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How to Identify Fake Medicines: क्या आप जानते हैं कि बाजार में हर 10 में से 1 दवाई नकली हो सकती है? जी हां, नकली दवाइयां सिर्फ आपके पैसे ही नहीं बर्बाद करतीं, बल्कि आपकी सेहत के लिए भी खतरनाक हो सकती हैं। लेकिन घबराइए मत, आज हम आपको बताएंगे कि असली और नकली दवाइयों में फर्क कैसे करें।
सबसे पहला स्टेप है पैकेजिंग चेक करना। नकली दवाओं की पैकेजिंग में अक्सर छोटी-छोटी गलतियां होती हैं। जैसे,
टाइपिंग या स्पेलिंग मिस्टेक्स।
बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग डेट, और एक्सपायरी डेट की गड़बड़ी।
सील टूटी हुई है या किसी तरह का छेड़छाड़
अब बात करते हैं दवाई की जांच करने की। अगर दवाई का रंग, आकार, बनावट पिछली बार से अलग दिखे, तो यह नकली हो सकती है। उदाहरण के लिए, अगर टैबलेट का रंग हल्का, फीका, ज्यादा गहरा है, तो ये चेतावनी का संकेत हो सकता है। और हां, अगर दवाई का स्वाद, गंध अजीब लगे, तो तुरंत अपने डॉक्टर या फार्मासिस्ट से चेक कराएं।