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Published by: Mousumi Dutta | Updated : February 7, 2017 11:35 AM IST
इस छोटी बच्ची का वीडियो देखकर हम यह सोचने पर मज़बूर हो जाते हैं कि माता-पिता को अपने बच्चे के सही व्यक्तित्व के गठन के लिए कौन-सी चीज़े सिखाने की ज़रूरत है? बाल दिवस के अवसर पर विचार करने की आवश्यकता पड़ती है कि हम भारत के लिए किस भविष्य की संकल्पना करने जा रहे हैं? हमें अपने बच्चों को कैसी शिक्षा देनी चाहिए जिससे कि वह अपने परिवार के साथ-साथ देश का नाम उज्जवल कर सकें?
आजकल बच्चों को परवरिश करने का ढंग बदल गया है। माता-पिता अपने बच्चों को आधुनिक समाज के साथ कदम मिलाकर चलने के दौड़ में बचपन से फिल्मी गाने या डांस सिखाने, मोबाइल या वीडियो पर गेम खेलने जैसे चीजों को सिखाकर इस आधुनिक समाज का हिस्सा बनाने की कोशिश करते हैं? लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि आधुनिक बनने की इस दौड़ में आप जो शिक्षा अपने मासूम बच्चे को दे रहे हैं क्या इससे उनका सर्वांगीण विकास हो रहा है? क्या वे परिवार, समाज और देश के लिए कोई मिसाल बन सकेंगे?
आपने कभी यह सोचा है कि क्यों पुराने ज़माने में दादा-दादी या नाना-नानी सुबह पूजा के समय परिवार के सभी सदस्यों के साथ भगवद् गीता का पाठ करते थे और बाद में बच्चे भी धीरे-धीरे इसका पाठ करके सबको सुनाते थे? दरअसल बड़े-बूढ़ों का मानना है कि गीता के पाठ से मन को अपार शांति और सुकून मिलती है। अध्यात्म की शिक्षा की मदद से बचपन से ही बच्चों के मन में बुरे विचारों का संचार होने से रोका जा सकता है और बच्चे के अच्छे व्यक्तित्व के गठन में मदद मिलती है। उनमें बचपन से सही और ग़लत बातों को पहचानने की क्षमता आ जाती है। यहां तक कि बच्चों में गीता के मंत्रोच्चारण से मन को एकाग्र करने की और क्रोध और लोभ को नियंत्रित करने की क्षमता का विकास होने लगता है। इस वीडियो को देखकर यह देखकर आश्चर्य होता हो कि कैसे इतनी छोटी-सी बच्ची बड़ी ही दक्षता और तन्मयता के साथ गीता का मंत्रोच्चारण कर रही है। निश्चित ही यह बाक़ी बच्चों के लिए एक न भूलने वाली मिसाल कायम कर रही है।
विडियो स्रोत: SVYASA University
चित्र स्रोत: SVYASA University