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'पापा को लिवर चाहिए था, मुझे उनका प्यार...' भावुक कर देगी गौरव सिंह की कहानी

अपने पिता को बचाने के लिए गौरव ने अपने लिवर का एक हिस्सा डोनेट करने का फैसला लिया। यह सिर्फ एक मेडिकल प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि एक बेटे का अपने पिता से किया गया वो वादा था, जिसमें उसने अपनी जिंदगी का एक हिस्सा देकर पिता को जिंदगी की नई उम्मीद दी।

Published by Ashu Kumar Das
Published : August 13, 2026 8:38 AM IST

पिता और बेटे का रिश्ता शायद दुनिया के सबसे खूबसूरत रिश्तों में से एक होता है। लेकिन जब जिंदगी ने गौरव के सामने एक ऐसा फैसला रखा, जहां उसके पिता की जिंदगी उसके एक फैसले पर टिकी थी, तो उसने बिना देर किए अपना फैसला कर लिया। गौरव सिंह के पिता को लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत थी। परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल था- पापा को लिवर कौन देगा? गौरव के पास जवाब था- अगर मेरे लिवर का एक हिस्सा पापा की जिंदगी बचा सकता है, तो मैं क्यों पीछे हटूं?

अपने पिता को बचाने के लिए गौरव ने अपने लिवर का एक हिस्सा डोनेट करने का फैसला लिया। यह सिर्फ एक मेडिकल प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि एक बेटे का अपने पिता से किया गया वो वादा था, जिसमें उसने अपनी जिंदगी का एक हिस्सा देकर पिता को जिंदगी की नई उम्मीद दी। ऑपरेशन से पहले डर भी था, चिंता भी थी, लेकिन उससे कहीं ज्यादा मजबूत था पिता को खोने का डर। आज गौरव की कहानी सिर्फ अंगदान की कहानी नहीं है, बल्कि यह बताती है कि जब बात अपनों की जिंदगी की हो, तो रिश्ते इंसान को हर डर से बड़ा बना देते हैं।

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