्तेमाल करती हैं, यह बहुत मायने रखता है। रोटी शरीर को ऊर्जा प्रदान करने का मुख्य स्रोत है। कुछ भी खा लें, घर की बनी रोटी नहीं मिलती तो मन और पेट दोनों ही नहीं भरता है। लगभग हर अनाज कार्बोहाइड्रेट का मुख्य स्रोत होता है। आमतौर पर भारतीय घरों में रोटी बनाने के लिए गेहूं, बाजरा, मक्का और ज्वार जैसे अनाज का प्रयोग किया जाता है।
सेहत के लिए रोटी खाना बेहतर या ब्रेड ?
अधिकांश घरों में मूलत: गेहूं की सादी रोटियां ही बनाई जाती हैं, परंतु गेहूं की रोटी स्वादिष्ट अधिक, पौष्टिक कम होती है। ऐसे में आपको मल्टीग्रेन आटे से बनी रोटियों का सेवन करना चाहिए। गेहूं में यदि अन्य अनाज को मिलाकर आटा पिसवाया जाए, तो ऐसे आटे से बनी रोटी की पौष्टिकता बढ़ जाती है। इस प्रकार के आटे को मल्टीग्रेन आटा या कॉम्बिनेशन फ्लोर कहा जाता है। मल्टीग्रेन आटे से बनी रोटी विभिन्न प्रकार के रोगों में भी लाभदायक होती है।